कॉमेडी की आस में जनता को बॉलीवुड के एक ही डायरेक्टर का नाम तुरंत याद आता है— प्रियदर्शन. बॉलीवुड स्टार अक्षय कुमार के साथ प्रियदर्शन की जोड़ी ने ऐसी फिल्में दी हैं जो कभी भी, किसी भी पॉइंट से शुरू की जा सकती हैं, मगर इनका मजा कभी कम नहीं होता. लंबे समय से चल रहा दमदार कॉमेडी फिल्मों का सूखा दूर करने के लिए ये जोड़ी 16 साल बाद नई फिल्म भूत बंगला लेकर आ रही है. लेकिन क्या प्रियदर्शन की कॉमेडी सिर्फ अक्षय के साथ आ जाने से ज्यादा दमदार हो जाती है? शायद नहीं.
प्रियदर्शन ने ऐसी भी यादगार कॉमेडी फिल्में की हैं, जिनमें अक्षय कुमार नहीं थे, पर कॉमेडी फिर भी बहुत असरदार थी. क्योंकि प्रियदर्शन की कॉमेडी सिर्फ उनके हीरो की कहानी पर नहीं, कन्फ्यूजन से भरी अफरातफरी पर डिपेंड करती है. उनके सपोर्टिंग किरदार इस अफरातफरी के असली एजेंट होते हैं. और इन एजेंट्स के रोल में प्रियदर्शन ने दमदार एक्टर्स की एक तिकड़ी को खूब यूज किया है— परेश रावल, असरानी और राजपाल यादव.
इस संसार से विदा ले चुके असरानी, भूत बंगला में आखिरी बार इस तिकड़ी का हिस्सा बनेंगे. लेकिन इस तिकड़ी को आखिरी बार स्क्रीन पर देखने के साथ, प्रियदर्शन की फिल्मों में इनके योगदान पर बात नहीं की, तो फिर काहे का बॉलीवुड प्रेम!
प्रियदर्शन की अफरातफरी के फेवरेट एजेंट्स
अपनी कॉमेडी फिल्मों में प्रियदर्शन ने 'कॉमेडी ऑफ एरर' यानी कन्फ्यूजन से कॉमेडी वाला स्टाइल ही ज्यादा इस्तेमाल किया है. उनके 'लूजर' टाइप लीड किरदारों के दरवाजे पर किस्मत दस्तक दे रही है, लेकिन बस पहचान नकली बनानी पड़ेगी.
पैसे से कंगाल तीन साथी तभी अमीर बन सकते हैं अगर वो पहले रईस देवीप्रसाद बनने की हेराफेरी (2000) करें. मालामाल वीकली का कंगाल गांव, किसी तरह मरे हुए एंथनी भाई का लॉटरी टिकट कैश करवा ले तो मजे ही मजे! एक अंजलि ने रईस बाप की बेटी होने का नाटक किया, तो राधेश्याम तिवारी के घर जमकर हंगामा (2003) हुआ. दूसरी अंजलि ने अपने गांव का नाम छुपाया, तो दो पावरफुल परिवारों में हलचल (2004) मच गई. और तीसरी अंजलि के अचानक गायब होने से चंपक चतुर्वेदी की नाटक मंडली को इंग्लैंड में भागमभाग (2006) करनी पड़ गई.
प्रियदर्शन के कॉमेडी फॉर्मूले से थोड़ी अलग लगने वाली भूल भुलैया (2007) में भी सारा बवाल पहचान का ही था. बचपन के ट्रॉमा से जूझती अवनी ने मंजूलिका से ऐसा रिलेट किया कि महल के बाशिंदे कोमा में जाने वाले थे! प्रियदर्शन की कॉमेडी में पहचान का ये कन्फ्यूजन ऐसी सिचुएशन में पहुंच जाता है, जहां लोगों का सहज बर्ताव भी कॉमेडी की वजह बनने लगता है. और इस अफरातफरी के असली एजेंट होते हैं उनके सपोर्टिंग किरदार.
