रितेश देशमुख ने छत्रपति शिवाजी महाराज की कहानी बड़े पर्दे पर लाने का जिम्मा 11 साल पहले उठाया था. राजा शिवाजी में उनकी ये मेहनत साकार हुई है. फिल्मों, खासकर मराठी सिनेमा ने शिवाजी को कई बार पर्दे पर उतारा है. ऐसे में राजा शिवाजी का दांव इसे एक ऐसे स्केल पर लाने का था, जो पहले मराठी सिनेमा में नहीं देखा गया. सौ करोड़ के शानदार बजट के साथ रितेश ने राजा शिवाजी को मराठी सिनेमा की सबसे महंगी फिल्म बना दिया है.
राजा शिवाजी डायरेक्ट और प्रोड्यूस कर रहे रितेश खुद ही मराठा साम्राज्य के पहले छत्रपति, शिवाजी के रोल में भी हैं. पर फिल्म में उनके बॉलीवुड मित्रों ने भी महत्वपूर्ण किरदार निभाए हैं. अभिषेक बच्चन, विद्या बालन, संजय दत्त और कैमियो में सलमान खान का होना राजा शिवाजी को खूब चर्चा दिला रहा है, और फिल्म हिंदी में भी आई है. पर क्या एक ईमानदार इरादा, शानदार बजट और बड़े नाम राजा शिवाजी से तीन घंटे सात मिनट तक उनकी सीटों से बांधे रख सकते हैं? जवाब है— हां बिल्कुल. मगर उसके लिए राजा शिवाजी आपसे थोड़ा डिस्काउंट मांगेगी.
राजा शिवाजी का प्लॉट
रितेश देशमुख की फिल्म शिवाजी के जन्म से भी बहुत पहले शुरू होती है. मुगल बादशाह शाहजहां, बड़ी तेजी से उन रियासतों और राज्यों पर अपना कब्जा जमाने में जुटा है, जिनसे मिलकर आज का भारत देश बनता है. शिवाजी और उनके बड़े भाई संभाजी उस दौर में पैदा होते हैं, जब उनके पिता शहाजी भोसले का मराठा राज्य अलग-अलग शासकों के अधीन है. कभी निजामशाही, कभी मुगल तो कभी आदिलशाही. आदिलशाही में आने वाली बीजापुर सल्तनत का एक क्रूर, मगर तगड़ा जनरल है- अफजल खान.
राजा शिवाजी के फर्स्ट हाफ में संभाजी (अभिषेक बच्चन) को आप अपने पिता की सिचुएशन से गुस्से में और फिर बीजापुर सल्तनत की नाक में दम करते देखते हैं. दूसरी तरफ शिवाजी भी अपने पिता की विरासत को संभालने के लिए मैदान में उतर चुके हैं. लेकिन बीजापुर की सल्तनत ने बागी होते मराठाओं पर नकेल कसने की जिम्मेदारी फिर से अफजल खान को दे दी है. फिल्म का क्लाइमैक्स आते-आते स्थिति ये है कि अफजल ने शिवाजी पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है.
आखिरकार वो नौबत आ चुकी है कि शिवाजी के सामने दो ही रास्ते हैं— अपने मुकाबले कहीं मजबूत फौज लेकर चल रहे अफजल खान के सामने एक असंभव जीत की कोशिश में भिड़ जाएं. या फिर स्वराज का झंडा छोड़कर, फिर से बीजापुर सल्तनत के झंडे के नीचे आ जाएं. लेकिन इतना ऑलमोस्ट तय है कि शिवाजी इन दोनों में से कोई भी रास्ता चुनते तो आज उन्हें उस महान योद्धा के रूप में नहीं जाना जाता, जिसने मराठा साम्राज्य की विजय पताका लहराई. शिवाजी ने जो किया वो केवल वीरता नहीं, उच्च दर्जे की कूटनीति भी थी. राजा शिवाजी का ये क्लाइमैक्स ही अपने आप में फिल्म देखने की पर्याप्त वजह देता है.
