कार्डियक अरेस्ट एक ऐसी मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें दिल अचानक शरीर में खून पंप करना बंद कर देता है. अगर तुरंत मदद न मिले तो कुछ ही मिनटों में दिमाग और शरीर के दूसरे जरूरी अंगों को नुकसान पहुंचना शुरू हो सकता है. यही वजह है कि कार्डियक अरेस्ट में अस्पताल पहुंचने से पहले सीपीआर मिलना बहुत जरूरी है. एम्स दिल्ली के डॉक्टर का कहना है कि देश में कार्डियक अरेस्ट को लेकर लोगों को जागरूक करना और इसे और बेहतर बनाने पर काम करने की जरूरत है. इसमें एआई का रोल भी अहम हो सकता है
कार्डियक अरेस्ट में दिल अचानक धड़कना बंद कर देता है. इससे शरीर में खून का फ्लो रुक जाता है और मरीज आमतौर पर बेहोश हो जाता है, वह सामान्य तरीके से सांस लेना भी बंद कर सकता है या केवल हांफने जैसी सांस ले सकता है. ऐसी स्थिति में तुरंत इमरजेंसी मदद बुलानी चाहिए और मरीज की सामान्य सांस न होने पर CPR शुरू करना चाहिए.
CPR सबसे महत्वपूर्ण इमरजेंसी प्रक्रिया
भारतीय पुनर्जीवन परिषद महासंघ (आईआरसीएफ) के डायरेक्टर और एम्स नई दिल्ली में एनेस्थीसिया विभाग के प्रोफेसर डॉ. राकेश गर्ग ने इस बारे में बताया है. डॉ राकेश कहते हैं कि CPR सबसे महत्वपूर्ण इमरजेंसी प्रक्रियाओं में से एक है. अब इसे और बेहतर बनाने पर काम करने की जरूरत है. अब नई- नई तकनीकें आ रही हैं. ऐसे में अब फोकस करना होगा कि AI के जरिए सीपीआर का इस्तेमाल मरीज की जान बचाने में किस तरह किया जा सकता है.
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CPR से कैसे बच सकती है जान?
CPR में मरीज की छाती के बीच वाले हिस्से पर लगातार दबाव दिया जाता है. इससे शरीर में कुछ हद तक खून का फ्लू बना रहता है और दिमाग जैसे जरूरी अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचती रहती है, इससे मरीज की जान बच सकती है. CPR तब तक शरीर में ब्लड फ्लो बनाए रखने में मदद करता है, जब तक मेडिकल टीम पहुंचकर आगे का इलाज न कर दे. जरूरत पड़ने पर मेडिकल टीम AED की मदद से दिल की खतरनाक इलेक्ट्रिकल रिदम को ठीक करने की कोशिश कर सकती है.
पहले कुछ मिनट क्यों हैं इतने जरूरी?
डॉ राकेश कहते हैं कि कार्डियक अरेस्ट के बाद हर मिनट महत्वपूर्ण होता है. जितनी जल्दी कार्डियक अरेस्ट की पहचान होती है और CPR शुरू किया जाता है, मरीज के बचने की संभावना उतनी बेहतर हो सकती है. कार्डियर अरेस्ट आने के बाद दो से तीन मिनट में ही सीपीआर दे देना चाहिए. अगर देर होती है तो ये खतरनाक और जानलेवा हो सकता है. ऐसे में ये जरूरी है कि आम लोगों को भी बेसिक CPR की ट्रेनिंग मिलनी चाहिए, ताकि अगर आसपास किसी व्यक्ति को कार्डियक अरेस्ट आए तो उसकी जान बचाई जा सके.
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एआई का क्या है रोल
डॉ. राकेश ने कहा कि AI-बेस्ड टेक्नोलॉजी हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स की कई तरह से मदद कर सकती हैं, जैसे कार्डियक अरेस्ट की पहचान करना, चेस्ट कम्प्रेशन की क्वालिटी की निगरानी करना, मरीज के डेटा का विश्लेषण करने में एआई मदद कर सकता है. अब जरूरी ये है कि लोगों को सीपीआर के बारे में जागरूक करें और उसमें एआई की मदद भी लें. ये इसको आसान बना सकता है.