हर साल दिल्ली ट्रैफिक पुलिस कई ऐसी जगह और सड़कें चिन्हित करती है जहां पर बारिश में जलभराव हो जाता है. ट्रैफिक पुलिस हर बार पीडब्ल्यूडी, एमसीडी और एनडीएमसी जैसी सिविक एजेंसियों को इन जगहों को दुरस्त करने के लिए चिट्ठियां भी लिखती है. लेकिन, हालात जस की तस ही रह जाती है.
आपको बता दें कि 2015 में ट्रैफिक पुलिस ने ऐसे 160 जगहों को चिन्हित किया था जहां जलभराव की समस्या थी. 2016 में उसे सिर्फ 58 ऐसी जगहें मिलीं तो वहीं 2017 में 90 जगहों पर जलभराव की समस्या नजर आई. खास बात ये है कि ट्रैफिक पुलिस द्वारा बताई गई सभी जगहों में से अधिकांश जगह पीडब्ल्यूडी के हिस्से की हैं.
दिल्ली के स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर में सड़क पर रिसर्च करने वाले प्रोफेसर सेवा राम बताते हैं कि दिल्ली में जलभराव नया नहीं है. हर साल सैकड़ों जगहों पर जलभराव होता है. चाहे दिल्ली का प्रमुख चौराहा ITO हो, हाईकोर्ट के सामने का लुटियन जोन हो या फिर कोई अंदरूनी सड़क हर जगह स्थिति कमोबेश यही है.
जिन एजेंसियों को ये सुधार करना है उनमें आपसी खींचतान बनी रहती है. के पीडब्ल्यूडी का टकराव जगजाहिर है. जाहिर है चाहे दिल्ली की छोटी सड़कें हो या फिर पीडब्ल्यूडी के अंतर्गत आने वाली बड़ी सड़क, समस्या हर जगह एक सी है. जरा सी बारिश में जलभराव. एजेंसियों की आपसी खींचतान में हल निकलता नहीं दिख रहा है.
- अधिकतर जगह सड़क के दोनों ओर नालियां ना होना
- नालियां जाम होना
- सड़क का लेवल निचला होना
- चौराहों पर चारों तरफ से पानी जमा होना
- अंडरपास में वाटर पंप से पानी निकासी जारी रखी जाए
- सभी सड़कों के आसपास की नालियां साफ की जाएं
- सड़क का लेवल नालियों से ऊंचा रखा जाए
- अंडरपास में पंपसेट के जरिए तुरंत पानी निकाला जाए
- GPS के जरिए जलभराव को लाइव ट्रैक किया जाए