Kidney Health: मॉर्डन लाइफस्टाइल ने हमें सुविधाओं के साथ-साथ कई ऐसी बीमारियां भी दी हैं जो साइलेंट किलर की तरह काम करती हैं. हार्ट अटैक और कैंसर के अलावा किडनी की समस्याएं भी तेजी से बढ़ रही हैं, लोग अक्सर इस बात से अनजान रहते हैं कि डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर दो ऐसे न दिखने वाले दुश्मन हैं, जो धीरे-धीरे और बिना किसी आहट के हमारे शरीर के सबसे जरूरी अंगों में से एक किडनी को नुकसान पहुंचा रहे हैं.
डराने वाली बात यह है कि जब तक किडनी 60 से 70 प्रतिशत तक डैमेज नहीं हो जाती, तब तक शरीर में कोई गंभीर लक्षण दिखाई नहीं देते. इसी कारण कई मरीज अनजाने में अपनी जान जोखिम में डाल देते हैं. आज किडनी फेलियर से होने वाली मौतों के बढ़ते आंकड़े इसी बात का संकेत हैं कि हम शुरुआती चेतावनी संकेतों को पहचानने में चूक रहे हैं.
दिल्ली के द्वारका में रहने वाले, 24 साल के अनुभव वाले सीनियर डायबिटोलॉजिस्ट डॉ. बृजमोहन अरोड़ा ने इंस्टाग्राम पर शेयर किए एक वीडियो में बताया कि एक आसान सा यूरिन टेस्ट किडनी डैमेज को बहुत पहले पकड़ सकता है. जबकि आमतौर पर लोग किडनी की जांच के लिए KFT यानी किडनी फंक्शन टेस्ट करवाते हैं.
इस टेस्ट में खून के जरिए क्रिएटिनिन लेवल मापा जाता है, क्रिएटिनिन बढ़ना इस बात का इशारा है कि किडनी ठीक से काम नहीं कर रही है. डॉ. अरोड़ा के अनुसार, जब तक क्रिएटिनिन 1.3 या उससे अधिक होता है, तब तक किडनी को काफी नुकसान पहुंच चुका होता है इसलिए उनकी सलाह है कि क्रिएटिनिन को हमेशा ही 1.0 से कम रखने की कोशिश करनी चाहिए.
डॉ. अरोड़ा केवल क्रिएटिनिन टेस्ट पर निर्भर न रहने की सलाह देते हैं. उनके मुताबिक, किडनी की शुरुआती खराबी पकड़ने के लिए यूरिन ACR यानी एल्ब्यूमिन-क्रिएटिनिन रेशियो टेस्ट बेहद अहम है. यह एक मामूली यूरिन टेस्ट है, जिसमें यह देखा जाता है कि पेशाब में प्रोटीन तो नहीं आ रहा.
एक हेल्दी व्यक्ति में यूरिन ACR 30 mg/g से कम होना चाहिए. अगर यह 30 से ज्यादा आता है, तो इसका मतलब हो सकता है कि किडनी पर प्रेशर पड़ रहा है और वह प्रोटीन लीक कर रही है. यह किडनी डैमेज का शुरुआती संकेत हो सकता है.
डॉ. अरोड़ा का कहना है कि यूरिन ACR टेस्ट किडनी की समस्या को KFT से लगभग पांच साल पहले पकड़ सकता है. इसका मतलब है कि जब बीमारी शुरुआती स्टेज में हो, तभी इलाज शुरू किया जा सकता है.
डॉ. बृजमोहन अरोड़ा ही नहीं बल्कि कई किडनी की खराबी के लिए ACR टेस्ट को लेकर कई रिसर्च भी हो चुकी हैं. रिसर्च में भी यह बात साफ तौर पर सामने आई है कि ACR टेस्ट, सीरम क्रिएटिनिन या KFT से पहले ही जोखिम का इशारा दे सकता है.
किडनी डिजीज: इम्प्रूविंग ग्लोबल आउटकम्स (KDIGO) एक इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन है, जो किडनी की बीमारियों से जुड़ी जांच और इलाज के लिए गाइडलाइंस बनाती है. KDIGO की रिसर्च के अनुसार, अगर ACR 30 mg/g से ज्यादा हो जाता है, तो यह किडनी डैमेज का शुरुआती संकेत माना जाता है. खास बात यह है कि ACR टेस्ट, सीरम क्रिएटिनिन या KFT से पहले ही खतरे का संकेत दे सकता है.
इसी तरह यूनाइटेड किंगडम प्रोस्पेक्टिव डायबिटीज स्टडी (UKPDS) टाइप-2 डायबिटीज पर 20 साल तक चली एक महत्वपूर्ण रिसर्च है. इस स्टडी के अनुसार, पेशाब में एल्ब्यूमिन का आना किडनी फेल्योर की 5 से 10 साल पहले चेतावनी दे सकता है.
समय रहते ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करना, डॉक्टर द्वारा दी गई दवाएं नियमित लेना, बैलेंस डाइट अपनाना और नियमित टेस्ट करवाना बेहद जरूरी है.
डॉ. अरोड़ा डायबिटीज और हाई बीपी के मरीजों को साल में कम से कम एक या दो बार KFT और यूरिन ACR दोनों टेस्ट कराने की सलाह देते हैं. उनका कहना है कि समय पर जांच का मकसद साफ है कि डायलिसिस जैसी गंभीर स्थिति से बचाव किया जा सके.
भारत में यूरिन ACR (एल्ब्यूमिन-क्रिएटिनिन अनुपात) टेस्ट की कीमत आमतौर पर 400 से 950 रुपये के बीच होती है. यह आमतौर से डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों में किडनी की शुरुआती खराबी का पता लगाने के लिए किया जाता है. दिल्ली-मुंबई जैसी स्मार्ट सिटीज में यह 300 से 700 रुपये की बीच में भी हो सकता है.