एम्स नई दिल्ली प्रशासन ने मंगलवार को स्टाफ सदस्यों और छात्रों को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस एक्ट के विभिन्न दंडात्मक प्रावधानों के बारे में जागरूक करने के निर्देश जारी किए हैं. एक कार्यालय ज्ञापन में, एम्स के निदेशक एम श्रीनिवास ने सभी विभागों के प्रमुखों से उनके अधीन काम करने वाले कर्मचारियों और छात्रों के ध्यान में एनडीपीएस अधिनियम के तहत जुर्माना और कारावास सहित विभिन्न प्रावधानों को लाने के लिए कहा है. इसके तहत दवाओं के दुरुपयोग में लिप्त पाए गए अनुबंधित कर्मचारी या सुरक्षा कर्मचारी को पुलिस के हवाले करने की बात भी कही गई है.
दवाओं के दुरुपयोग के रोक थाम के लिए भी अस्पताल के गार्ड्स को सख्स निर्देश दिए गए हैं. इसके अलावा दिल्ली एम्स ने सिंगल यूज प्लास्टिक (SUP) को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है. इसके तहत अस्पताल परिसर में अब से सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर पूरी तरह बैन कर दिया गया है. ये फैसला राष्ट्रीय प्लास्टिक अपशिष्ट उत्पादन को कम करने के उद्देश्य से लिया गया है.
ज्ञापन के अनुसार यदि कोई बाहरी कर्मी या कोई ड्रग पेडलर प्रतिबंधित नशीली दवाओं की बिक्री करता हुआ पाया जाता है, तो सुरक्षा कर्मियों को अपराधी का वीडियो/फोटोग्राफ लेने का निर्देश दिया गया है. निर्देश के अनुसार उसकी सूचना देकर उसे तुरंत पुलिस को सौंप दिया जाना चाहिए और निकट भविष्य में एम्स परिसर में प्रवेश करने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया जाना चाहिए.
अस्पताल परिसर में इस गतिविधि में लिप्त पाए जाने वाले किसी भी अनुबंधित कर्मचारी या सुरक्षा कर्मचारी को एम्स पुलिस चौकी को सौंप दिया जाएगा और उसे सेवा से समाप्त कर दिया जाएगा. ज्ञापन में कहा गया है कि यदि कोई स्थायी कर्मचारी/डॉक्टर एम्स नई दिल्ली परिसर में इन दवाओं के दुरुपयोग में लिप्त पाया जाता है, तो उसे एक नोटिस जारी किया जाएगा और उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.
एम्स अस्पताल द्वारा जारी ज्ञापन में बताया गया है कि सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. एम्स नई दिल्ली द्वारा जारी ज्ञापन में यह कहा गया है कि 2015 के मुकाबले भारत का प्लास्टिक कचरा उत्पादन दोगुना बढ़ा है. ऐसे में इसके उत्पादन में 21.8% की औसत वार्षिक वृद्धि हुई है.