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अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले में नहीं होगी क्रिश्चियन मिशेल की रिहाई, दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

सीबीआई, ईडी और केंद्र सरकार ने क्रिश्चियन मिशेल जेम्स की याचिका का विरोध किया. मिशेल की ओर से यह दलील दी गई कि प्रत्यर्पण के जरिये भारत लाए जाने के समय जो आरोप लगाए गए थे, उनमें अधिकतम सजा से अधिक समय वह जेल में बिता चुके हैं.

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क्रिश्चियन मिशेल जेम्स की याचिका का केंद्र ने किया विरोध (File Photo: PTI)
क्रिश्चियन मिशेल जेम्स की याचिका का केंद्र ने किया विरोध (File Photo: PTI)

अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी चॉपर घोटाले में बंद क्रिश्चियन मिशेल जेम्स ने दिल्ली हाईकोर्ट में रिहाई के लिए याचिका दायर की थी. दिल्ली हाईकोर्ट में इस याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई. दिल्ली हाईकोर्ट ने क्रिश्चियन मिशेल जेम्स की ओर से रिहाई की मांग को लेकर दायर याचिका खारिज कर दी है. क्रिश्चियन मिशेल जेम्स का नाम इस घोटाले में बिचौलिए के तौर पर लिया जाता है.

क्रिश्चियन मिशेल जेम्स ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर यह मांग की थी कि जिन आरोपों के आधार पर उन्हें भारत लाया गया था, उनकी अधिकतम सजा की अवधि वह पहले ही जेल में काट चुके हैं. क्रिश्चियन मिशेल जेम्स की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट से इस आधार पर रिहाई की गुहार लगाई गई थी. केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्र सरकार ने क्रिश्चियन मिशेल जेम्स की इस याचिका का कोर्ट में विरोध किया.

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क्रिश्चियन जेम्स मिशेल ने अपनी याचिका में भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच प्रत्यर्पण संधि के आर्टिकल 17 को भी चुनौती दी थी. मिशेल को दिसंबर 2018 में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से प्रत्यर्पण कर भारत लाया गया था. उस समय 2017 की चार्जशीट में उन पर धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिश्वत देने जैसे आरोप लगाए गए थे.

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बाद में, सितंबर 2020 में दाखिल सप्लीमेंट्री चार्जशीट में जालसाजी (फर्जीवाड़ा) का आरोप भी जोड़ दिया गया. जालसाजी के मामले में उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है. केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में यह दलील भी दी कि प्रत्यर्पण संधि का आर्टिकल-17 भारत को संबंधित अपराध के साथ ही साथ उससे जुड़े अन्य अपराधों में भी मुकदमा चलाने की अनुमति देता है. इसी के आधार पर जालसाजी के आरोप भी जोड़े गए हैं.

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