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'मैं जिंदा हूं साहब...', लेकिन सरकारी सिस्टम मानने को तैयार नहीं, पवन कुमार की दर्दभरी कहानी

हरियाणा के फरीदाबाद में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां बल्लभगढ़ के मिर्जापुर गांव निवासी पवन कुमार को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया है. 49 वर्षीय पवन पिछले दो साल से खुद को जिंदा साबित करने के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी पहचान बहाल नहीं हो सकी है.

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2 साल से न्याय के लिए भटक रहा शख्स.(Photo: Sachin Gaur/ITG)
2 साल से न्याय के लिए भटक रहा शख्स.(Photo: Sachin Gaur/ITG)

फरीदाबाद के बल्लभगढ़ क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक जीवित व्यक्ति को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया है. मिर्जापुर गांव के रहने वाले 49 वर्षीय पवन कुमार पिछले दो साल से अपनी पहचान को सही कराने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें राहत नहीं मिली है.

पवन कुमार का कहना है कि वर्ष 2024 से ही सरकारी दस्तावेजों में उन्हें मृत दिखाया जा रहा है. इस गलती के कारण उनका जीवन प्रभावित हो गया है और उन्हें कई जरूरी सरकारी योजनाओं और सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है.

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सरकारी रिकॉर्ड में ‘मृत’ दर्ज होने से बढ़ी मुश्किलें

पवन कुमार के अनुसार, वह लगातार इस त्रुटि को ठीक कराने के लिए जिला उपायुक्त कार्यालय, समाधान शिविर और अन्य विभागों में कई बार शिकायत कर चुके हैं. लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला है, समाधान नहीं.

इस गलती के कारण न केवल उनकी पहचान पर सवाल उठ रहा है, बल्कि उन्हें सामाजिक और आर्थिक स्तर पर भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. कई योजनाओं का लाभ रुक जाने से उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं.

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दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर पीड़ित

पीड़ित पवन कुमार ने बताया कि वह पिछले दो साल से लगातार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं. हर बार उन्हें दस्तावेजों की जांच और सुधार की प्रक्रिया में उलझा दिया जाता है.

उनका कहना है कि वह बार-बार अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है. इस स्थिति ने उनके जीवन को मानसिक और आर्थिक दोनों रूप से प्रभावित किया है.

सिस्टम की लापरवाही पर उठे सवाल

यह मामला सरकारी रिकॉर्ड सिस्टम की गंभीर लापरवाही को उजागर करता है. एक जीवित व्यक्ति का रिकॉर्ड में मृत दर्ज होना न केवल प्रशासनिक त्रुटि है, बल्कि इससे आम नागरिक के अधिकार भी प्रभावित हो रहे हैं.

पवन कुमार अब उम्मीद लगाए बैठे हैं कि प्रशासन उनकी पहचान को जल्द सही करेगा और उन्हें उनके अधिकार और सुविधाएं वापस मिलेंगी. फिलहाल यह मामला स्थानीय प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है.

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