
मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले की एक सेशंस कोर्ट ने हाल ही में मॉब लिंचिंग से जुड़े एक मामले में 14 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. साल 2022 में नर्मदापुरम जिले के सिवनी मालवा तहसील में नजीर अहमद नाम के शख्स की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी. कोर्ट ने ये फैसला इसी मामले में सुनाया था.
अब कुछ लोगों को पुलिस हिरासत में लिए जाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. वीडियो में देखा जा सकता है कि एक लड़के को कॉलर से पकड़कर जबरन पुलिस की गाड़ी में बैठाया जा रहा है. पुलिस की गाड़ी के आसपास काफी भीड़ नजर आती है.
कुछ सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि ये मध्य प्रदेश का वीडियो है और इसमें वही ‘गौरक्षक’ नजर आ रहे हैं जिन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी.
वीडियो को एक्स पर शेयर करते हुए एक व्यक्ति ने लिखा, “हिंदुओं के नाम पर चुनी हुई सरकारों से लेकर हिंदुओं को सिर्फ़ वोट के लिए इस्तेमाल करने वाले संगठनों तक किसी एक को भी फर्क नहीं पड़ रहा इन 14 गौ रक्षकों के जीने या मरने से. जिसका हम दूध पीते हैं जिसकी महिमा का बखान हमारे वेद और शास्त्र करते हैं वो हमारी गौ माता है और उसकी रक्षा करना हमारा धर्म है. उसी धर्म को निभाने वाले मध्य प्रदेश के इन 14 गौ रक्षकों को मुस्लिम जज द्वारा उम्र कैद सजा दे दी गई है.”

आजतक फैक्ट चेक ने पाया कि ये वीडियो राजस्थान में आरएसएस से जुड़े एक कार्यक्रम का विरोध करते NSUI कार्यकर्ताओं का है.
कैसे पता की सच्चाई?
वायरल वीडियो में “@vijaypal_kuri_ru” नाम का एक हैंडल नजर आता है. सर्च करने पर पता चला कि ये विजयपाल कूड़ी नाम के एक व्यक्ति का इंस्टाग्राम अकाउंट है. विजयपाल, कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI के कार्यकर्ता हैं और एक स्टूडेंट एक्टिविस्ट हैं.
उन्होंने 3 अप्रैल को ये वीडियो इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया था. पोस्ट के मुताबिक ये वीडियो राजस्थान का है, जहां उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ यानी आरएसएस से संबंधित एक कार्यक्रम के खिलाफ प्रोटेस्ट किया था.
इससे संबंधित उन्होंने कई वीडियो अपने अकाउंट पर पोस्ट किए थे. इनमें NSUI के कार्यकर्ता आरएसएस के खिलाफ नारेबाजी करते नजर आ रहे हैं. पुलिस इन कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेती हुई दिख रही है.
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यूनिवर्सिटी में ‘मरुधरा नारी संगठन’ के बैनर तले 3 अप्रैल को नारी सशक्तिकरण पर एक कार्यक्रम होना था. NSUI के कार्यकर्ताओं ने इसका जमकर विरोध किया. NSUI ने आरोप लगाया कि ये कार्यक्रम आरएसएस समर्थित है और इसके जरिए एक खास विचारधारा को बढ़ावा दिया जा रहा है. मामला बढ़ने पर पुलिस ने बल का इस्तेमाल किया और कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में भी ले लिया.
हमने विजयपाल कूड़ी से भी बात की. उन्होंने वायरल दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ये 3 अप्रैल को हुए प्रोटेस्ट का वीडियो है. साफ है कि वीडियो के साथ किए जा रहे दावे एकदम बेबुनियाद हैं.