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संसद से खेल के मैदान तक, योग-कारोबार-संस्कृति से अलग पहचान... इस छोटे से देश में बसा 'मिनी इंडिया'

न्यूजीलैंड में भारतीय समुदाय अब सिर्फ प्रवासी नहीं, बल्कि देश की राजनीति, क्रिकेट, कारोबार और संस्कृति का मजबूत हिस्सा बन चुका है. करीब 40 साल बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब दोनों देशों के रिश्तों के साथ वहां बसे तीन लाख से ज्यादा भारतीयों की भूमिका भी लगातार मजबूत होती जा रही है.

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पीएम मोदी पहली बार न्यूजीलैंड दौरे पर गए हैं. (Photo- ITG)
पीएम मोदी पहली बार न्यूजीलैंड दौरे पर गए हैं. (Photo- ITG)

करीब 40 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने न्यूजीलैंड की धरती पर कदम रखा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह दौरा सिर्फ एक राजनयिक यात्रा नहीं है. यह उस देश की कहानी भी है, जहां भारत की संस्कृति, प्रतिभा और मेहनत ने अपनी अलग पहचान बना ली है. कभी गिने-चुने भारतीयों वाला न्यूजीलैंड आज तीन लाख से ज्यादा भारतीय मूल के लोगों का घर बन चुका है. यही वजह है कि आज कई लोग न्यूजीलैंड को प्यार से 'मिनी इंडिया' भी कहने लगे हैं.

अगर आप न्यूजीलैंड के सबसे बड़े शहर ऑकलैंड की सड़कों पर निकलें, तो कई बार ऐसा महसूस होगा जैसे आप किसी भारतीय शहर में घूम रहे हों. भारतीय रेस्टोरेंट, मंदिर, गुरुद्वारे, मसालों की दुकानें, बॉलीवुड संगीत और हिंदी-पंजाबी बोलते लोग यहां आम बात हैं. करीब 53 लाख की आबादी वाले इस देश में हर 17वां व्यक्ति भारतीय मूल का है. भारतीय समुदाय यहां सबसे तेजी से बढ़ने वाला प्रवासी समुदाय बन चुका है.

क्रिकेट में भारतीयों की नई पहचान

न्यूजीलैंड में भारतीयों का सबसे बड़ा असर क्रिकेट के मैदान पर दिखाई देता है. कभी अंग्रेजों की विरासत माना जाने वाला यह खेल अब भारतीय प्रतिभाओं से भरता जा रहा है.

आज न्यूजीलैंड टीम की सबसे बड़ी पहचान बन चुके रचिन रविंद्र भारतीय मूल के परिवार से आते हैं. उनका नाम भी राहुल द्रविड़ और सचिन तेंदुलकर के नामों को जोड़कर रखा गया था. पंजाब के लुधियाना में जन्मे ईश सोढ़ी कई सालों से न्यूजीलैंड की स्पिन गेंदबाजी संभाल रहे हैं. तमिलनाडु के वेल्लोर में जन्मे आदित्य अशोक नई पीढ़ी के उभरते सितारे हैं. वहीं विजयवाड़ा के रहने वाले स्नेहित रेड्डी जैसे युवा खिलाड़ी भविष्य की उम्मीद माने जा रहे हैं. यानी न्यूजीलैंड क्रिकेट की नई पीढ़ी में भारतीय जड़ों का प्रभाव साफ दिखाई देता है.

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संसद में भी बढ़ रहा भारतीयों का दबदबा

भारतीय समुदाय अब सिर्फ खेल तक सीमित नहीं है. न्यूजीलैंड की राजनीति में भी उसकी मजबूत मौजूदगी दिखाई देती है. भारतीय मूल की प्रियंका राधाकृष्णन न्यूजीलैंड की पहली भारतीय मूल की कैबिनेट मंत्री बनीं. उन्होंने महिलाओं, प्रवासियों और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों पर अपनी अलग पहचान बनाई.

