उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली के सामूहिक बलात्कार कांड की शिकार युवती के पुरुष मित्र के समाचार चैनल को दिये गये इंटरव्यू की सीडी साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल करने के लिये अभियुक्तों को दी गयी उच्च न्यायालय की अनुमति पर शुक्रवार को रोक लगा दी.
प्रधान न्यायाधीश अलतमस कबीर की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने दिल्ली उच्च न्यायालय के सात मार्च के आदेश पर शुक्रवार को रोक लगाई. इससे पहले, दिल्ली पुलिस ने न्यायालय में दलील दी कि समाचार चैनल को दिया गया इंटरव्यू साक्ष्य के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता है.
उच्च न्यायालय ने अभियुक्त राम सिंह और उसके भाई मुकेश की याचिका स्वीकार करते हुए समाचार चैनल को दिया गया इंटरव्यू की सीडी बतौर साक्ष्य इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं देने का निचली अदालत का आदेश निरस्त कर दिया था. यह इंटरव्यू चार जनवरी को प्रसारित हुआ था.
राजधानी में पिछले साल 16 दिसंबर को एक निजी बस में 23 वर्षीय लड़की से सामूहिक बलात्कार किया गया था. इस दौरान कथित बलात्कारियों ने इस लड़की को बुरी तरह जख्मी कर दिया था. बाद में सिंगापुर में इलाज के दौरान 29 दिसंबर को इस लड़की की मृत्यु हो गयी थी.
इस सनसनीखेज वारदात में बस चालक राम सिंह और उसके भाई मुकेश के अलावा तीन अन्य बालिग पवन गुप्ता, विनय शर्मा ओर अक्षय सिंह पर अदालत में मुकदमा चल रहा है जबकि एक अन्य आरोपी को किशोर घोषित किया जा चुका है और उस पर किशोर न्याय बोर्ड में मुकदमा चल रहा है.
निचली अदालत ने इस मामले में पांच आरोपियों के खिलाफ दो फरवरी को भारतीय दंड संहिता के विभिन्न प्रावधानों के तहत सामूहिक बलात्कार, हत्या, हत्या के प्रयास, अप्राकृतिक अपराध, डाकेजनी,साजिश और अपहरण के आरोपों में अभियोग निर्धारित किये थे. इस वारदात के मुख्य आरोपी राम सिंह की मृत्यु हो जाने के कारण उसका मामला बंद कर दिया गया है.