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गलवान पर सेना प्रमुख नरवणे ने कहा- संघर्ष आखिरी रास्ता, हुआ तो हम ही विजेता बनेंगे

पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग झील पर एक पुल बनाने के लिए भारत द्वारा चीन पर निशाना साधने के कुछ दिनों बाद ताजा बातचीत हो रही है. पुल उस इलाके में है जो करीब 60 साल से चीन के अवैध कब्जे में है. पिछले हफ्ते, भारत ने अरुणाचल प्रदेश में कुछ स्थानों के चीन के नाम बदलने को हास्यापद कहा था. सेना की ओर से कहा गया था अरुणाचल प्रदेश हमेशा से भारत का अंग रहा है और यह हमेशा रहेगा.

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सेना प्रमुख एमएम नरावणे. -फाइल फोटो सेना प्रमुख एमएम नरावणे. -फाइल फोटो
स्टोरी हाइलाइट्स
  • आर्मी चीफ ने कहा- विभिन्न जगहों पर आतंकवादियों की संख्या में वृद्धि हुई
  • आज सुबह चुशुल-मोल्दो पर कोर कमांडर स्तरीय वार्ता का 14वां दौर चला

गलवान पर सेना प्रमुख एमएम नरवणे ने कहा है कि संघर्ष अंतिम उपाय है, प्रयास किया तो विजयी होकर निकलेंगे. उन्होंने कहा कि पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी से बातचीत में पिछले जनवरी से उत्तरी और पश्चिमी क्षेत्रों में सकारात्मक विकास हुआ है. हालांकि, आपसी मनमुटाव के बाद आंशिक खतरा कम नहीं हुआ है. हमारी ओर से बल की तैनाती की गई है. आवश्यक सुरक्षा के उपाय किए जा रहे हैं. जरूरी बुनियादी ढांचे जैसे सड़कों, पुलों आदि का विकास किया जा रहा है. 

उन्होंने कहा कि विभिन्न जगहों पर आतंकवादियों की संख्या में वृद्धि हुई है. भारत इस मामले पर जीरो टॉलरेंस पर यकीन करता है. उन्होंने कहा कि लद्दाख में कई जगहों पर मनमुटाव है. खतरे को देखते हुए हमारी तरह से बल को तैनात किया गया है.

बता दें कि चीन की ओर से आज सुबह चुशुल-मोल्दो पर कोर कमांडर स्तरीय वार्ता का 14वां दौर चला. भारतीय पक्ष का नेतृत्व फायर एंड फ्यूरी कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता कर रहे थे. तीन महीने से अधिक के अंतराल के बाद भारत और चीन पूर्वी लद्दाख में पिछले 20 महीने से चले आ रहे सैन्य गतिरोध को हल करने की कोशिश में जुटे हैं. बताया जा रहा है कि बाचतीच का मुख्य फोकस हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र को हल करने पर रहा. 

भारतीय सेना देपसांग बुलगे और डेमचोक में मुद्दों के समाधान सहित सभी गतिरोध वाले मुद्दों को हल करने पर जोर देगी. बता दें कि 13वें दौर की वार्ता 10 अक्टूबर को हुई थी. दोनों पक्ष बातचीत के बाद भारतीय सेना के साथ बातचीत में कोई प्रगति नहीं हुई थी. 

पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग झील पर एक पुल बनाने के लिए भारत द्वारा चीन पर निशाना साधने के कुछ दिनों बाद ताजा बातचीत हो रही है. पुल उस इलाके में है जो करीब 60 साल से चीन के अवैध कब्जे में है.

पिछले हफ्ते, भारत ने अरुणाचल प्रदेश में कुछ स्थानों के चीन के नाम बदलने को हास्यापद कहा था. सेना की ओर से कहा गया था अरुणाचल प्रदेश हमेशा से भारत का अंग रहा है और यह हमेशा रहेगा.

बता दें कि 18 नवंबर को दोनों देशों के राजनायिकों की बातचीत में भारत और चीन लद्दाख में जारी संघर्ष पर बातचीत के 14वें दौर के लिए राजी हुए थे. पैंगोंग झील क्षेत्रों में हिंसक झड़प के बाद 5 मई, 2020 को भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच पूर्वी लद्दाख सीमा गतिरोध शुरू हो गया था. दोनों देशों की सेनाओं ने धीरे-धीरे हजारों सैनिकों के साथ-साथ भारी हथियारों को लेकर अपनी तैनाती बढ़ा दी थी. 

 

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