scorecardresearch
 

अल्पसंख्यक आयोग की CJI को चिट्ठी, CAA पर प्रदर्शन में पुलिस एक्शन की जांच हो

दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग ने नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों पर पुलिसिया कार्रवाई के खिलाफ चिट्ठी लिखकर निष्पक्ष जांच की मांग की है. आयोग ने कहा कि पुलिस बर्बरता के मामले में निष्पक्ष जांच हो और कड़ी कार्रवाई हो.

Advertisement
X
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एसए बोबडे (फाइल फोटो-PTI)
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एसए बोबडे (फाइल फोटो-PTI)

  • दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग ने चीफ जस्टिस एसए बोबडे को लिखी चिट्ठी
  • CAA प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस एक्शन की जांच की उठाई मांग

दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग ने नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों पर पुलिसिया कार्रवाई के खिलाफ चिट्ठी लिखकर निष्पक्ष जांच की मांग की है. आयोग ने कहा कि पुलिस बर्बरता के मामले में निष्पक्ष जांच हो और कड़ी कार्रवाई हो. दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग ने मुख्य न्यायाधीश से स्वत: संज्ञान लेने का निवेदन किया है. अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष डॉक्टर जफरुल इस्लाम खान ने यह चिट्ठी लिखी है.

आयोग ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोगों का अधिकार है. यह चिट्ठी 10 जनवरी को लिखी गई है, जिसमें दिन के साथ-साथ पुलिस बर्बरता के आरोप वाले 87 केस की जानकारी भी दी गई. इसमें दिल्ली के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और असम समेत कई राज्यों के मामले शामिल किए गए हैं.

Advertisement

अल्पसंख्यक आयोग ने अपनी चिट्ठी में कहा है कि पुलिस प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एक्शन पर ही नहीं रुकी बल्कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हमला भी किया. 15 दिसंबर 2019 को जामिया मिलिया इस्लामिया में प्रदर्शनकारियों पर हमला किया गया. फिर मेरठ, बिजनौर, सीमापुरी जैसे दिल्ली, वाराणसी, मैंगलोर आदि कई स्थानों पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर अत्याचार किया.

delhi-caa-protest_011420092432.jpgदिल्ली अल्पसंख्यक आयोग की चीफ जस्टिस को लिखी चिट्ठी

इस चिट्ठी में दावा किया गया है कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के हाथ-पैर और सिर पर हमला किया. पुलिस की बर्बरता के कई वीडियो सोशल मीडिया पर चल रहे हैं. कुछ वीडियोज बायकॉट एनआरसी फेसबुक पेज पर देखे जा सकते हैं.

87 घटनाओं का कियाा गया जिक्र

मुख्य न्यायाधीश को लिखी चिट्ठी में यूपी, कर्नाटक, असम, जम्मू-कश्मीर, गुजरात और दिल्ली जैसे कई राज्यों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की बर्बरता की 87 घटनाओं की एक सूची का जिक्र किया गया है. अल्पसंख्यक आयोग ने मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया है कि पुलिस के दमनकारी रवैये के खिलाफ कार्रवाई की जाए, साथ ही किस तरह से भविष्य में इन चुनौतियों से निपटा जाए, इसके लिए सुप्रीम कोर्ट एक नजीर पेश करे.

Advertisement
Advertisement