दिल्ली हाईकोर्ट से बिजली वितरण कंपनी BSES राजधानी पावर लिमिटेड को एक बड़ा झटका लगा है. अदालत ने कंपनी की उस याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया है, जिसमें उसने नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) के भेजे गए ऑडिट नोटिस को चुनौती दी थी.
इस मामले पर अपना रुख साफ करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि फिलहाल CAG की ओर से सिर्फ एक नोटिस ही जारी किया गया है. ऑडिट की असल और औपचारिक प्रक्रिया अभी तक शुरू भी नहीं हुई है, इसलिए इस स्तर पर नोटिस को चुनौती देने का कोई ठोस आधार नहीं बनता है.
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि दिल्ली की बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के CAG ऑडिट पर किसी भी तरह की कोई रोक या पाबंदी नहीं है. हालांकि, कोर्ट ने ये निर्देश भी दिया है कि इस ऑडिट प्रक्रिया के दौरान माननीय सुप्रीम कोर्ट की ओर से तय किए गए सभी दिशा-निर्देशों का पूरी तरह से और कड़ाई से पालन किया जाना बेहद जरूरी है.
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सुप्रीम कोर्ट के किसी भी पुराने फैसले में कहीं पर भी बिजली कंपनियों के CAG ऑडिट पर पूरी तरह से बैन या प्रतिबंध नहीं लगाया गया है. अदालत के मुताबिक, अगर देश की सभी तय कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पूरी तरह से पालन किया जाता है, तो इन बिजली कंपनियों का ऑडिट सही ढंग से कराया जा सकता है.
CAG को नियमों का करना होगा पालन
अदालत ने कहा कि BSES को इस पूरे मामले में अपना पक्ष रखने और अपनी किसी भी तरह की आपत्ति को दर्ज कराने का पूरा अधिकार है. इसके साथ ही, CAG को भी ऑडिट शुरू करने से पहले संबंधित बिजली कंपनी को सुनवाई का एक निष्पक्ष मौका देना चाहिए. इसके अलावा, CAG को ऑडिट शुरू करने से पहले 'CAG एक्ट' की धारा 20 के तहत तय की गई पूरी प्रक्रिया का सख्ती से पालन करना होगा.
यह भी पढ़ें: अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले में नहीं होगी क्रिश्चियन मिशेल की रिहाई, दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका
अदालत ने इस दौरान बताया कि अगर आगे चलकर कंपनी को ऑडिट की प्रक्रिया या किसी और पहलू पर आपत्ति होती है, तो उसके सभी कानूनी अधिकार सुरक्षित रहेंगे और वो उचित मंच पर उसे चुनौती दे सकती है.