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खेतों में 3 फीट पानी, सड़ गई बाजरे की फसल... रेवाड़ी में किसान खड़ी फसल पर चला रहे ट्रैक्टर

रेवाड़ी जिले में लगातार भारी बारिश और जलभराव से किसानों की बाजरे की फसल बर्बाद हो गई है. खेतों में 2 से 3 फीट पानी भरने से कटाई के लिए तैयार फसल सड़ गई, जिससे कई किसान खड़ी फसल पर ट्रैक्टर चलाने को मजबूर हैं.

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खड़ी फसल पर ट्रैक्टर चलाते लोग. (Photo: Screengrabs)
खड़ी फसल पर ट्रैक्टर चलाते लोग. (Photo: Screengrabs)

लगातार हुई भारी बारिश ने रेवाड़ी जिले के किसानों की कमर तोड़ दी है. खेतों में 2 से 3 फीट तक पानी भर जाने के कारण कटाई को तैयार बाजरे की फसलें पूरी तरह डूबकर सड़ गई है. साल भर की मेहनत बर्बाद होने और लागत तक न निकलने के चलते कई किसान हताश होकर अपनी ही खड़ी फसलों पर ट्रैक्टर चलाने को मजबूर हैं. 

बारिश और गंभीर जलभराव से सबसे ज्यादा मार उन किसानों पर पड़ी है जिन्होंने जमीनें बटाई (ठेके) पर ली थीं. खाद, बीज और जुताई की भारी लागत लगाने के बाद अब उनके हाथ सिर्फ बर्बादी लगी है. किसानों का कहना है कि वे पहले ही कर्ज के बोझ तले दबे हैं और अब लागत भी नहीं निकल रही. स्थिति यह है कि पिछली बर्बाद फसलों का मुआवजा अभी तक खातों में नहीं आया और अब नई आपदा ने भविष्य अंधकारमय कर दिया है.

बारिश के चलते कई गांवों का कटा संपर्क
बारिश के चलते केवल खेत ही नहीं, बल्कि ग्रामीण बुनियादी ढांचा भी पूरी तरह चरमरा गया है. ​किशनगढ़-बालावास अंडरपास जलमग्न हो गया है. अंडरपास में पानी भरने से घासेड़ा, राजपुरा और बालावास जैसे कई गांवों का आपस में संपर्क पूरी तरह टूट गया है. ग्रामीणों ने गहरा रोष जताते हुए कहा कि रास्ते बंद होने के कारण अब किसी की मृत्यु होने पर शव को अंतिम संस्कार के लिए 20 किलोमीटर घूमकर ले जाना पड़ रहा है. मुसीबत की इस घड़ी में न तो प्रशासनिक अधिकारी जल निकासी की सुध ले रहे हैं और न ही कोई जनप्रतिनिधि हालचाल जानने पहुंचा है.

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ग्रामीणों व किसानों ने प्रशासन से तुरंत पानी निकासी के पुख्ता इंतजाम करने, विशेष गिरदावरी करवाकर उचित मुआवजा जारी करने और लंबित मुआवजा राशि जल्द खाते में डालने की मांग की है. हालांकि अभी इस पर जिम्मेदार अधिकारियों का बयान नहीं आया है. 

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