दिल्ली पुलिस के साउथ-वेस्ट जिले की साइबर थाना टीम ने एक बड़े ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़ किया है. पुलिस ने दिल्ली और मुंबई में फैले इस गिरोह के 11 सदस्यों को गिरफ्तार किया है. यह गिरोह लोगों को भारी मुनाफे का लालच देकर अपनी ठगी का शिकार बनाता था.
इस गिरोह की काली करतूत तब सामने आई, जब एक 60 साल के बुजुर्ग ने शिकायत दर्ज कराई. ठगों ने सोशल मीडिया पर एक लुभावना विज्ञापन दिखाकर उन्हें अपने जाल में फंसाया और निवेश के नाम पर उनसे 22.67 लाख की मोटी रकम ठग ली.
यह भी पढ़ें: नकली सोने का बिस्किट, 15 लाख की ठगी और... अंतरराज्यीय गिरोह के 4 सदस्य गिरफ्तार, 37 लाख का माल भी बरामद
जांच के दौरान पुलिस ने डिजिटल डेटा और मनी ट्रेल का पीछा किया, जिससे चौंकाने वाले खुलासे हुए. गिरोह दिल्ली के रोहिणी और नेताजी सुभाष प्लेस (NSP) से अपना नेटवर्क चला रहा था.
नकली ऑफिस
NSP में बाकायदा एक फर्जी ऑफिस खोला गया था, जिसका काम सिर्फ नकली बैंक खाते खोलना और उन्हें साइबर अपराधियों को सप्लाई करना था. दिल्ली से तजिंदर सिंह उर्फ लकी, आशीष सैनी, शिव दयाल सिंह, शिवा और गिरिराज किशोर को दबोचा गया.
जांच में पता चला कि ठगी का पैसा कई खातों से घूमते हुए मुंबई पहुंचता था. इसके बाद पुलिस ने राजस्थान के बिजाई नगर में रेड मारकर चार और आरोपियों—रामदेव सांगला, प्रवीण कुमावत, दीपक मेवाड़ा और त्रिलोक चंद नायक को गिरफ्तार किया.
यह गिरोह भारत में फर्जी बैंक खातों का इंतजाम करता था और उन्हें मुंबई में बैठे 'PK' नाम के शख्स के जरिए कंबोडिया में मौजूद मास्टरमाइंड्स तक पहुंचाता था. साइबर पुलिस ने नागरिकों को सलाह दी है कि सोशल मीडिया पर मिलने वाले "भारी मुनाफे" वाले विज्ञापनों से दूर रहें और किसी भी अनजान खाते में पैसे ट्रांसफर न करें.