फैटी लिवर की बीमारी अब बहुत आम हो गई है. शराब न पीने वालों और पतले लोगों को भी यह हो रही है. लिवर फैटी तब होता है जब लिवर की सेल्स में जरूरत से ज़्यादा फैट जमा हो जाता है. ऐसा आम तौर पर दो मुख्य वजहों से होता है. पहला अधिक शराब पीना और दूसरा लाइफस्टाइल से जुड़े कारण जैसा एक्सरसाइज न करना और खराब खानपान. हालांकि अब शराब न पीने वालों को भी फैटी लिवर हो रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्वास्थ्य समस्या को खानपान को अच्छा रखकर काफी हद तक ठीक किया जा सकता है.
ऐसे में आपके लिए यह जानना जरूरी है कि फैटी लिवर में क्या खाएं और क्या नहीं. इस बारे में जानने के लिए आजतक. इन ने AIIMS के डिपार्टमेंट ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एंड ह्यूमन न्यूट्रिशन की डायटिशियन मोनिता गहलोत से बातचीत की है. डायटिशियन मोनिता ने फैटी लिवर से बचाव के भी कई तरीकों के बारे में बताया है.
वजन को कंट्रोल में रखें
डायटिशियन मोनिता कहती हैं कि फैटी लिवर से रोकथाम का पहला कदम स्वस्थ वजन बनाए रखना है. महीने में कम से कम एक बार अपना वजन जरूर चेक करें. अगर वजन बढ़ रहा है और पेट के आसपास चर्बी जम रही है तो उसको कम करने की कोशिश करें. इसके लिए रोज एक्सरसाइज करें. आप यह भी देखें कि हर दिन कितनी कैलोरी ले रहे हैं. अगर शरीर में कैलोरी अधिक होगी तो वह फैट के रूप में लिवर में जमा होने लगेगी. इसलिए ज्यादा कैलोरी वाले फूड से बचें. इसलिए उच्च कैलोरी वाले खाद्य पदार्थ जैसे तले हुए स्नैक्स, मिठाइयां, ज्यादा चीनी वाले पेय पदार्थ और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का सेवन सीमित रखें.
एक्सरसाइज करना जरूरी
पूरे एक हफ्ते में कम से कम 150 से 300 मिनट की शारीरिक गतिविधि करें. हफ्ते में 2–3 दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करने का भी प्रयास करें. एक्सरसाइज करने से शरीर में इंसुलिन की कार्यक्षमता बेहतर होती है, अधिक फैट को कम करने में मदद मिलती है. लिवर में फैट के जमाव को घटाने में भी यह सहायक हो सकता है. योग, स्ट्रेचिंग और भोजन के बाद 10–15 मिनट टहलना भी लाभकारी है.
चीनी और मीठी चीजों का सेवन कम करें
कोल्ड ड्रिंक, पैकेज्ड जूस, मिठाइयां, डेज़र्ट और दूसरे अधिक चीनी या फ्रक्टोज वाले खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करें. अधिक मात्रा में फ्रक्टोज खाने से लिवर में फैट बनने की प्रक्रिया बढ़ सकती है, जिससे लिवर में फैट जमा होने और इन्फ्लेमेशन का खतरा बढ़ सकता है.
तले हुए एवं अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड से बचें
आप बार-बार गर्म किए गए तेल में बने खाद्य पदार्थ जैसे फास्ट फूड, नमकीन, बेकरी प्रोडक्ट और अन्य अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड को भी खाने से बचें. इनमें अधिक कैलोरी, अस्वस्थ फैट, नमक और चीनी होती हैं. इनके नियमित सेवन से वजन बढ़ने, इंसुलिन रेजिस्टेंस और फैटी लिवर का जोखिम बढ़ सकता है. ऐसे में आप इन चीजों को खाने से बचें.
फैटी लिवर को कंट्रोल करने के लिए गुड फैट खाना शुरू करें
लिवर को फिट रखने के लिए अपनी डाइट में कुछ चीजों को शामिल जरूर करें. इसके लिए आप चिया सीड्स, अखरोट और मछली को डाइट में शामिल करें. ओमेगा-3 फैट इन्फ्लेमेशन को कम करने और खून में फैट के स्तर को बेहतर बनाने में सहायक हो सकती है. MUFA के लिए मूंगफली, बादाम, जैतून का तेल, मूंगफली और सरसों का तेल अच्छे विकल्प हैं, जो हार्ट और मेटाबॉलिक हेल्थ के लिए फायदेमंद माने जाते हैं.
