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दिल्ली प्रशासन की घोर लापरवाही, फायर सेफ्टी पर हाईकोर्ट के 6 महीने पुराने आदेश की अनदेखी, भ्रष्टाचार के तले दबी फाइलें

दिल्ली के मालवीय नगर में बुधवार को हुए भीषण अग्निकांड ने प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है. दिल्ली नगर निगम, दमकल विभाग और पुलिस की लापरवाही के कारण दिल्ली हाईकोर्ट का छह महीने पुराना वह आदेश फाइलों में ही दबा रह गया, जिसे सुरक्षा पुख्ता करने के लिए जारी किया गया था.

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दिल्ली में हाईकोर्ट के आदेश की अनदेखी. (photo: ITG)
दिल्ली में हाईकोर्ट के आदेश की अनदेखी. (photo: ITG)

दिल्ली के मालवीय नगर में बुधवार को हुए भीषण अग्निकांड ने ये साबित कर दिया कि दिल्ली हाईकोर्ट के छह महीने पुराने आदेश पर दिल्ली नगर निगम, अग्निशमन विभाग और पुलिस ने अब तक कुछ भी नहीं किया. आदेश की फाइल धरी रह गई और भ्रष्टाचार उस पर पैर धरता हुआ निकल गया, रिश्वत के तले वो आदेश दबता चला गया.

दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की खंडपीठ ने 7 जनवरी को अधिकारियों को राजधानी भर के सारे होटल, रेस्तरां और अन्य आतिथ्य प्रतिष्ठानों में अपर्याप्त अग्नि सुरक्षा उपायों के बारे में चिंताओं को तत्काल दूर करने का निर्देश दिया था.

मामले से जुड़े वकील के बयान और मौजूदा हालात के मुताबिक, तो यही सामने आया है कि संबंधित अधिकारियों ने अभी तक आदेश का पालन करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है.

हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की पीठ ने एक जनहित याचिका की सुनवाई कर रही थी, जिसमें सुरक्षा मानकों को मजबूत करने के लिए एक व्यापक कार्य योजना तैयार करने की मांग करते हुए यह मुद्दा उठाया गया था.

पीठ ने याचिका का निपटारा करते हुए दिल्ली सरकार, एमसीडी और एनडीएमसी को इस जनहित याचिका में उठाए गए को एक प्रतिनिधित्व के रूप में मानने और 'शीघ्र उचित निर्णय' लेकर त्वरित कार्रवाई करने का निर्देश दिया था.

अदालत ने आग की घटनाओं से बचने के लिए सुरक्षा उपायों को लागू करने हेतु 'शीघ्र' एक कार्य योजना तैयार करने का निर्देश दिया था.

वकील अर्पित भार्गव ने 6 दिसंबर, 2025 को गोवा के एक नाइट क्लब में आग लगने से 25 लोगों की जान जाने के बाद ये जनहित याचिका दायर की थी.

याचिका में कहा गया था कि उन्होंने दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव, एमसीडी के आयुक्त और एनडीएमसी के अध्यक्ष को अग्निशमन को लेकर कोर्ट के पुराने आदेश का पालन करने के लिए बार-बार अनुस्मारक कई बार भेजे हैं, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ.

प्रशासन की इस निष्क्रियता को 'पूर्ण उदासीनता' बताते हुए, उन्होंने दावा किया कि उन्होंने 5 मई को अधिकारियों को अंतिम अनुस्मारक भेजा था. उसमें उनसे पिछले कुछ महीनों में हुई कई आग की घटनाओं के मद्देनजर अदालत के निर्देशों का पालन करने का अनुरोध भी किया था।लेकिन मौजूदा घटना बताती है कि भ्रष्ट, उदासीन और ढीठ अधिकारियों ने अपने लोभ लालच और भ्रष्ट सोच के आगे ना तो कोर्ट के आदेश को गंभीरता से लिया ना ही लगातार भेजी जा रही चेतावनियों पर ध्यान दिया.

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