नजीब जंग के दिल्ली के उपराज्यपाल पद से अचानक इस्तीफे के बाद शुक्रवार सुबह मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने राजनिवास जाकर उनसे मुलाकात की. इस्तीफे के एक दिन बाद शुक्रवार को नजीब जंग पीएम मोदी से मिले. पीएमओ में हुई ये मुलाकात करीब डेढ़ घंटे तक चली.
अभी LG पद पर बने रहेंगे
गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार एलजी का इस्तीफा अभी मंज़ूर नहीं हुआ है. वे अभी पद पर बने रहेंगे. क़ानूनी प्रक्रिया जारी है. राष्ट्रपति दिल्ली से दस दिन के लिए बाहर हैं. हालांकि सरकार इस मामले पर उनसे चर्चा कर सकती है. प्रकिया पूरी होने तक नजीब जंग एलजी के पद पर बने रहेंगे.
इस बीच दिल्ली के अगले उपराज्यपाल को लेकर चर्चा जोरों पर है. सूत्रों के हवाले से खबर है कि 1969 बैच के आईएएस अधिकारी रहे अनिल बैजल को दिल्ली का अगला उपराज्यपाल बनाया जा सकता है. बैजल 2006 में शहरी विकास मंत्रालय के सचिव पद से रिटायर हुए थे. वह विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन के कार्यकारिणी समिति के सदस्य रह चुके हैं. केंद्र सरकार इस संस्थान के कई सदस्यों को वरिष्ठ पदों पर नियुक्त करती रही है, जिनमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्य सचिव नृपेंद्र मिश्र प्रमुख हैं. बैजल के अलावा दिल्ली के अगले एलजी के लिए दिल्ली के पूर्व पुलिस कमिश्नर बीएस बस्सी और पुडुचेरी की मौजूदा उपराज्यपाल किरन बेदी के नाम की भी सुगबुगाहट है.
इससे पहले 22 दिसंबर को जंग के इस्तीफे की जब खबर आई उस वक्त सीएम केजरीवाल रांची में नोटबंदी के खिलाफ जनसभा को संबोधित कर रहे थे. केजरीवाल ने तब तुरंत ही जंग से बात की थी और उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी थीं.
Sh Jung's resignation is a surprise to me. My best wishes in all his future endeavours.
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal)
अरविंद केजरीवाल के दोबारा दिल्ली के मुख्यमंत्री बनने के बाद से पिछले 2 वर्षों के दौरान नजीब जंग से उनके रिश्ते अच्छे नहीं रहे हैं. दिल्ली में अधिकारों की जंग को लेकर पूर्व उपराज्यपाल जंग हमेशा सीएम केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी के निशाने पर रहे थे. हालांकि अब उनके इस्तीफे के बाद आप के सारे ही नेता कह रहे हैं कि उनसे कोई निजी बैर नहीं, बल्कि जो रिश्तों में खटास थी वह सिर्फ दोनों के काम करने के तरीकों को लेकर थी.
तमाम खट्टे मीठे अनुभवों के बावजूद कह सकता हूँ कि नजीब जंग साहब के साथ हमने मिलकर दिल्ली के लिए बहुत अच्छा काम किया। भविष्य के लिए शुभकानाएं।
— Manish Sisodia (@msisodia)
वहीं आम आदमी पार्टी के नेता कपिल मिश्रा ने कहा कि जंग साहब को भविष्य की शुभकामनाएं. कठपुतली की डोर जिसके हाथ में है उन्हें भी सद्बुधि दे. जंग साहब के बाद भी जंग जारी रहेगी.
दरअसल सियासत में , लेकिन नजीब जंग ने उस वक्त अपना पद छोड़ा है, जब उनके कार्यकाल का करीब साल भर से ज्यादा का वक्त बचा हुआ था. नजीब जंग के इस्तीफे की असली वजह से बारे में अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है. वहीं उप-राज्यपाल कार्यालय ने बयान जारी कर दिया है. बयान में कहा गया है कि नजीब फिर से अपने 'पहले प्यार' शिक्षा के क्षेत्र में लौटेंगे.
कांग्रेस ने केंद्र से किया सवाल
हालांकि एलजी के इस्तीफे के पीछे बताई जा रही इस वजह से कांग्रेस संतुष्ठ नहीं. उसने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि कोई तो वजह होगी जिस कारण नजीब जंग को इस्तीफा देना पड़ा. दिल्ली कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन ने नजीब जंग के इस अचानक इस्तीफे पर केंद्र से सवाल किया है. उन्होंने पूछा कि हम केंद्र से जानना चाहेंगे कि उनके (उपराज्यपाल) अचानक इस्तीफे के पीछे वजह है.
We would like to know from the Centre what is the reason behind this unceremonious exit: Ajay Maken, Cong on Delhi LG
— ANI (@ANI_news)
बीजेपी का आप सरकार पर आरोप
वहीं बीजेपी ने दावा किया कि नजीब जंग आप सरकार से 'परेशान' थे. दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि बीजेपी के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को निगम वार्डों के परिसीमन को लेकर जंग से मुलाकात की थी. गुप्ता के मुताबिक, इस दौरान जंग ने केजरीवाल सरकार के संदर्भ में अपनी नाखुशी जाहिर की थी. गुप्ता ने कहा, ‘उस वक्त वह आप सरकार की ओर से काम रोके जाने से परेशान थे. हालांकि, हमें इसका अंदाजा नहीं था. उन्होंने हमें बताया कि वह एक हफ्ते की छुट्टी पर जा रहे हैं. दिल्ली को उनकी जरूरत थी.’
भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रहे डॉ. नजीब जंग दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया के कुलपति भी रहे. उसके बाद सरकार ने उन्हें दिल्ली का उपराज्यपाल बनाया था. लेकिन साहित्यिक और शैक्षणिक मिजाज के डॉ. जंग की उपराज्यपाल की पारी विवादों से भरी रही. दिल्ली सरकार और उनके बीच टकराव का एक लंबा सिलसिला भी चला. अब सारे विवादों को पीछे छोड़ डॉ. नजीब जंग अपने अगले पड़ाव के लिए निकल पड़े हैं.