सुशांत सिंह राजपूत के निधन पर एक्ट्रेस कंगना रनौत ने काफी टफ स्टैंड लिया है. उन्होंने कई मौकों पर सुशांत की मौत को सुसाइड मानने से इनकार किया है. सिर्फ यही नहीं उन्हें सुशांत की मौत में नेपोटिज्म बड़ी वजह लगती है. इसी कड़ी में हाल ही में दिए इंटरव्यू में कंगना ने सुशांत मामले में कई चौंकाने वाली बातें कही थीं. अब बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी, कंगना की मदद को आगे आए हैं.
कंगना रनौत ने कुछ समय पहले कहा था कि वे अपना पद्मश्री अवॉर्ड वापस करने को तैयार हैं, अगर सुशांत मामले में उनके बताए तथ्य गलत साबित होते हैं. कंगना ने नेपोटिज्म पर तो तीखी प्रतिक्रिया दी ही थी, इसके अलावा उन्होंने यहां तक कहा था कि पुलिस ने अभी तक बॉलीवुड के एक तबके से पूछताछ की ही नहीं है. अब कंगना ने तो ये सब एक इंटरव्यू में कहा था, लेकिन बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी को उनका ये अंदाज पसंद आ गया है.
कंगना की कानूनी मदद करेंगे स्वामी?
सुब्रमण्यम स्वामी के वकील इशकरण ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी है कि नेता कंगना की कानूनी रूप से मदद करने को तैयार हैं. ट्वीट में बताया गया है- डॉ. स्वामी ने पहले ही कहा है कि अगर कंगना की टीम को पुलिस को स्टेटमेंट देते समय किसी कानूनी सपोर्ट की जरूरत है, तो मैं वो देने को तैयार हूं.
Dr has already said, if wants any legal support on her statements to Police, I am willing to provide it.
— Ishkaran Singh Bhandari (@ishkarnBHANDARI)
अब मालूम हो कि इशकरण वही वकील हैं जिनकी नियुक्ति सुब्रमण्यम स्वामी ने की है. उन्होंने इशकरण से सुशांत मामले में सभी जरूरी दस्तावेज इकट्ठा करने के लिए कहा है, जिससे जरूरत पड़ने पर मामले की सीबीआई जांच की जा सके. बता दें कि इशकरण ने सुशांत केस में तेजी से काम किया है. उन्होंने हाल ही में मुंबई पुलिस से अपील की थी कि सुशांत के घर को ठीक तरीके से सील किया जाए और उनके सभी सामन को संभाल कर रखा जाए.
क्या हो पाएगी सीबीआई जांच?
अब सुब्रमण्यम स्वामी और रूपा गांगुली जैसे नेता जरूर सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक ऐसा कोई भी प्रस्ताव महाराष्ट्र सरकार ने नहीं दिया है. राज्य के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने कहा था कि सुशांत मामले में सीबीआई जांच की जरूरत नहीं है. उनकी नजरों में मुबंई पुलिस की कार्रवाई सही दिशा में आगे बढ़ रही है. देशमुख का ये बयान सुशांत के फैन्स को ज्यादा रास नहीं आया था. अनिल से उनके फैसले पर फिर विचार करने की अपील की गई थी.