दिल्ली में तीनों एमसीडी को एक करने की बीजेपी की मांग पर आम आदमी पार्टी ने आपत्ति जताई है. 'आजतक' ने दिल्ली सरकार के रुख को लेकर पूरे मामले में 'आप' प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज से खास बातचीत की. सौरभ के मुताबिक बीजेपी पिछले 15 साल में एमसीडी से भ्रष्टाचार हटाने में नाकामयाब रही. लिहाजा अब तीनों को जोड़ने का बहाना कर रही है.
बीजेपी की मांग पर सहमति के सवाल पर सौरभ भारद्वाज का कहना है कि देश या दुनिया में माना जाता है कि एमसीडी या कोई भी इकाई जितनी छोटी हो उसका शासन उतना ही आसान होता है. इसे लेकर साल 2007 से 2011 तक लंबी बहस चली थी. एक मुख्य कमेटी ने एमसीडी को पांच से सात भागों में बांटने की बात कही थी, तब बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने सहमति भी जताई थी. आम आदमी पार्टी सरकार के पास इस तरह का प्रस्ताव आएगा, तो सभी विधायकों से पूछा जाएगा. हर पहलु पर हाउस में भी बहस होगी.
सौरभ ने में रेवेन्यू की कमी पर सवाल उठाते हुए बीजेपी से पूछा कि अगर स्थिति सुधारना है, तो क्या एमसीडी एक करने से हल निकल जाएगा? कहा जा रहा है कि पैसों की कमी है. लिहाजा एक कर देना चाहिए, लेकिन रेवेन्यू तो तभी बढ़ेगा जब कोशिश की जाएगी. बीजेपी कहती है कि साउथ एमसीडी अमीर है और ईस्ट एमसीडी गरीब है, लेकिन तुलना की जाए तो साउथ एमसीडी के मुकाबले ईस्ट एमसीडी का पार्षद अमीर है. इसकी वजह यह है कि पार्षद के स्तर पर पैसा जमकर लूटा जा रहा है.
उन्होंने कहा कि बीजेपी को इस प्रक्रिया में कोई फायदा दिख रहा होगा. हालांकि तीनों एमसीडी को जोड़ देने पर भी उतना ही रेवेन्यू आएगा. का रेवेन्यू तब बढ़ेगा, जब भ्रष्टाचार खत्म होगा या पार्षदों की जेब मे जाने वाला रेवेन्यू एमसीडी की जेब मे जाएगा. फिलहाल आम आदमी पार्टी को बीजेपी के आइडिया पर ऐतराज है. हालांकि इससे पहले जब डिप्टी सीएम से सवाल पूछा गया, तो वह इस पर खुलकर प्रतिक्रिया देने से बचते नज़र आए थे.
आप प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज का कहना है कि तीनों एमसीडी को जोड़ने का कोई मकसद नज़र नहीं आ रहा है, क्योंकि बीजेपी 15 साल से एमसीडी में काम नहीं कर रही है और अब यह मांग उठा रही है. बीजेपी बहानेबाज़ी करके अपने काम को टाल रही है. हालांकि आम आदमी पार्टी बीजेपी के इस मंसूबे को कामयाब नहीं होने देगी.