सलमान खान को भारतीय ओलंपिक संघ ने रियो ओलंपिक्स के लिए गुडविल एंबेसेडर बनाया है. लेकिन अब विवाद यह पैदा हो गया है कि खेल की दुनिया से एंबेसेडर क्यों नहीं बनाया गया? इसे लेकर लोग दो धड़ों में बंट गए हैं. जानें टेलीविजन की जानी-मानी हस्तियों का क्या कहना है.
ध्रुव सिंहः मुझे लगता है कि अगर जो भारतीय ओलंपिक संघ चाहता है वे कर सकते हैं तो यह ठीक है क्योंकि फेम का सही इस्तेमाल हो सकता है. अगर दूसरी तरह से सोचूं तो वे इसी कद के किसी खिलाड़ी को चुन सकते थे. जैसे कपिल देव, मिल्खा सिंह, अभिनव बिंद्रा या कोई अन्य.
रश्मि देसाईः की स्टार पावर है. उनमें हर वह बात है जो किसी अच्छे एंबेसेडर में होनी चाहिए. वे खेलों से सक्रिय रूप से जुड़ने के लिए दूसरे लोगों को प्रेरित कर सकते हैं. उन्हें चुनना सही फैसला है.
अमल सहरावतः इसमें दिक्कत क्या है? अगर अंगूठा छाप हमारी सरकार के एंबेसेडर बन सकते हैं तो 50 साल की उम्र में एकदम फिट की कसौटी पर खरे उतरते हैं...सुल्तान भ्रष्ट लोगों की अपेक्षा काफी अच्छा है.
शरद मल्होत्राः सलमान हर मायने में एकदम फिट हैं. उन्होंने खुद को मैंने प्यार किया के छरहरे युवा से बजरंगी भाईजान के आकर्षक शख्स में तब्दील कर लिया. वे अपनी ब्रांड पॉवर के जरिये ओलंपिक्स से जुड़ी भारतीय छवि को मजबूत ही करेंगे.
संदीप आनंदः वे कई लोगों के फिजिक को आकर्षक बनाने के लिए प्रेरणा स्रोत रहे हैं. वे हर काम को पूरे समर्पण से करते हैं और यह उनको देखकर लग भी जाता है. उम्मीद है उनके जुड़ने से खेल के लोगों को फायदा भी मिलेगा. वे एक अच्छी पसंद हैं.
कृष्णा गोकानीः फिटनेस का बहुत ध्यान रखते हैं और दूसरो को फिट रहने के लिए प्रेरित करते हैं. मुझे लगता है कि सलमान की मास अपील खेलों को लेकर लोगों की जागरूकता में इजाफा करेगी. उनको इस तरह जोडऩे का उद्देश्य खेलों से ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ना है और ओलंपिक्स के खेलों को लोकप्रिय बनाना है.
आरती सिंहः वह बेहतरीन पसंद हैं. सुपरफिट हैं. वे ऐसी आइकन हैं जिन्हें लोग फॉलो करते हैं. उन्हें एंबेसेडर बनाए जाने से ओलंपिक्स को भारत में प्रचारित किया जा सकेगा.