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डायबिटीज के मरीज हैं तो किडनी खराबी का भी है रिस्क, डॉक्टर के बताए इन तीन लक्षणों पर दें ध्यान

डायबिटीज के मरीजों में शुगर लेवल बढ़ने पर किडनी खराब होने का खतरा रहता है, जिसे डायबिटिक नेफ्रोपैथी कहा जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार, डायबिटीज से जुड़ी नेफ्रोपैथी किडनी फेल होने का प्रमुख कारण है और हर दस में से चार मरीज इससे प्रभावित हो सकते हैं.

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डायबिटीज मरीजों को किडनी खराबी का रिस्क
डायबिटीज मरीजों को किडनी खराबी का रिस्क

डायबिटीज के जिन मरीजों का शुगर लेवल बढ़ा हुआ रहता है उनको किडनी की खराबी होने का भी रिस्क होता है. PUBMED की रिसर्च बताती है कि डायबिटीज की बीमारी किडनी डैमेज का कारण बनती है. इसको मेडिकल की भाषा में डायबिटिक नेफ्रोपैथी कहते हैं.  यह एक ऐसी बीमारी है जो धीरे-धीरे बढ़ती है और आपकी किडनी पर असर डालती है. इसके लक्षण आमतौर पर बीमारी के बाद के स्टेज में ही दिखाई देते हैं, लेकिन इन लक्षणों में सूजन, पेशाब करने की आदतों में बदलाव, जी मिचलाना और थकान शामिल हैं, लेकिन डायबिटीज के अधिकतर मरीज इनको नजरअंदाज कर देते हैं.

डायबिटीज से जुड़ी नेफ्रोपैथी दुनिया भर में किडनी फेल होने का सबसे आम कारण है. डायबिटीज वाले हर 10 में से 4 लोगों को डायबिटीज से जुड़ी नेफ्रोपैथी हो सकती है.एक्सपर्ट्स बताते हैं कि हर किडनी में दस लाख से अधिक नेफ्रॉन होते हैं, नेफ्रॉन आपके खून को फ़िल्टर करने और शरीर में फ़्लूइड का बैलेंस बनाए रखने में मदद करते हैं. आपके खून में मौजूद ज़्यादा ग्लूकोज, नेफ्रॉन में मौजूद ग्लोमेरुली को नुकसान पहुंचा सकता है. ग्लोमेरुली खून को फिल्टर करने का पहला काम करते हैं. अधिक ग्लूकोज नेफ्रॉन के दूसरे हिस्सों को भी नुकसान पहुंचा सकता है. इससे किडनी ठीक से काम नहीं करती है.

किडनी की सेहत खराब कर देती है डायबिटिक नेफ्रोपैथी

दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में सीनियर रेजिडेंट डॉ. दीपक कुमार सुमन बताते हैं कि डायबिटीज के जिन मरीजों में शुगर लेवल लंबे समय तक कंट्रोल में नहीं रहता है उनको डायबिटिक नेफ्रोपैथी होने का रिस्क होता है. यह एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या है जो किडनी को खराब कर सकती है. ऐसे में डायबिटीज के मरीजों को इसके लक्षणों की जानकारी जरूर होनी चाहिए. 

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डॉ. हिमांशु बताते हैं कि डायबिटीज की वजह से किडनी को नुकसान पहुंचने में कई साल लग जाते हैं. टाइप 1 डायबिटीज वाले अधिकतर लोगों को डायबिटीज से जुड़ी नेफ्रोपैथी का पता चलने के दो से पांच साल के अंदर किडनी को कुछ नुकसान पहुंचता है. आम तौर पर 10 में से लगभग 4 लोगों में इसके केस आते हैं. 

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डायबिटीज से जुड़ी नेफ्रोपैथी के लक्षण क्या होते हैं 

पैरों के आसपास सूजन

जी मिचलाना 

उल्टी आना

बहुत ज्यादा थकान महसूस होना

पेशाब में झाग आना

मांसपेशियों में ऐंठन

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डायबिटिक नेफ्रोपैथी की जांच और टेस्ट कैसे होती है

अगर किसी को डायबिटीज है, तो आपको अपनी किडनी की सेहत की जांच के लिए अपने डॉक्टर से नियमित रूप से मिलना चाहिए. अगर उन्हें शक होता है कि आपको डायबिटीज से जुड़ी नेफ्रोपैथी हो सकती है, तो वे इसका पता लगाने के लिए कुछ टेस्ट करवाने का सुझाव दे सकते हैं.इनमें  पेशाब की जांच और प्रोटीन या डायबिटीज से जुड़ी नेफ्रोपैथी के दूसरे लक्षणों का पता लगाने के लिए डिपस्टिक टेस्ट किया जाता है

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डायबिटीज के मरीज कैसे रखें किडनी का ध्यान

फाइबर से भरपूर डाइट लें

भोजन में कम फैट व कैलोरी वाली चीजें खाएं

हर दिन कम से कम 30 मिनट तक एक्सरसाइज करें

शराब का सेवन न करें 
 

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