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एजेंडा आजतक: विरासत में मिले मुद्दों पर भिड़े मनीष तिवारी और जयंत सिन्हा

आरके सिन्हा ने कहा कि मोदी सरकार ने ऐसे समय में सत्ता की बागडोर को संभाला जब देश के सामने कोल, स्पेक्ट्रम जैसे कई घोटाले अर्थव्यवस्था को खोखला कर चुकी थी. वहीं जयंत सिन्हा ने कहा कि मौजूदा समय में कालेधन की दिक्कत, बैंक के कर्ज की समस्या जैसे मुद्दे भी कांग्रेस सरकार से विरासत में बीजेपी सरकार दो दिए गए.

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एजेंडा आजतक 2017: विचारों के आदान-प्रदान का महामंच
एजेंडा आजतक 2017: विचारों के आदान-प्रदान का महामंच

एजेंडा आजतक के मंच पर केन्द्रीय मंत्री जयंत सिन्हा और आर के सिंह की विपक्ष में बैठी कांग्रेस के नेता मनीष तिवारी के बीच भिड़त देखने को मिली. इन नेताओं में गर्मागरम बहस इस बात को लेकर हुई कि क्या मौजूदा बीजेपी सरकार को पूर्व की कांग्रेस सरकार से विरासत में ऐसे मुद्दे मिले जिसने अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने का काम किया था.

आरके सिन्हा ने कहा कि मोदी सरकार ने ऐसे समय में सत्ता की बागडोर को संभाला जब देश के सामने कोल, स्पेक्ट्रम जैसे कई घोटाले अर्थव्यवस्था को खोखला कर चुकी थी. वहीं जयंत सिन्हा ने कहा कि मौजूदा समय में कालेधन की दिक्कत, बैंक के कर्ज की समस्या जैसे मुद्दे भी कांग्रेस सरकार से विरासत में बीजेपी सरकार दो दिए गए.

आरके सिन्हा ने कहा कि मौजूदा वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़े उन लोगों को जवाब है जिन्होंने नोटबंदी और जीएसटी के फैसलों पर सवाल खड़ा किया था. सिन्हा के मुताबिक अब देश की जीडीपी विकास दर बहुत जल्द 9 फीसदी के पार चली जाएगी. आरके सिन्हा की बात का  समर्थन करते हुए जयंत सिन्हा ने कहा कि बीते तीन साल के दौरान लिए गए आर्थिक सुधार के बड़े फैसलों से देश की अर्थव्यवस्था ग्रोथ ट्रैजेक्टरी पर आ गई है. सिन्हा ने भी दावा किया कि इन सुधारों के असर से अब देश में विकास दर डबल डिजिट हो सकती है. सिन्हा ने कहा कि नोटबंदी और जीएसटी पर विरोध अब विपक्ष का जुमला बन गया है.

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इसके जवाब में मनीष तिवारी ने कहा कि यदि बैंक एनपीए की समस्या बीजेपी को कांग्रेस से विरासत में मिले हैं तो आखिर क्यों मोदी सरकार देश में बड़े 10 एनपीए सूची से कर्ज डकारने वालों के नाम का खुलासा नहीं कर रही. वहीं मनीष तिवारी ने कहा कि मोदी सरकार अब नोटबंदी और जीएसटी का असर खत्म होता दिखाने के लिए इस हफ्ते आए जीडीपी आंकड़ों का हवाला देना शुरू किया है. मनीष ने कहा कि यह दावा पूरी तरह बेबुनियाद है क्योंकि मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान जीडीपी आंकलन का फार्मूला बदला है जिससे बड़ा संख्या दिखाई देती है. लेकिन मनीष के मुताबिक हकीकत में यह आंकड़े 70 और 80 के दशक में मिल रही ग्रोथ के समानांतर हैं.

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