साबुत अनाज को प्राथमिकता दें
अपनी डाइट में मैदा और रिफाइंड अनाजों की बजाय साबुत अनाज चुनें. गेहूं के साथ-साथ ज्वार, बाजरा, रागी, मक्का, कोदो और कंगनी जैसे मोटे अनाजों को बदल-बदलकर आहार में शामिल करें. साबुत अनाजों में फाइबर, विटामिन और खनिज अधिक मात्रा में पाए जाते हैं. यह ब्लड शुगर को कंट्रोल रखने और लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करते हैं.
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फाइबर का सेवन करें
फाइबर वाला भोजन वजन कंट्रोल से लेकर शुगर कंट्रोल में फायदेमंद है. फाइबर आंतों में अच्छे बैक्टीरिया ( गट माइक्रोबायोम) को पोषण देता है. स्वस्थ गट माइक्रोबायोम शॉर्ट चेन फैटी एसिड जैसे लाभकारी यौगिक बनाते हैं, जो इन्फ्लेमेशन को कम करने, आंतों की कार्यक्षमता बेहतर बनाते हैं. यह लिवर के लिए भी फायदेमंद होते हैं. साबुत अनाज, दालें, फल, सब्जियां और सलाद फाइबर के अच्छे सोर्स हैं.
प्रोटीन डाइट में शामिल करें
डायटिशियन मोनिता कहती हैं कि आपको अपनी डाइट में प्रोटीन को शामिल करना चाहिए. इसके लिए आप लो-फैट दूध और दही, सोया, अंडा, मछली और लीन चिकन प्रोटीन खा सकते हैं. पर्याप्त प्रोटीन का सेवन शरीर की मांसपेशियों को बनाए रखने और उनकी शक्ति बढ़ाने में मदद करता है. इसके साथ ही नियमित एक्सरसाइज, विशेषकर स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के साथ पर्याप्त प्रोटीन का सेवन शरीर में फैट और मांसपेशियों के संतुलन को बेहतर बनाने में मदद करता है, जिससे पेट के आसपास जमा ज्यादा चर्बी और फैटी लिवर के खतरे को कम करने में सहायता मिल सकती है.
रोज कम से कम 500 ग्राम फल और सब्जियां खाएं
मौसमी फल और सब्जियां विटामिन, खनिज, एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइटोकेमिकल्स से भरपूर होती हैं. ये शरीर में बनने वाले हानिकारक फ्री-रेडिकल्स और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने में सहायता करते हैं. साथ ही, शरीर में इन्फ्लेमेशन को कम करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
इन्फ्लेमेशन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस फैटी लिवर के बढ़ने के प्रमुख कारणों में शामिल हैं. इसलिए अलग- अलग रंगों के फल एवं सब्जियों का नियमित सेवन लिवर में सूजन और फैट के दुष्प्रभावों को कम करने और लिवर को स्वस्थ बनाए रखने में सहायक हो सकता है. हरी पत्तेदार सब्जियों को विशेष रूप से प्रतिदिन किसी न किसी रूप में आहार में शामिल करना काफी फायदेमंद है.
खाने की अच्छी आदतों को अपनाएं
कुछ लोगों को बार-बार बिस्किट, चिप्स, नमकीन, मिठाइयां या दूसरे अल्ट्रा-प्रोसेस्ड स्नैक्स खाने की आदत होती है. जरूरी यह है कि आप इसकी बजाय छाछ, नींबू पानी, ताजे फल, अंकुरित अनाज, भुना चना, ग्रीन टी या बिना चीनी की ब्लैक कॉफी डाइट में शामिल करें. इससे अतिरिक्त कैलोरी, चीनी और अनहेल्दी फैट के सेवन को कम करने में मदद मिलती है.
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शराब का सेवन सीमित करें
शराब का सेवन लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है और लिवर रोगों की गंभीरता को बढ़ा सकता है. इसलिए शराब से बचना या उसका सेवन सीमित करना जरूरी है. इसके साथ ही पर्याप्त नींद लेना मानसिक तनाव से बचना और अच्छी लाइफस्टाइल भी जरूरी है.