ACT पार्टी की सांसद डॉ. परमजीत कौर परमार भारत और न्यूजीलैंड के बीच आर्थिक सहयोग की मजबूत समर्थक रही हैं. आज लेबर और नेशनल जैसी बड़ी पार्टियां भी भारतीय मूल के उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतार रही हैं. इसका कारण साफ है. भारतीय समुदाय अब एक प्रभावशाली राजनीतिक ताकत बन चुका है.

बिहार से लेकर पंजाब तक की संस्कृति बसती है यहां

पहले न्यूजीलैंड में गुजराती और पंजाबी समुदाय की संख्या ज्यादा थी. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और दक्षिण भारत से भी बड़ी संख्या में लोग यहां आकर बसे हैं. इसी दौरान बिहार-झारखंड एसोसिएशन ऑफ न्यूजीलैंड यानी BJANZ की स्थापना हुई. यह संगठन आज भारतीय संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का बड़ा काम कर रहा है.

ऑकलैंड के माउंट वेलिंगटन में हर साल छठ महापर्व पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है. श्रद्धालु पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते हैं. भोजपुरी और मैथिली के लोकगीत गूंजते हैं. ठेकुआ की खुशबू पूरे माहौल को बिहार की याद दिला देती है. सिर्फ छठ ही नहीं, होली, दीपावली, बैसाखी, नवरात्रि और ईद जैसे त्योहार भी बड़े स्तर पर मनाए जाते हैं.

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भारतीय संस्कृति और माओरी परंपरा का अनोखा संगम

न्यूजीलैंड की सबसे खास बात यह है कि भारतीय समुदाय अपनी संस्कृति को स्थानीय परंपराओं के साथ जोड़कर आगे बढ़ा रहा है. BJANZ अपने कई कार्यक्रम माओरी समुदाय के पारंपरिक नववर्ष मातारिकी के साथ आयोजित करता है. उनका संदेश है, "One Sky, Many Traditions." यानी एक आसमान, अनेक परंपराएं. यही वजह है कि भारतीय और माओरी समुदायों के बीच सांस्कृतिक रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं.

भारतीय संस्कृति का सबसे बड़ा प्रभाव योग के जरिए भी दिखाई देता है. हर साल अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर न्यूजीलैंड के अलग-अलग शहरों में हजारों लोग एक साथ योग करते हैं. इन कार्यक्रमों में भारतीयों के साथ स्थानीय नागरिक, सांसद, मेयर और माओरी समुदाय के लोग भी शामिल होते हैं. योग अब यहां सिर्फ फिटनेस नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और बेहतर जीवनशैली का हिस्सा बन चुका है.

कारोबार में भी भारतीय सबसे आगे

भारतीय समुदाय न्यूजीलैंड की अर्थव्यवस्था में भी तेजी से अपनी पहचान बना रहा है. आज हजारों भारतीय आईटी, हेल्थकेयर, इंजीनियरिंग, बैंकिंग और शिक्षा क्षेत्र में काम कर रहे हैं. बड़ी संख्या में भारतीय सुपरमार्केट, डेयरी स्टोर, होटल, रेस्टोरेंट, ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स कंपनियां चला रहे हैं. ऑकलैंड और हैमिल्टन जैसे शहरों में भारतीय बाजार पूरी तरह विकसित हो चुके हैं. यहां भारतीय मसालों से लेकर मिठाइयों और पारंपरिक कपड़ों तक सब कुछ आसानी से मिल जाता है.

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पीएम मोदी का दौरा क्यों है खास?

करीब चार दशक बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का न्यूजीलैंड दौरा दोनों देशों के रिश्तों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापार, कृषि, डेयरी, शिक्षा, डिजिटल टेक्नोलॉजी, रक्षा और इंडो-पैसिफिक सहयोग लगातार बढ़ रहा है. ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह दौरा रणनीतिक और आर्थिक दोनों नजरिए से अहम माना जा रहा है. साथ ही यह यात्रा न्यूजीलैंड में बसे तीन लाख से ज्यादा भारतीय मूल के लोगों के लिए भी गर्व का पल है.

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