सत्य निकेतन में डिमोलिशन ड्राइव शुरू हो गया है. (Photo- ITGD) दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए इमारत हादसे के बाद प्रशासन अलर्ट हो गया है. हादसे में गिरी इमारत के ठीक बगल में बनी बहुमंजिला बिल्डिंग भी जर्जर हाल में पाई गई. ऐसे में प्रशासन आज से डिमोलिश करने की तैयारी में जुट गया है.
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सत्य निकेतन इलाके की जर्जर और खंडहर बनी इमारतों को गिराने का निर्देश दिया है. ऐसे में डिमोलिशन टीम पूरी तरह तैयार हो गई है. कार्रवाई से पहले खतरे के दायरे में आई इस इमारत से बच्चों और बाकी लोगों के सामान को सुरक्षित बाहर निकालने का काम तेजी से किया जा रहा है.
दिल्ली नगर निगम की डिमोलिशन टीम जरूरी उपकरणों और भारी मशीनों के साथ मौके पर तैनात है और कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है.
दिल्ली के सत्य निकेतन में पीजी इमारत ढहने के हादसे और दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के छात्रों के लिए हॉस्टलों की कमी पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने सख्त रुख अपनाया है. आयोग ने यूजीसी (UGC) के अध्यक्ष और दिल्ली के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी है. NHRC ने यूजीसी और दिल्ली सरकार को डीयू प्रशासन के साथ मिलकर छात्रों के लिए हॉस्टल सुविधाओं के विस्तार, मौजूदा हॉस्टलों के रेनोवेशन और जहां जरूरत हो वहां नए हॉस्टल बनाने की संभावनाओं पर पूरी रिपोर्ट देने को कहा है.
सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत ढहने के बाद आसपास की इमारतों पर भी इसका खतरनाक असर दिखने लगा है. हादसे के बाद पास की इमारतों में दरारें आ गई हैं, जिससे वहां रहने वाले छात्रों और स्थानीय निवासियों में भारी दहशत है. सुरक्षा को देखते हुए छात्र तेजी से अपने कमरे खाली कर रहे हैं. कमरा खाली कर रहे छात्रों का आरोप है कि मकान मालिक उनकी सिक्योरिटी डिपॉजिट वापस करने से साफ इनकार कर रहे हैं. छात्रों का कहना है कि वो किसी भी अनहोनी के डर से मकान छोड़ रहे हैं, लेकिन मकान मालिक रिफंड देने में आनाकानी कर रहे हैं.

सत्य निकेतन हादसे को लेकर लेफ्ट से जुड़े छात्र संगठनों के साथ-साथ NSUI और ABVP भी प्रदर्शन कर रहे हैं. प्रदर्शन कर रहे छात्रों की प्रमुख मांग है कि क्षेत्र में छात्रों के लिए हॉस्टल की व्यवस्था की जाए. इसके अलावा, हादसे में मारे गए छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा देने की भी मांग की जा रही है.
(इनपुट- अनमोल नाथ बाली)
सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत गिरने के हादसे के विरोध में दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र सड़कों पर उतर आए हैं. साउथ कैंपस के कॉलेजों के छात्रों ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए इस घटना को हादसा नहीं, बल्कि 'हत्या' करार दिया है. छात्रों ने मांग की है कि हादसे की जिम्मेदारी तय की जाए, मृतक छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा मिले और दिल्ली के सभी पीजी का कड़ा ऑडिट कराया जाए. प्रदर्शनकारियों ने डीयू में हॉस्टलों की भारी कमी पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के सिर्फ 20 कॉलेजों में ही हॉस्टल सुविधा है. छात्रों ने पूछा कि क्या डीयू छात्रों की जिंदगी की यही कीमत है?
ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया के दौरान किसी भी हादसे और अचानक इमारत ढहने से रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. इमारत को सुरक्षित तरीके से ढहाने से पहले लोहे के भारी पाइपों से सहारा दिया गया है ताकि आसपास की दूसरी संपत्तियों या वहां मौजूद टीम को कोई नुकसान न पहुंचे.
सत्य निकेतन में जानलेवा साबित हुई इमारत के जमींदोज होने के बाद आसपास के भवनों की सुरक्षा व्यवस्था और मजबूती पर सवाल खड़े हो गए हैं. ढही हुई बिल्डिंग से बिल्कुल सटकर बनी ये दूसरी इमारत भी कई मंजिला है. इस इमारत में दुकानें बनी हुई हैं और कई लोग रह रहे हैं. जांच में सामने आया है कि कई मंजिला होने के बावजूद इस इमारत में कोई पिलर नहीं है. इतना ही नहीं, इमारत के आसपास बिजली के तार बेतरतीब लटक रहे हैं, जिससे बड़ा खतरा बना हुआ है.