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युवा वकीलों को चीफ जस्टिस का मैसेज- न्याय के संस्थान की हिफाजत अब आपका काम

सुप्रीम कोर्ट परिसर में राष्ट्रीय ध्वज फहराने का कार्यक्रम हुआ. चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने देश के नाम संदेश देते हुए कहा कि स्वतंत्रता की लड़ाई एक निरंतर राजनीतिक आंदोलन थी. यह केवल सशस्त्र विद्रोह नहीं था. उन्होंने युवा वकीलों को जिम्मेदारी संभालने और न्याय के प्रति प्रतिबद्ध रहने का आह्वान किया. CJI ने कहा कि देश की तरक्की के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है.

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CJI सूर्यकांत ने युवा वकीलों से कहा कि न्याय की हिफाजत अब आपकी जिम्मेदारी है. (फाइल फोटो-ITG)
CJI सूर्यकांत ने युवा वकीलों से कहा कि न्याय की हिफाजत अब आपकी जिम्मेदारी है. (फाइल फोटो-ITG)

देश आज अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है. आजादी के जश्न के इस खास मौके पर सुप्रीम कोर्ट परिसर में भी कार्यक्रम हुआ. सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की तरफ से राष्ट्रीय ध्वज फहराने का कार्यक्रम हुआ.

इस दौरान देश के कई वरिष्ठ जज, वकील और कोर्ट के कर्मचारी बड़ी संख्या में मौजूद रहे. इस मौके पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत ने देश के नाम अहम संदेश दिया.

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि पिछले आठ दशकों में हमारे देश ने कई कठिन चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया है. देश की यह यात्रा सिर्फ इतनी सी नहीं है कि हमने अब तक क्या हासिल किया है. हर नई उपलब्धि के साथ हमारे ऊपर एक नई जिम्मेदारी और कर्तव्य भी आ जाता है.

उन्होंने स्पष्ट किया कि हमारे आगे का सफर अभी बहुत लंबा है और देश की तरक्की के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है.

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि हमारी आजादी की लड़ाई दुनिया के दूसरे उपनिवेशों की तरह मुख्य रूप से कोई सशस्त्र विद्रोह नहीं थी. यह औपनिवेशिक शासन की वैधता को चुनौती देने वाला एक निरंतर राजनीतिक आंदोलन, जनसभाओं, बहसों और सबसे बढ़कर कानून की भाषा के जरिए लड़ा गया संघर्ष था.

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युवा वकीलों और कानून के छात्रों के लिए संदेश

मुख्य न्यायाधीश ने युवा वकीलों को भी संबोधित किया. उन्होंने कहा कि बार की जिम्मेदारी आजादी के दिनों से चली आ रही है. वह बहुत जल्द आप सभी युवाओं के कंधों पर आने वाली है. जिन न्याय की संस्थाओं को पिछली पीढ़ियों ने खून-पसीना बहाकर बनाया और मजबूत किया है. अब उनकी रक्षा करने और उन्हें आगे ले जाने की जिम्मेदारी आपकी है.

उन्होंने युवा वकीलों को आश्वस्त किया कि बार और बेंच दोनों ही उनके विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं. उन्हें बेहतरीन मेंटरशिप, आगे बढ़ने के नए मौके और उनका मार्गदर्शन देने के लिए वरिष्ठ हमेशा तैयार हैं. उन्होंने कहा कि आजादी के सफर के जो मील के पत्थर अभी बाकी हैं, उन्हें अब आपको ही तय करना है. इस सफर में हम सब आपके साथ हैं.

'आज का दौर अधिक प्रतिस्पर्धी, पर युवाओं में अद्भुत क्षमता'
युवा वकीलों के सामने आने वाली चुनौतियों का जिक्र करते हुए सीजेआई ने माना कि आज के समय में यह पेशा काफी प्रतिस्पर्धी हो गया है. शुरुआती सालों में प्रैक्टिस जमाने का दबाव और सीखने का यह सफर काफी कठिन और तेज हो गया है.

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इसके बावजूद चीफ जस्टिस ने कहा कि उन्होंने आज की युवा पीढ़ी में एक अद्भुत लचीलापन, तेज दिमाग और न्याय के प्रति सच्ची प्रतिबद्धता देखी है. आज के युवा एक ऐसी दुनिया में बड़े हुए हैं जहां टेक्नोलॉजी ने ज्ञान और संवाद का तरीका पूरी तरह बदल दिया है. वे अपनी इसी काबिलियत और अनुकूलन क्षमता को कोर्ट रूम में लेकर आ रहे हैं.

इसके अलावा, आज के युवा समानता, समावेशिता और न्याय तक सबकी पहुंच जैसे सामाजिक मुद्दों को लेकर बहुत अधिक संवेदनशील और जागरूक हैं.

यह भी पढ़ें: 'नो व्हीकल डे' का असर... पैदल कोर्ट पहुंचे चीफ जस्टिस, उत्तराखंड हाईकोर्ट में ईंधन बचाने की पहल

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने स्पीच के आखिर में कहा कि हमारी न्याय और कानूनी संस्थाएं भी इस गणतंत्र के साथ बहुत तेजी से विकसित हुई हैं. देश की अंतरात्मा को आकार देने में उन्होंने एक बड़ी भूमिका निभाई है. आज भी देश के अलग-अलग कोनों और पृष्ठभूमियों से लोग अपनी संवैधानिक और कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए अदालतों में आते हैं.

चीफ जस्टिस ने कहा कि अदालतें सभी नागरिकों और वकीलों के लिए एक ऐसी जगह बनी हुई हैं जो देश को एकजुट रखती हैं और हर किसी को कानून के सामने समान अधिकार दिलाती हैं.
 

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