CID टेलीविजन का लोकप्रिय सीरियल है. शो का हर कलाकार भी घर-घर लोकप्रिय है. हंसते-मुस्कुराते एक्टर्स की जिंदगी देखकर लगता है कि काश ऐसी लाइफ हमें भी मिलती. पर शो में पूर्वी का रोल निभाने वाली अंशा सैयद की कहानी सुनकर ये गलतफहमी भी दूर हो जाएगी.
अंशा सैयद आज टेलीविजन की मशहूर एक्ट्रेसेस में शुमार हैं. आज उनके पास शोहरत और दौलत सब है, लेकिन एक वक्त था, जब वो मुश्किल दौर से गुजर रही थीं.
सिद्धार्थ कनन को दिए इंटरव्यू में उन्होंने अपने भाई को खोने का गम और पिता की आर्थिक तंगी पर बात की. अंशा का छोटा भाई 17 साल का था, जब उसने कैंसर से दम तोड़ दिया था.
मुश्किल दौर को याद करते हुए उन्होंने कहा कि मेरा भाई बोन कैंसर से जूझ रहा था. चने के दाल जितना ट्यूमर था. तीन चार कैमो के बाद वो बढ़ता चला गया. वो ठीक नहीं हुआ.
अंशा कहती हैं कि जब भी मैं अपने भाई के बारे में बता करती हूं, गला सूखने लगता है. लोगों को लगता है कि कैंसर छूत की बीमारी है. वो 17 साल का था, जब उसे कैंसर हुआ. वो जब भी गली मोहल्ले से निकलता और बच्चों को गोद में लेता, तो लोग अपने बच्चों को घर ले जाते. लोग उससे परहेज करने लगे थे. फिर उसके सारे दोस्त दूर होते चले गए.
'कैंसर मरीज के घरवालों को ही पता होता है कि घर में क्या हो रहा है. अंत में मैं ही उसकी दोस्त रह गई थी. वो कहता है कि मैं यहां नहीं रहूंगा, पर मैं तुम्हारा दोस्त जरूर रहूंगा.'
एक्ट्रेस ने बताया कि भाई के कैंसर ट्रीटमेंट हमारा बहुत पैसा लग गया. हम मिडिल क्लास फैमिली से थे. इसलिए ये हमारे लिए बहुत बड़ा खर्चा था. इसलिए उसके इलाज के दौरान हम लोग आर्थिक तंगी से भी गुजरे.
'सबकुछ करने के बावजूद हम अपने भाई को नहीं बचा सके. जब मेरे भाई की डेथ हुई, तो मैंने पहली बार अपने पिता को रोते देखे. मुझे तो समझ ही नहीं आ रहा था कि क्या हो गया है. मैं नम थी.'
अंशा कहती हैं कि मेरा भाई ऊपर से मेरे लिए चीजें संभाल रहा है. जब उनसे पूछा गया कि कैसे, तो उन्होंने कहा कि पता नहीं कैसे, पर मैं कहीं भी फंसती नहीं हूं. मैं हर मुश्किल से बाहर आ जाती हूं. उन्होंने कहा कि मुझे आज भी अपने भाई की कमी खलती है. शायद ही उसकी कमी पूरी हो पाएगी.