ये दिखाने के लिए प्रियदर्शन को हमेशा ऐसे हुनरमंद कलाकारों की जरूरत रही, जो सहजता और कॉमेडी का परफेक्ट बैलेंस तो ले ही आएं. साथ में किरदारों को रिलेटेबल बनाने के साथ-साथ, रैंडम सिचुएशन को टॉप क्लास कॉमेडी में बदलने का हुनर जानते हों. इस काम में प्रियदर्शन ने अलग-अलग कॉम्बिनेशन में कुछ एक्टर्स के साथ खूब काम किया— अमरीश पुरी, ओम पुरी, परेश रावल, असरानी और राजपाल यादव. इनके साथ शक्ति कपूर, मनोज जोशी और सुनील शेट्टी को भी प्रियदर्शन ने खूब इस्तेमाल किया. पर परेश, असरानी और राजपाल की तिकड़ी प्रियदर्शन की फेवरेट बनी रही.
प्रियदर्शन की फेवरेट तिकड़ी
1992 में मुस्कुराहट से डेब्यू करने वाले प्रियदर्शन ने कुल 26 हिंदी फिल्में डायरेक्ट की हैं. इनमें से केवल दो फिल्में ऐसी हैं, जब उन्होंने अपने फेवरेट 5 सपोर्टिंग स्टार्स में से किसी को नहीं लिया— बम बम भोले (2010) और तेज़ (2012). बाकी 24 में से 16 फिल्मों में नजर आए परेश रावल, प्रियदर्शन के साथ (हिंदी में) सबसे ज़्यादा काम करने वाले एक्टर हैं.
असरानी ने प्रियदर्शन के साथ कुल 15 फिल्में की हैं. 2004 से 2007 तक, 4 सालों में प्रियदर्शन ने लगातार 8 फिल्मों में असरानी को रिपीट किया. इस तिकड़ी में से राजपाल यादव ने प्रियदर्शन के साथ सबसे कम, 14 फिल्में की हैं. लेकिन 2006 से 2010 तक प्रियदर्शन ने सबसे ज्यादा, लगातार 9 बार राजपाल को रिपीट किया.
परेश-असरानी, असरानी-राजपाल और परेश-राजपाल की जोड़ी प्रियदर्शन ने 10 बार रिपीट की है. बतौर तिकड़ी परेश, असरानी और राजपाल ने प्रियदर्शन के साथ 7 फिल्में की हैं. इस तिकड़ी ने अक्षय के साथ प्रियदर्शन की 4 फिल्में की हैं और चारों जनता की फेवरेट हैं— गरम मसाला, भागमभाग, भूल भुलैया और दे दना दन. अक्षय के बिना भी इस तिकड़ी ने प्रियदर्शन के साथ 3 फिल्में कीं, मगर कॉमेडी का लेवल तगड़ा ही रहा— मालामाल वीकली, चुप चुप के और कमाल धमाल मालामाल.
प्रियदर्शन के साथ परेश-असरानी-राजपाल की तिकड़ी का काम सिर्फ शानदार आंकड़ा नहीं है. इन तीनों के सीन्स से प्रियदर्शन ने अपनी कहानियों में वो माहौल बुना, जो कॉमेडी की वजह बना. फिल्म का लीड किरदार स्क्रीन पर हो या न हो, इन तीनों ने आपको सीन्स में बांधे रखा. और इन तीनों के किरदार बिना फनी होने की कोशिश किए बस एक आम आदमी की तरह बर्ताव करते रहे. कोशिश का न दिखना ही इस तिकड़ी के काम का सबसे बड़ा सबूत है.
अपने शानदार काम के लिए आइकॉन बन चुके असरानी ने पिछले साल इस संसार से विदा ली थी. ये एक खूबसूरत संयोग ही है कि असरानी की आखिरी फिल्म भूत बंगला, प्रियदर्शन के साथ है. प्रियदर्शन ने ही अपनी बेहतरीन कॉमेडी फिल्मों से, बॉलीवुड फैन्स की एक पूरी नई जेनरेशन को असरानी की मुस्कुराती सूरत याद करवाई है.
भूत बंगला, प्रियदर्शन के साथ परेश-असरानी-राजपाल की तिकड़ी के लिए 8वीं और आखिरी फिल्म होगी. शुक्रवार, 17 अप्रैल को ये फिल्म रिलीज हो रही है. और बॉलीवुड फैन्स सिर्फ प्रियदर्शन और अक्षय के ही नहीं, परेश रावल, असरानी और राजपाल यादव के रीयूनियन के लिए भी भूत बंगला का इंतजार कर रहे हैं. देखते हैं, प्रियदर्शन इस तिकड़ी से इस बार क्या तिकड़मबाजी करवाते हैं!