राजा शिवाजी में क्या है दमदार?
ये फिल्म शिवाजी को एक ऐसे वल्नरेबल कैरेक्टर के रूप में लेकर आती है, जो केवल तलवार के दम पर आगे नहीं बढ़ सकता. रितेश देशमुख ने एक्टर और डायरेक्टर दोनों तरह से, शिवाजी के महान योद्धा अवतार को एक इंसानियत का टच दिया है. उसे फंसा हुआ, उलझा हुआ, कुछ मौकों पर अपने दुश्मन से कमजोर और घायल दिखने की इजाजत है. उसकी अपनी वीरता के आप कायल हो सकते हैं, पर युद्ध अकेले नहीं जीते जाते. हालांकि एक्शन और शिवाजी को एलिवेशन देने वाले सीन्स में रितेश थोड़े उन्नीस पड़ते हैं. मगर उनके काम में ईमानदारी और डेडिकेशन की कमी नहीं है.
राजा शिवाजी, मराठा राजाओं को अपना राज्य-अपनी प्रजा के लिए अलग-अलग बादशाहों के झंडे के नीचे दिखाने में भी संकोच नहीं करती. मराठा राजाओं के सामने मुगलों और बीजापुर सल्तनत को राजा शिवाजी, पूरी तरह एक बर्बर जानवर नहीं दिखाती. जो पिछले कुछ समय से मराठा साम्राज्य पर बेस्ड कहानियों में काफी हो रहा है. इस चॉइस के लिए रितेश की तारीफ बनती है. यहां देखें राजा शिवाजी का ट्रेलर:
राजा शिवाजी की दिक्कतें
रितेश की फिल्म के सामने सबसे बड़ा चैलेंज राजा शिवाजी को, बजट काबू रखते हुए एक ऐसा ग्रैंड स्केल देना था जो अभी तक नहीं देखा गया. कोशिश तो ये फिल्म पूरी करती है, लेकिन विजुअल्स और बेहतर हो सकते थे. राजा शिवाजी जहां भी स्पेशल इफेक्ट्स का सहारा लेती है, वहां थोड़ी कमजोर लगती है. लेकिन ड्रामा की टेंशन, इमोशन और इंटेन्सिटी में फिल्म काफी टाइट है.
परफॉरमेंस वाले डिपार्टमेंट में रितेश के साथ, अभिषेक बच्चन का काम भी सॉलिड है. संजय दत्त अपनी कई फिल्मों से बेहतर विलेन राजा शिवाजी में लगे हैं. विद्या बालन का होना उनके किरदार को बहुत दिलचस्प बनाता है. सचिन खेड़ेकर, भाग्यश्री, अमोल गुप्ते और जितेंद्र जोशी ने हमेशा की तरह दमदार काम किया है. रितेश के दोनों बेटों ने अलग-अलग उम्र के शिवाजी का किरदार अच्छा निभाया है. लेकिन शिवाजी की पत्नी के रोल में जेनेलिया थोड़ी कमजोर लगती हैं. सलमान खान का कैमियो काफी माहौल बनाने वाला है मगर इसका ट्रीटमेंट और बेहतर हो सकता था. अजय-अतुल का म्यूजिक कहानी को काफी सपोर्ट करता है और उसे एक लेवल ऊपर ले जाता है.
कुल मिलाकर राजा शिवाजी में रितेश देशमुख की ईमानदार और मेहनत भरी कोशिश आपको पूरी तरह दिखेगी. फिल्म थोड़ी लंबी है और विजुअल्स में कमी आपको इग्नोर करनी पड़ेगी. एडिटिंग और कहानी की पेस बेहतर हो सकती थी. मगर अपनी कमियों के बावजूद राजा शिवाजी अपनी कहानी के लिए देखी जा सकती है.