काशी के ज्ञानवापी विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है. कोर्ट ने हिंदू और मुस्लिम पक्षों को विशेष लोक अदालत भेजा है, ताकि दोनों पक्ष बातचीत के जरिए किसी सहमति तक पहुंच सकें. इस समाधान के लिए आगामी 21, 22 और 23 अगस्त को एक विशेष लोक अदालत लगाई जाएगी, जिसमें ज्ञानवापी के साथ-साथ मथुरा और संभल विवाद पर भी आपसी सुलह की कोशिश होगी.
सुप्रीम कोर्ट चाहता है कि लंबे समय से चल रहे इस विवाद का समाधान बातचीत के जरिए निकले. इसी सोच के साथ हिंदू और मुस्लिम पक्षों को विशेष लोक अदालत में भेजा गया है. यहां दोनों पक्ष आमने-सामने बैठकर अपनी बात रखेंगे और आपसी सहमति बनने की संभावना पर चर्चा करेंगे.
इस पूरे मामले को सुलझाने के लिए आगामी 14 जुलाई को वाराणसी में एक शुरुआती बातचीत होगी. दरअसल, इस प्री-सुलह वार्ता का मुख्य उद्देश्य यह है कि मुख्य अदालत लगने से पहले ही दोनों पक्षों के बीच बातचीत का एक मजबूत आधार तैयार किया जा सके. इसके बाद, आगामी 21 से 23 अगस्त तक तीन दिनों की विशेष लोक अदालत लगेगी, जहां दोनों पक्षों को आमने-सामने बिठाया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट को पूरी उम्मीद है कि इस आपसी बातचीत से कोई न कोई सकारात्मक रास्ता जरूर निकलेगा.
क्या है सुप्रीम कोर्ट का 'समाधान समारोह'?
सुप्रीम कोर्ट ने अपनी 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में विशेष लोक अदालतों के आयोजन का फैसला किया है. इसी कड़ी में 'समाधान समारोह-2026' पहल की शुरुआत की गई है. इस मुहिम के तहत आपसी सहमति वाले कई सिविल और बरसों से लंबित पड़े पुराने मुकदमों को इस विशेष अदालत में ट्रांसफर किया जा रहा है. ज्ञानवापी जैसे बेहद जटिल और संवेदनशील मामलों में भी कोर्ट की यही कोशिश है कि दोनों पक्षों को एक टेबल पर लाकर आपसी बातचीत से कोई बीच का रास्ता निकाला जाए, ताकि अदालतों पर मुकदमों का बोझ कुछ कम हो सके.
दूसरे मामलों को भी जोड़ा गया
ज्ञानवापी विवाद के अलावा श्रीकृष्ण जन्मभूमि और संभल के हरि मंदिर-मस्जिद विवाद से जुड़े पक्षों को भी नोटिस भेजे गए हैं. इन मामलों को भी विशेष लोक अदालत की प्रक्रिया से जोड़कर बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की कोशिश की जा रही है. सुप्रीम कोर्ट की यह पहल ऐसे मामलों में अदालत के बाहर आपसी सहमति से हल निकालने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है.