दिल्ली की एक अदालत ने एक व्यक्ति को शादी के झूठे वादे कर सात साल से भी अधिक समय तक 19 साल की एक लड़की का बलात्कार करने के आरोप से बरी कर दिया है. मुकदमे की सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि आरोपी द्वारा उससे शादी से इनकार करने के बाद ही लड़की ने शादी के लिए बाध्य करने के लिए उस पर झूठे आरोप लगाए थे.
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश टी आर नवल ने इस तथ्य के मद्देनजर आरोपी को बरी कर दिया. इससे पहले लड़की ने अदालत में कहा कि जब लड़के ने शादी का उसका प्रस्ताव अस्वीकार करके किसी और से विवाह कर लिया तो उसने उसके खिलाफ झूठी शिकायत की.
अदालत ने कहा कि अब 22 साल की हो चुकी लड़की ने कहा कि आरोपी उसकी बहन का पड़ोसी है. वह अपनी बहन के घर जाया करती थी, उसी दौरान दोनों में दोस्ती हो गयी.
अदालत में गवाही के दौरान लड़की ने कहा कि वह आरोपी से शादी करना चाहती थी लेकिन उसने अस्वीकार कर दिया. हालांकि उसने जबर्दस्ती या शादी के झूठे वादे कर उसके साथ कभी शारीरिक संबंध नहीं बनाए.
उसने अदालत से यह भी कहा कि आरोपी की 27 जनवरी, 2012 को किसी और महिला से शादी हो गयी और तब जाकर उसने उसके खिलाफ शिकायत की.
अदालत के संज्ञान में यह बात भी आयी कि लड़की को मेडिकल परीक्षण के लिए अस्पताल ले जाया गया लेकिन उसका कभी परीक्षण ही नहीं हुआ.