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'एजेंडा आजतक': निर्भया के पिता बोले- आरोपियों को न मिले बेल, वरना जलेंगी बेटियां

आजतक के हिंदी जगत के महामंच एजेंडा आजतक के आठवें संस्करण के पहले दिन पूछता है आजतक- महिलाएं असुरक्षित कब तक सत्र में निर्भया के पिता बद्रीनाथ ने कहा कि रेप के आरोपियों को किसी भी सूरत में जमानत नहीं मिलनी चाहिए. अगर उन्हें जमानत मिलेगी तो लड़कियों को जिंदा जला दिया जाएगा.

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निर्भया की मां आशा देवी और पिता बद्रीनाथ (फोटो-यासिर इकबाल/इंडिया टुडे)
निर्भया की मां आशा देवी और पिता बद्रीनाथ (फोटो-यासिर इकबाल/इंडिया टुडे)

  • इंसाफ के लिए आज भी कहीं न कहीं 2012 में ही खड़ी हूंः आशा देवी
  • इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन कली पुरी ने स्वागत भाषण दिया
  • बद्रीनाथ-आंसू ही बहाए गए, लेकिन संसद में आवाज नहीं उठाई गई

'आजतक' के हिंदी जगत के महामंच 'एजेंडा आजतक' के आठवें संस्करण के पहले दिन ‘पूछता है आजतक- महिलाएं असुरक्षित कब तक’ सत्र में निर्भया के पिता बद्रीनाथ ने कहा कि रेप के आरोपियों को किसी भी सूरत में जमानत नहीं मिलनी चाहिए. अगर उन्हें जमानत मिलेगी तो लड़कियों को जिंदा जला दिया जाएगा. साथ ही उन्होंने कहा कि इस तरह के मामले की समयसीमा तय की जानी चाहिए.

निर्भया के पिता बद्रीनाथ ने कहा कि यह सच है कि बहुत सी महिलाओं को अपने अधिकार का पता नहीं हैं, पिछले दिनों जितने अपराध हुए उसमें तो लोगों को अधिकारों के बारे में जानकारी थी लेकिन वहां क्या हुआ. सरकार क्या कर रही थी. पुलिस क्या कर रही थी. उन्होंने आगे कहा कि इतना सब कुछ होने के बावजूद निर्भया मामले में 7 साल हो गए. संसद में कभी सांसदों ने आवाज उठाई है कि महिलाओं के साथ क्या हो रहा है. सिर्फ आंसू ही बहाए गए हैं आवाज नहीं उठाई गई.

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समयसीमा तय किया जाना जरूरीः बद्रीनाथ

उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बदलने की जरूरत है. कुछ चीजों में बदलाव भी आया है. लेकिन कानून बनाते-बनाते अगर समयसीमा तय कर दी जाती तो निर्भया का मामला इतना भी लंबा नहीं खींचता.

निर्भया के पिता बद्रीनाथ ने कहा कि समाज में यह गलतफहमी फैली हुई है कि महिलाएं असुरक्षित हैं. जबकि ऐसा नहीं है. महिलाएं सुरक्षित हैं, उन्हें कोई दिक्कत नहीं है. हमें सुरक्षा महिलाओं की नहीं बल्कि उन दरिंदों की करनी है जिनको ऐसे अपराध करने से रोका जाए. उन्होंने कहा कि किसी केस की शुरुआत कोर्ट में होती है तो यह तय हो जाता है कि आरोपी दोषी है या नहीं. ऐसा नहीं होना चाहिए कि लोअर कोर्ट से हाई कोर्ट गए तो पता चले कि वहां भी नए सिरे से केस चल रहा है. लोअर कोर्ट ने अगर सजा सुना दी है कि पूरे मामले को ऑनलाइन के जरिए जानकारी हासिल कर सुनवाई होनी चाहिए. ताकि जल्द से जल्द दोषियों को सजा मिले.

उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों की समयसीमा तय होनी चाहिए. अगर समयसीमा तय नहीं की गई तो इस तरह की घटनाओं को रोक पानी संभव नहीं हो सकेगा.

इंसाफ मांगते-मांगते सवाल बन गईः निर्भया की मां

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बद्रीनाथ ने कहा कि दूसरी बात यह कि अगर कोई रेप के मामले का दोषी या अपराधी करार हो जाए तो उसे बेल नहीं मिलनी चाहिए, अगर बेल दिया जाएगा तो निश्चित रूप से लड़कियां जलाई जाएंगी.

‘एजेंडा आजतक’ के ‘पूछता है आजतक- महिलाएं असुरक्षित कब तक’ सत्र में निर्भया के माता-पिता आशा देवी और बद्रीनाथ के अलावा बीजेपी सांसद रीता बहुगुणा जोशी, अपना दल की अध्यक्ष और सांसद अनुप्रिया पटेल, ऑल इंडिया महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सुष्मिता देव भी शामिल हुए.

निर्भया की मां आशा देवी ने भी इसी मंच से कहा, 'मुझे इंसाफ चाहिए. कहीं न कहीं आज भी मैं वहीं 2012 में ही खड़ी हूं क्योंकि आज भी इंसाफ चाहिए. इंसाफ मांगते-मांगते मैं खुद एक सवाल बन गई हूं. आशा देवी ने आगे कहा, '2012 में जो घटना हुई उसमें निर्भया की क्या गलती थी. हमारी क्या गलती थी कि आज भी हमें इंसाफ नहीं मिला.'

'एजेंडा आजतक' का आठवां संस्करण शुरू

19 साल से लगातार भारत का नंबर वन न्यूज चैनल रहे 'आजतक' के हिंदी जगत के महामंच 'एजेंडा आजतक' के आठवें संस्करण का आगाज सोमवार को हो गया. एजेंडा आजतक की शुरुआत सोमवार सुबह वंदे मातरम से हुई. इसके बाद इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन कली पुरी ने स्वागत भाषण दिया. कली पुरी ने के महत्व के बारे में बताते हुए इस आयोजन को अपने सभी कार्यक्रमों की नींव बताया.

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एजेंडा आजतक अन्य इवेंट्स की नींवः कली पुरी

ने कहा कि सभी तरह के विचारों को बगैर किसी दबाव और रोक-टोक के साथ आपके सामने प्रस्तुत करना हमारा प्रमुख एजेंडा है. हिंदी जगत के महामंच का यह आठवां संस्करण है. यह वो एजेंडा आजतक है जिसने दूसरे और कार्यक्रमों का आयोजन किया है. एजेंडा आजतक का पहला एडिशन 2012 में हुआ था. उस समय आजतक का कोई और इवेंट नहीं था. इस एक इवेंट ने नक्शा ही बदल दिया.

दिल्ली के ली मेरिडियन होटल में आयोजित दो दिवसीय 'एजेंडा आजतक' 16 और 17 दिसंबर 2019 चलेगा. एजेंडा आजतक का मकसद है, उस एजेंडे को लोगों के सामने लेकर आना जो दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के विचारकों और चिंतकों की सोच है. ये देश में देश की आवाज का एजेंडा होगा.

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