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हक की लड़ाई में जान भी चली जाए तो गम नहीं: नीतीश

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि वे लोगों के हक के लिए लड रहे हैं और इस अभियान में उनकी जान चली जाए तो इससे अच्छी मौत क्या हो सकती है.

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नीतीश कुमार
नीतीश कुमार

ने कहा कि वे लोगों के हक के लिए लड रहे हैं और इस अभियान में उनकी जान चली जाए तो इससे अच्छी मौत क्या हो सकती है.

बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने के लिए जनसमर्थन जुटाने के लिए पर निकले नीतीश ने कहा कि वे लोगों के हक के लिए लड रहे हैं और इस अभियान में उनकी जान चली जाए तो इससे अच्छी मौत क्या हो सकती है.


प्रदेश के विभिन्न जिलों में आयोजित अधिकार सम्मेलनों के दौरान उनकी सभाओं में लोगों द्वारा प्रदर्शन और विरोध जताए जाने पर ने कहा ‘कुछ लोग ईंट-पत्थर फेंकना जानते हैं, हमारे कदम रोकना चाहते हैं, हम सभा करने न जा सकें इसके लिए आगजनी करते हैं, जानलेवा हमला करते हैं, पत्थर की बरसात होती है.

उन्होंने कहा कि हम लोकतंत्र में विश्वास करते हैं, विरोध हो सकता है, हम उसकी भी इज्जत करते हैं, स्वागत करते हैं लेकिन उसका लोकतांत्रिक तरीका होगा।’ नीतीश ने कहा ‘बिहार में विरोध की ऐसी कोई राजनीतिक संस्कृति नहीं रही है और वे रुकने वाले नहीं हैं’.

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उन्होंने कहा कि कोई जो आया है उसको जाना है और इससे अच्छी मौत और क्या हो सकती है कि हम लोगों के हक के लिए लड रहे हैं और इसी अभियान में मेरी जान चली जाए.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी अधिकार यात्रा के दौरान बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने के लिए केंद्र पर दबाव बनाने के लिए उनकी पार्टी द्वारा आगामी चार नवंबर को पटना में गांधी मैदान में आयोजित अधिकार रैली में लोगों से भारी संख्या में भाग लेने की अपील की.

इससे पूर्व अन्य जिलों में आयोजित अधिकार सम्मेलनों के दौरान नीतीश की सभा में लोगों के प्रदर्शन और विरोध को देखते हुए सुपौल और अररिया जिलों में सुरक्षा के भारी बंदोबस्त किए गए थे उनकी सभाओं को लेकर गुजरने वाले सभी रास्तों में संवेदनशील स्थलों पर बडी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गयी थी. नीतीश की सभाओं में पहुंचने वालों के वहां तैनात सुरक्षा कर्मियों द्वारा सघन तलाशी लेते हुए देखा गया.

नीतीश की अन्य जिलों में अधिकार यात्राओं के दौरान ठेके पर नियुक्त शिक्षकों के प्रदर्शन को देखते हुए अररिया जिला में उनकी सभा से उन्हें दूर रखने के उद्देश्य से जिला शिक्षाधिकारी राजीव रंजन द्वारा शिक्षकों की स्कूल में अनिवार्य रूप से उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए आदेश जारी किया गया था.

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मुख्यमंत्री के अधिकार यात्रा के दौरान सुरक्षा के चाक-चौबंद व्यवस्था के बावजूद फारबिसगंज थाना अंतर्गत भजनपुरा गांव के करीब सौ लोग किसी प्रकार से अररिया में आयोजित नीतीश की सभा के बाहर पहुंचने में कामयाब रहे और उन्होंने गत वर्ष हुए फारबिसगंज पुलिस गोली कांड के परिजनों को अबतक न्याय नहीं मिल पाने के विरोध में काला झंडा दिखाया. इस घटना में चार अल्पसंख्यक वर्ग के चार व्यक्तियों की मौत हो गयी थी.

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