राजधानी दिल्ली के कालिंदी कुंज इलाके में दहेज उत्पीड़न के एक गंभीर मामले में अदालत ने पति, सास और देवर को दोषी ठहराते हुए 10-10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है. अदालत ने माना कि आरोपियों ने दहेज की मांग को लेकर महिला के साथ क्रूरता की और विवाद के बाद उसे दूसरी मंजिल की बालकनी से नीचे फेंक दिया. इस घटना में महिला गंभीर रूप से घायल हो गई और कमर के नीचे से हमेशा के लिए लकवाग्रस्त हो गई.
पुलिस के अनुसार दोषियों की पहचान आमिर खान, उसकी मां नसरीन और उसके भाई सोनू उर्फ फिरोज के रूप में हुई है. यह मामला फरवरी 2022 का है और कालिंदी कुंज थाना क्षेत्र से जुड़ा हुआ है. पीड़िता ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि शादी के बाद से ही उसके पति और ससुराल पक्ष के अन्य सदस्य दहेज को लेकर उसे लगातार प्रताड़ित करते थे. महिला का कहना था कि उस पर लगातार दबाव बनाया जाता था और दहेज की मांग पूरी नहीं होने पर उसके साथ दुर्व्यवहार किया जाता था.
पीड़िता की शिकायत के आधार पर कालिंदी कुंज थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 307, 498ए, 342 और 34 के तहत मामला दर्ज किया गया था. इसके बाद पुलिस ने मामले की विस्तृत जांच शुरू की. जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि 14 फरवरी 2022 को दहेज की मांग को लेकर परिवार में विवाद हुआ था. आरोप है कि इसी विवाद के बाद तीनों आरोपियों ने साझा मंशा के तहत महिला को उनके घर की दूसरी मंजिल की बालकनी से नीचे फेंक दिया.
मेडिकल और वैज्ञानिक साक्ष्यों ने खोली आरोपियों की पोल
बालकनी से गिरने के कारण महिला को रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोटें आईं. पुलिस के अनुसार हादसे के बाद उसकी हालत बेहद गंभीर हो गई थी. इलाज के दौरान यह सामने आया कि महिला कमर के नीचे के हिस्से से स्थायी रूप से लकवाग्रस्त हो गई है. इस घटना ने उसके पूरे जीवन को प्रभावित कर दिया. मामले की जांच के दौरान पुलिस ने मेडिकल रिकॉर्ड, दस्तावेजी साक्ष्य और वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए. जांच टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया, मामले से जुड़े सबूत जब्त किए और गवाहों के बयान भी दर्ज किए.
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच में जुटाए गए साक्ष्यों से आरोपियों की भूमिका स्पष्ट रूप से सामने आई. जांच पूरी होने के बाद अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया गया. मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों के जरिए अपना पक्ष रखा. अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर तीनों आरोपियों को दोषी करार दिया. सत्र न्यायालय ने आमिर खान, सोनू उर्फ फिरोज और नसरीन को भारतीय दंड संहिता की धारा 307 और 34 के तहत दोषी ठहराया. वहीं आमिर खान और नसरीन को धारा 498ए और 34 के तहत भी दोषी पाया गया.
एक जून को सजा सुनाते समय अदालत ने अपराध की गंभीरता और पीड़िता को हुई स्थायी शारीरिक क्षति को विशेष रूप से ध्यान में रखा. अदालत ने कहा कि महिला को ऐसी चोटें लगी हैं, जिन्होंने उसका पूरा जीवन बदल दिया है. अदालत ने तीनों दोषियों को धारा 307 और 34 के तहत 10-10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई. इसके साथ ही उन पर जुर्माना भी लगाया गया. अदालत ने पीड़िता को विक्टिम कम्पेनसेशन स्कीम के तहत मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है.
अदालत ने पीड़िता को मुआवजा देने का भी दिया आदेश
इस फैसले को दहेज उत्पीड़न और महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामलों में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है. अदालत ने अपने आदेश के जरिए यह स्पष्ट संदेश दिया है कि महिलाओं के साथ क्रूरता और हिंसा करने वालों के खिलाफ कानून सख्ती से कार्रवाई करेगा.