केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI ने सेना के टेंडरों में कथित भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए सेना के अधिकारी कर्नल हिमांशु बाली को गिरफ्तार किया है. कर्नल हिमांशु बाली आर्मी ऑर्डिनेंस कॉर्प्स में ईस्टर्न कमांड, फोर्ट विलियम्स, कोलकाता में तैनात थे. इस मामले में CBI ने पहले एफआईआर दर्ज की थी, जिसके बाद यह गिरफ्तारी की गई.
एफआईआर के अनुसार कानपुर स्थित कंपनी ईस्टर्न ग्लोबल लिमिटेड के संचालकों पर सेना के टेंडर हासिल करने के लिए रिश्वत देने का आरोप लगाया गया है. जांच एजेंसी का दावा है कि कंपनी को कई टेंडरों में अनुचित तरीके से फायदा पहुंचाया गया.
CBI के मुताबिक कर्नल हिमांशु बाली पर आरोप है कि उन्होंने टेंडर दिलाने, घटिया सैंपल पास कराने और बढ़े हुए बिलों को क्लियर कराने के बदले रिश्वत ली. जांच एजेंसी का कहना है कि मार्च और अप्रैल 2026 के दौरान एक बड़े टेंडर को रिश्वत के बदले कंपनी को दिलाया गया.
CBI की एफआईआर में कारोबारी समेत कई नाम शामिल
एफआईआर में यह भी दावा किया गया है कि 22 अप्रैल 2026 को कोलकाता के पार्क स्ट्रीट इलाके में कर्नल हिमांशु बाली और कंपनी के प्रतिनिधियों की मुलाकात हुई थी. इसके दो दिन बाद यानी 24 अप्रैल को संबंधित टेंडर कंपनी को मिल गया. CBI ने यह भी आरोप लगाया है कि 16 मई 2026 को कर्नल बाली ने रिश्वत की बाकी रकम मांगी थी. जांच में सामने आया कि करीब 50 लाख रुपये हवाला के जरिए दिल्ली-NCR पहुंचाने की तैयारी की जा रही थी.
इस मामले में अक्षत अग्रवाल, मयंक अग्रवाल, आशुतोष शुक्ला, नरेश पाल और कुछ अन्य अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है. सभी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की धारा 61(2) के तहत केस दर्ज किया गया है. CBI अधिकारियों के अनुसार मामले की जांच जारी है और टेंडर प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों और पैसों के लेनदेन की भी जांच की जा रही है.
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज हुआ मामला
इस पूरे मामले की जांच CBI के डीएसपी सुनील कुमार कर रहे हैं. सेना के टेंडरों से जुड़े इस मामले के सामने आने के बाद सुरक्षा और खरीद प्रक्रिया को लेकर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं. फिलहाल CBI पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है.