दिल्ली की हवा बेहद प्रदूषित है. इसका नुकसान यहां रहने वालों लोगों को हो रहा है. खासकर सांस से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए स्थिति और बदतर हो चली है. दिल्ली की हवा में RSPM (respirable suspended partculate matter) की मात्रा बढ़ गई है, जिस कारण से सांस संबंधित मामले ज्यादा सामने आ रहे हैं. 2007 में RSPM का लेवल 161 µg/m3 (माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मीटर) था जो 2014 में बढ़कर 316 µg/m3 हो गया. यह रिपोर्ट इंडियन एक्सप्रेस ने दी है.
रिपोर्ट में है कि 7 साल पहले जब सुप्रीम कोर्ट ने पब्लिक ट्रांसपोर्ट में सीएनजी के इस्तेमाल को अनिवार्य किया था तो हवा में प्रदूषण की मात्रा में बड़ी गिरावट देखने को मिली थी. लेकिन अब एक बार फिर स्थिति बदतर हो चली है, वल्लभभाई पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट और एम्स में ज्यादा लोग सांस और छाती संबंधित शिकायतें लेकर पहुंच रहे हैं. कुछ साल पहले स्थिति कुछ और ही थी.
पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट में 2003-04 में ओपीडी में 51,694 मरीज आए जो 2006-07 में घटकर 47887 हो गया, हालांकि 2013-14 में यह आंकड़ा बढ़कर 65122 पहुंच गया. कुछ ऐसा ही हाल एम्स का है. जहां 2005-06 में 10296 सांस संबंधित मामले आए, यह 2007-08 में घटकर 9519 पर पहुंच गया, पर 2014-15 में रिकॉर्ड 37669 केस सामने आए हैं.