देश की सर्वोच्च अदालत में 10 जून को एक सुनवाई के दौरान कुछ ऐसा हुआ कि पूरा कोर्टरूम हैरान रह गया. प्रबल प्रताप नाम के एक याचिकाकर्ता ने बेंच को ‘मिस्टर ज्यूडिशियल सर्वेंट’ कहकर संबोधित किया. प्रताप ने अपनी फाइल हवा में उछाली और भारत के मुख्य न्यायाधीश को अपशब्द कहे.
अब एक पुलिसवाले और वकील के बीच मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है. कुछ लोगों का कहना है कि पुलिस के साथ मारपीट कर रहा शख्स वही प्रबल प्रताप है, जिसने सुप्रीम कोर्ट में बवाल किया था. वीडियो में एक पुलिसकर्मी और वकील आपस में बुरी तरह हाथापाई करते नजर आ रहे हैं.
वीडियो को एक्स पर शेयर करते हुए एक व्यक्ति ने लिखा, “CJI सूर्यकांत को माँ की देने वाले वकील प्रबल प्रताप का वीडियो सामने आया है वकील साहब एक पुलिस अधिकारी से मारपीट कर रहें हैं जैसे गली-मोहल्ले के लोकल गुंडे करते हैं पुलिस अधिकारी को बीच चौराहे पर दौड़ा-दौड़ा कर मारना कहा तक उचित है कानून की पढ़ाई करने वाले ही कानून का उल्लंघन और शर्मसार करने वाली हरकत कर रहे हैं.”

आजतक फैक्ट चेक ने पाया कि वीडियो कानपुर का है, और इसमें दिख रहा शख्स प्रबल प्रताप नहीं है.
कैसे पता की सच्चाई?
वीडियो के कीफ्रेम्स को रिवर्स सर्च करने पर हमें इस घटना से संबंधित तमाम न्यूज रिपोर्ट्स मिल गईं. न्यूज-24 की 11 जुलाई की वीडियो रिपोर्ट के मुताबिक, मामला उत्तर प्रदेश के कानपुर का है, जहां सिविल लाइंस कचहरी के बाहर दो पुलिस वाले और एक वकील आपस में ही भिड़ गए.
इस मारपीट के दूसरे एंगल से रिकार्ड किए गए कई वीडियोज में वकील का चेहरा साफ नजर आता है, जिसे देखकर साफ पता चलता है कि ये प्रबल प्रताप नहीं, बल्कि कोई और शख्स है.

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, वीडियो सामने आने के बाद दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच बैठा दी गई और प्राथमिक जांच के बाद एक कॉन्स्टेबल को सस्पेंड कर दिया गया. एसीपी आनंद ओझा ने बताया कि दोनों पुलिसवालों में से एक काफी समय से निलंबित है और गैरहाजिर चल रहा है. वहीं दूसरे कॉन्स्टेबल को अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित कर दिया गया.
कौन है प्रबल प्रताप?
रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रबल, उत्तर प्रदेश के इटावा का रहने वाला है और वो लखनऊ की एक सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करता था. आरोप है कि प्रबल ने अपने ऑफिस की एक महिला सहकर्मी को काफी परेशान किया था और उसे आपत्तिजनक मैसेज भी भेजे थे. दुर्व्यवहार के आरोप में कंपनी ने प्रबल को निकाल दिया.
कंपनी से निकाले जाने के बाद प्रबल ने कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और कंपनी पर ‘देश विरोधी गतिविधियों’ में शामिल होने का मुकदमा कर दिया. प्रबल पहले लखनऊ के सीजेएम कोर्ट गया, फिर हाईकोर्ट. उसकी याचिका हाईकोर्ट से खारिज हो गई. इसके बाद उसने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया.