बॉलीवुड में अगर इस समय अच्छे कंटेंट की बात होती है, तो कई लोगों के मन में टीवीएफ (TVF) का नाम जरूर आता है. एक यूट्यूब चैनल से शुरू हुआ ये सफर, आज बड़े प्रोडक्शन हाउस में बदल चुका है जिसने अभी तक कई दमदार और यादगार वेब सीरीज बना डाली हैं. टीवीएफ की सबसे पॉपुलर और सक्सेसफुल वेब सीरीज पंचायत को दर्शकों ने बहुत प्यार दिया है. इसके पिछले चार सीजन शानदार बीते, पांचवा सीजन भी जल्द आ रहा है. लेकिन इससे पहले इसी शो के मेकर्स एक नई कहानी लेकर आए हैं.
पंचायत के बाद, डायरेक्टर दीपक कुमार मिश्रा ग्राम चिकित्सालय सीरीज लेकर आए जिसमें भटकण्डी गांव की कहानी दिखाई गई. यहां एक होनहार और कर्मठ डॉक्टर प्रभात की एंट्री हुई, जो गांव में एक बेहाल पड़े सरकारी क्लिनिक को वापस अपने पैरों पर खड़ा करने की कोशिश में लग जाता है. मगर गांव में पहले से ही अपना डेरा जमाया हुया 'झोलाछाप' डॉक्टर चेतक उसे इसमें सफल नहीं होने देता. पहला सीजन मजेदार तो था, मगर उसमें पंचायत जैसी बात नहीं थी. अब मेकर्स इसका नया सीजन लाए हैं, जिसमें डॉ. प्रभात वर्सेज डॉ. चेतक की कहानी आगे बढ़ाई गई है. कैसा है सीजन 2? आइए, आपको बताते हैं.
भटकण्डी गांव में दवाई की समस्या
डॉ. प्रभात (अमोल पराशर) के पास अब ना-ना करते हुए मरीज इलाज कराने आने लगे हैं. वो उन्हें सही राय तो दे देते हैं मगर दवाई नहीं दे पाते. उनके क्लिनिक के पास दवाई की सप्लाई कम आती है. ऐसे में उसे अपने पड़ोस के गांव का सहारा लेना पड़ता है, जिसमें उसकी मदद डॉ. गार्गी (अकांक्षा रंजन कपूर ) करती है. इसी दौरान वो डॉ. प्रभात से आदर्श प्राइमरी हेल्थ सेंटर प्रतियोगिता (PHC) में भाग लेने के लिए कहती है, जिससे उनके क्लिनिक की दवाई वाली परेशानी दूर हो सकती है. बस उन्हें अपने साथी फुटानी (आनंदेश्वर द्विवेदी), गोविंद (आकाश मखीजा) और ढीलू (कार्तिकेय राज) का साथ चाहिए.
आदर्श PHC जीतने के लिए डॉ. प्रभात को गांव वालों का भरोसा, क्लिनिक की साफ-सफाई और उसे पूरी तरह व्यवस्थित रखने की जरूरत है. लेकिन इसे अव्यवस्थित बनाने के लिए डॉ. चेतक कुमार (विनय पाठक) और बाकी कुछ लोग प्रभात की परेशानी बढ़ाते नजर आते हैं. प्रभात के सामने अब कई सारी परेशानिया हैं. सबसे पहले उसे आदर्श PHC का टेस्ट पास करना है. फिर भ्रष्टाचारियों के दुराचारों से खुद को बचाना है. अंत में गांव वालों को उसके जैसे एक सच्चे डॉक्टर में यकीन दिलाना है. क्या प्रभात ये सबकुछ कर पाएगा? यही सब आप इस नए सीजन में देखने वाले हैं.
कमाल है राइटिंग-डायरेक्शन, बोर नहीं करती सीरीज
TVF की एक बात की तारीफ होनी बनती है कि वो अपने कंटेंट को मिले फीडबैक में अगली बार सुधार जरूर लाते हैं. पिछला सीजन ग्राम चिकित्सालय का कुछ खास नहीं था. उसमें कॉमेडी ठीक-ठाक थी. मगर कहानी को सेटअप करने में काफी वक्त लगा जिससे स्क्रीनप्ले में थोड़ी कमी नजर आई. पहला सीजन मजेदार था लेकिन बीच-बीच में अपनी पकड़ छोड़ता रहता था. सीरीज में पूरी तरह दिलचस्पी बनाए रखनी मुश्किल हो गई थी. लेकिन इस नए सीजन ने वो कमी पूरी तरह दूर कर दी.
