महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव में आज मतगणना का दिन है. वोटों की गिनती अभी जारी है. बीएमसी में बीजेपी और शिवसेना शिंदे गुट का गठबंधन 115 सीटों पर आगे चल रहा है. वहीं ठाकरे बंधुओं और एनसीपी-एसपी का अलायंस 82 सीटों पर आगे है. इस चुनाव में पहली बार बीएमसी की सत्ता बीजेपी के हाथों में जाती दिख रही है. लिहाजा ठाकरे ब्रांड पर सवाल उठ रहे हैं.
Axis My India के एमडी प्रदीप गुप्ता से ठाकरे ब्रदर्स को लेकर सवाल पूछा गया. सवाल था कि, क्या आज यह कहा जा सकता है कि शिवसेना (यूबीटी) और MNS ने साथ में आकर मराठी बहुल इलाकों में अपनी साख बचा ली है.
'हार हुई लेकिन वजूद पर सवाल नहीं उठा सकते'
प्रदीप गुप्ता ने जवाब दिया, 'ठाकरे बंधु मराठी बहुल इलाकों में, खासकर ग्रेटर मुंबई में अपनी साख बचाने में कामयाब हुए हैं. पिछले चुनाव में शिवसेना को 84 सीटें मिली थीं. अब उसमें माइनस शिंदे और प्लस MNS हो चुका है. यूबीटी+ के 80 के आंकड़े को छोड़िए. दोनों भाइयों का आंकड़ा 72 का है. अगर दोनों भाई 72 सीटें भी जीत पा रहे हैं तो यह अच्छा संकेत है. हार तो हुई है लेकिन इतनी भी खराब नहीं कि हम उनके वजूद या अस्तित्व पर सवाल उठाएं.'
पहली बार BMC में होगा बीजेपी का मेयर
बीएमसी में बीजेपी 88, शिवसेना 27, शिवसेना उद्धव गुट 72, एनसीपी 4, एनसीपी-एसपी 2, कांग्रेस 15, मनसे 8, वीबीए 1 और अन्य 9 सीटों पर आगे चल रहे हैं. राज्य के 29 नगर निगमों में से 23 में बीजेपी के नेतृत्व वाला गठबंधन बढ़त बनाए हुए है. मुंबई, पुणे, नागपुर और नासिक जैसे बड़े शहरों में गठबंधन को साफ बढ़त मिली है.
खास तौर पर मुंबई में बीजेपी ने मजबूत प्रदर्शन करते हुए नगर निगम पर अपना दबदबा कायम किया है और 45 साल में पहली बार बीएमसी में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. इसके साथ ही बीजेपी पहली बार मुंबई में अपना मेयर बनाने की स्थिति में पहुंच गई है, क्योंकि बीएमसी के इतिहास में अब तक पार्टी का कोई भी नेता मेयर नहीं बन सका था.