दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आप संयोजक अरविंद केजरीवाल दिल्ली शराब घोटाला केस में बरी हो गए हैं. दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले में आप नेता मनीष सिसोदियो को भी बरी कर दिया है. ऐसे में केजरीवाल की पत्नी सुनीता आहूजा खुशी से फूले नहीं समा रही हैं.
सुनीता केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'इस संसार में कोई कितना भी शक्तिशाली हो जाए, शिव शक्ति से ऊपर नहीं हो सकता. सच की हमेशा जीत होती है.'
दिल्ली शराब घोटाले में बरी होने के बाद अरविंद केजरीवाल ने मीडिया से बात की. उन्होंने कहा कि वो भ्रष्टाचारी नहीं हैं, भगवान उनके साथ हैं और सच की जीत होती है. उन्होंने कहा कि सारा केस फर्जी था और साथ ही दावा किया कि उनकी पार्टी को खत्म करने की साजिश की गई.
केजरीवाल ने कहा कि आम आदमी पार्टी के पांच बड़े नेताओं को जेल में डाल दिया गया. यहां तक कि एक सिटिंग मुख्यमंत्री को उनके घर से गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, जो भारत के इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ.
मनीष सिसोदिया ने भी दी प्रतिक्रिया
मनीष सिसोदिया ने भी एक्स पर लिखा, 'सत्यमेव जयते. आज एक बार फिर बाबा साहेब अम्बेडकर जी की दूरदर्शी सोच और उनके बनाए संविधान पर फख्र महसूस हो रहा है. मोदी जी की पूरी पार्टी और सारी एजेंसियों की हमें बेईमान साबित करने की तमाम कोशिशों के बावजूद आज साबित हो गया कि अरविंद केजरीवाल-मनीष सिसोदिया कट्टर ईमानदार है.'
'बीजेपी और कांग्रेस की रची गई साजिश झूठी साबित हुई'
AAP नेता सोमनाथ भारती ने भी सोशल मीडिया पर खुशी जाहिर की है. उन्होंने लिखा, 'ये बताते हुए खुशी हो रही है कि माननीय न्यायालय ने आदरपूर्वक अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को बहुचर्चित, अत्यधिक दुरुपयोग किए गए और बीजेपी-कांग्रेस के संयुक्त रूप से रचे गए शरद घोटाला मामले से बरी कर दिया है. बीजेपी और कांग्रेस की रची गई ये साजिश आखिरकार झूठी साबित हुई.'
सोमनाथ भारती ने आगे बताया कि एक निराधार मामले में मनीष सिसोदिया को 17 महीने और अरविंद केजरीवाल को 5 महीने की जेल भारतीय राजनीतिक इतिहास में कभी नहीं भूली जाएगी. 2014 में बीजेपी के सत्ता में आने के बाद से राजनीतिक विरोधियों को दुशमनों की तरह मानने का ये सिलसिला इतना गंभीर कभी नहीं रहा.
कोर्ट ने केस में शामिल 23 आरोपियों को दी क्लीन चिट
दिल्ली शराब घोटाले पर फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि प्रॉसिक्यूशन न्यायिक जांच में खरा नहीं उतरता. दस्तावेजों और बयानों को एक साथ पढ़ने से पता चलता है कि प्रशासनिक विचार-विमर्श हुआ था, कोई आपराधिक इरादा नहीं था. अब अदालत ने सीबीआई मामले में सभी 23 आरोपियों को कोर्ट ने क्लीन चिट दे दी है.