मनोज तिवारी आज भोजपुरी इंडस्ट्री का बड़ा नाम हैं. सिंगिंग, एक्टिंग और राजनीति, हर क्षेत्र में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है. लेकिन उनकी इस सफलता के पीछे उनकी मां ललिता देवी का बड़ा त्याग छिपा है, जिसका खुलासा खुद मनोज की मां ने उनके पॉडकास्ट में किया. उनकी मां ने बेटे की कामयाबी के लिए ऐसा संकल्प लिया था, जिसे सुनकर हर कोई भावुक हो रहा है.
मनोज तिवारी की मां का त्याग
मनोज तिवारी ने जब अपनी मां से पूछा कि वो इतने सालों से चप्पल क्यों नहीं पहन रही हैं. इस पर उनकी मां ने जो जवाब दिया, उसने उन्हें भी अंदर तक हिला दिया.
मनोज की मां ने बताया कि करीब 18 साल पहले वो प्रयागराज कुंभ मेले में गई थीं. उस वक्त उन्होंने नई चप्पल पहनी थी. लेकिन मेले में इतनी कीचड़ था कि उनकी चप्पल मिट्टी में धंस गई. काफी कोशिश के बाद भी जब पैर बाहर नहीं निकल पाया, तो उन्होंने चप्पल वहीं छोड़ दी. लेकिन ये सिर्फ चप्पल छूटने की बात नहीं थी. उस घटना ने उनकी मां के मन पर गहरा असर छोड़ दिया. तभी उन्होंने एक बड़ा प्रण ले लिया.
मनोज की मां ने कहा- मैंने तय कर लिया था कि अब चप्पल तभी पहनूंगी, जब मेरा बेटा कुछ बन जाएगा, उसका नाम हो जाएगा. मैंने चप्पल त्याग दी थी. उन्होंने बताया कि उस दौर में परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा था. घर में गाड़ी जैसी सुविधाएं भी नहीं थीं और कई-कई मील पैदल चलना पड़ता था.
मां ने ली प्रतिज्ञा
उन्होंने आगे कहा कि जब उनके चारों बेटे अपने पैरों पर खड़े हो जाएंगे और जिंदगी में सफल हो जाएंगे, तभी वो दोबारा चप्पल पहनेंगी. साथ ही उन्होंने मन में ये भी ठान लिया था कि वो फिर प्रयागराज जाएंगी, नई चप्पल खरीदेंगी और उसे पहनेंगी.
मां के इस त्याग और ममता को याद करते हुए मनोज तिवारी भी भावुक नजर आए. उन्होंने वीडियो शेयर करते हुए लिखा- मां की ममता और त्याग का कोई हिसाब नहीं. वो बिना कहे अपने बच्चों के लिए क्या कुछ कर जाती है.
अब सोशल मीडिया पर मनोज तिवारी की मां की ये कहानी तेजी से वायरल हो रही है. लोग उनकी मां के संघर्ष और त्याग को सलाम कर रहे हैं. फैंस का कहना है कि मां का प्यार और बलिदान ही बच्चों की सबसे बड़ी ताकत होता है.
मनोज का हाल ही में राजा पैदल ना चले गाना रिलीज हुआ था. इसे अब तक मिलियन में व्यूज मिल चुके हैं.