ग्राम चिकित्सालय सीजन 2, पंचायत जैसी सीरीज के लेवल का ना सही मगर उसके टक्कर का बनाया गया है. मात्र 5 एपिसोड्स की ये सीरीज शुरू से अंत तक आपको सीट से बांधे रखती है. इस बार नए किरदारों को जोड़कर कॉमेडी और ट्रेजेडी का जो मिश्रण हुआ, वो देखने में काफी दमदार था. शहर में बैठे लोगों को गांव-देहात की असलियत जिस सच्चाई से इस सीजन दिखाई गई, उसके लिए मेकर्स की राइटिंग की तारीफ बनती है. सीरीज में कई ऐसे मुद्दों को हमारे सामने पेश किया गया है, जिन्हें हम तो नॉर्मल समझते हैं. मगर गांव की जिंदगी में वो मुद्दा बेहद अहम और गंभीर होता है.
डायरेक्टर ललितम आनंद ने पूरी सीरीज के दौरान गांव वालों की मासूमियत हम शहर वालों को हास्य के जरिए बताई जा सके, ऐसी कोशिश की है. इसमें उन्हें सभी एक्टर्स का काफी अच्छा साथ मिला है. सीरीज में दिखा हर एक किरदार काफी अच्छे तरीके से लिखा गया है, सबकी अपनी-अपनी कहानी है जिसे दिखाना बेहद जरूरी भी लगा. ग्राम चिकित्सालय 2 में मेकर्स ने गांव केे कई ऐसे मुद्दों को उठाया है, जिसे देखकर शायद आप भी सोच में पढ़ सकते हैं. अब वो मुद्दे अगर इधर बता दिए, तो स्पॉइलर हो जाएगा.
यहां देखें सीरीज का ट्रेलर:
फिर छाए सभी एक्टर्स, स्क्रीन पर छोड़ी छाप
वैसे तो सीरीज का हर एक किरदार अहम है, मगर डॉ. प्रभात पर लाइमलाइट ज्यादा रखी गई है जिसे एक्टर अमोल पराशर ने निभाया है. उनका काम इसमें लाजवाब है. आप ऐसा मान सकते हैं कि पूरी सीरीज उन्होंने अपने कंधों पर उठाई हुई है. लेकिन इसमें उनका साथ कई और सपोर्टिंग एक्टर्स भी देते हैं. एक्टर आनंदेश्वर द्विवेदी, आकाश मखीजा और कार्तिकेय राज ने उनका बढ़िया साथ दिया. शो में भोजपुरी भाषा का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें ये तीनों एक्टर्स ने काफी अच्छी तरह से डायलॉग बोले हैं. आपको इन्हें देखकर ऐसा ही लगेगा कि ये असल में भी भोजपुरी ही बोलते हैं. वहीं इस सीजन भोजपुरी इंडस्ट्री के स्टार दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ की भी एंट्री हुई है. वो शो में बाबू साहेब बने हैं, जिनके इशारों पर पूरा सिस्टम चलता है. उन्होंने भी काफी शानदार काम किया है, अगर आप ये सीरीज उन्हें देखने के लिए देखना चाह रहे हैं तो वो आपको निराश नहीं करेंगे.
एक्टर विनय पाठक भी पहले सीजन की तरह अपने रोल को बढ़िया तरीके से निभाते हुए नजर आए. उनसे आपको शिकायत का मौका शायद कम ही मिलेगा. ग्राम चिकित्सालय 2 में पंचायत सीरीज के दो अहम किरदार भूषण और बिनोद की भी एंट्री हुई. एक्टर दुर्गेश कुमार और अशोक पाठक कुछ ही समय के लिए आए, मगर शो में चार चांद लगाकर चले गए. उनके आने से ये भी यकीन हो गया कि ग्राम चिकित्सालय और पंचायत, एक ही यूनिवर्स का हिस्सा है. अब पंचायत 5 में भी उम्मीद की जा सकती है कि इस शो का कोई किरदार वहां नजर आए. कुल मिलाकर अगर आपके पास 3 घंटे का फ्री टाइम है, और आप पंचायत के फैन हैं तो इसे जरूर देख सकते हैं. प्राइम वीडियो पर आया नया सीजन आपके चेहरे पर मुस्कान जरूर लाएगा.