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चलती BRTS बस के नीचे धंसी सड़क, 15 फीट गहरे गड्ढे में फंसा टायर... ड्राइवर की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा

गुजरात के सूरत में BRTS रूट पर अचानक सड़क धंसने से यात्रियों से भरी बस का पिछला टायर 10-15 फीट गहरे सिंकहोल में फंस गया. ड्राइवर की सूझबूझ से बड़ा हादसा टल गया और सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया. घटना ने स्मार्ट सिटी और प्री-मानसून तैयारियों के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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यात्रियों में मची चीख-पुकार.(Photo: Screengrab)
यात्रियों में मची चीख-पुकार.(Photo: Screengrab)

गुजरात के सूरत शहर में एक बार फिर सड़क निर्माण की गुणवत्ता और प्री-मानसून तैयारियों पर सवाल खड़े हो गए हैं. शहर के व्यस्त वराछा इलाके में BRTS रूट पर अचानक सड़क धंस गई और यात्रियों से भरी एक बस का पिछला टायर विशाल गड्ढे में समा गया. घटना के बाद बस में सवार यात्रियों के बीच चीख-पुकार मच गई और मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया.

दरअसल, यह घटना वराछा क्षेत्र के कपोद्रा रचना सर्कल स्थित महक होटल के पास हुई. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बस सामान्य गति से अपने निर्धारित रूट पर जा रही थी. तभी सड़क अचानक धंस गई और बस का पिछला हिस्सा गहरे गड्ढे में फंस गया. गनीमत रही कि ड्राइवर ने तुरंत बस रोक दी, जिससे बड़ा हादसा टल गया.

यह भी पढ़ें: रथ यात्रा से पहले सूरत में क्राइम ब्रांच का बड़ा अभियान, 15 हिस्ट्रीशीटर समेत 70 से अधिक आरोपी दबोचे

बताया जा रहा है कि सड़क के बीच बना यह सिंकहोल करीब 10 से 15 फीट गहरा और 6 से 8 फीट चौड़ा था. यदि बस कुछ और आगे बढ़ जाती या चालक समय रहते नियंत्रण नहीं करता, तो पूरी बस गड्ढे में समा सकती थी. हादसे के तुरंत बाद सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया.

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यात्रियों में मची चीख-पुकार

घटना के बाद मौके पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग जमा हो गए. बस के गड्ढे में फंसने से पूरे BRTS कॉरिडोर पर यातायात प्रभावित हो गया और इस रूट पर चलने वाली अन्य बसों की आवाजाही कुछ समय के लिए रोकनी पड़ी.

स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस जगह सड़क धंसी है, वहां हाल ही में नई ड्रेनेज लाइन बिछाने और सड़क की मरम्मत का काम किया गया था. निर्माण कार्य पूरा होने के बाद सड़क की री-सरफेसिंग भी की गई थी, लेकिन पहली ही बारिश के दौरान सड़क की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए.

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार सड़क धंसने की वजह मिट्टी का सही तरीके से कॉम्पेक्शन नहीं होना माना जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रेनेज कार्य के बाद यदि भराई और दबाव परीक्षण सही तरीके से नहीं किया जाए, तो इस तरह के सिंकहोल बनने का खतरा बढ़ जाता है.

सूरत

स्मार्ट सिटी के दावों पर उठे सवाल

यह घटना सूरत महानगरपालिका की प्री-मानसून तैयारियों और इंजीनियरिंग कार्यों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में लापरवाही और घटिया गुणवत्ता के कारण सड़क धंस गई. यदि यह हादसा कुछ सेकंड बाद होता, तो बड़ी जनहानि से इनकार नहीं किया जा सकता था.

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वराछा और कपोद्रा सूरत के सबसे व्यस्त और घनी आबादी वाले इलाकों में शामिल हैं. ऐसे में BRTS रूट पर सड़क धंसने से हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा. घटना के बाद प्रशासन ने इलाके को घेरकर यातायात को डायवर्ट किया और सड़क की मरम्मत का काम शुरू कराया.

सूरत में सड़क धंसने की यह पहली घटना नहीं है. इससे पहले भी शहर के कई इलाकों में सड़क धंसने और बड़े गड्ढे बनने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं. इस ताजा मामले ने एक बार फिर शहर में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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