देश में आगामी लोकसभा चुनावों के मद्देनजर राजनीतिक लामबंदी तेज हो गई है. राजस्थान में भी विधानसभा चुनाव के बाद आम चुनावों को लेकर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी में बैठकों का दौर जारी है. विधानसभा चुनाव में मिली जीत से उत्साहित कांग्रेस टारगेट-25 की रणनीति पर काम कर रही है. तो वहीं पिछले चुनाव में राज्य की सभी सीटें जीतने वाली बीजेपी के सामने अपना प्रदर्शन दोहराने की चुनौती है.
राजस्थान का हाड़ौती क्षेत्र यानी कोटा संभाग शुरू से ही आरएसएस-जनसंघ और बाद में बीजेपी का गढ़ रहा है. लेकिन यहां की सबसे हाईप्रोफाइल सीट झालावाड़-बारां लोकसभा क्षेत्र है. क्योंकि यह पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का गृह क्षेत्र है और वर्तमान में राजे के पुत्र दुष्यंत सिंह यहां से सांसद हैं. राजस्थान में बीजेपी की राजनीति में एकछत्र राज करने वाली वसुंधरा राजे के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद उन्हें केंद्रीय नेतृत्व में जिम्मेदारी दी गई. वसुंधरा राजे के साथ पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और रमन सिंह को बीजेपी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है.
राजनीतिक पृष्ठभूमि
आजादी के बाद यह सीट सिर्फ झालावाड़ थी, लेकिन 2008 के परिसीमन में झालावाड़ जिले की 4 और बारां जिले की 4 विधानसभा सीटों को मिलाकर झालावाड़ा-बारां संसदीय क्षेत्र का गठन किया गया. यहां अब तक हुए कुल 16 लोकसभा चुनाव में सबसे ज्यादा बीजेपी ने 8 बार जीत दर्ज की. 1989 से लगातार इस सीट पर बीजेपी का कब्जा है. वहीं कांग्रेस ने 4 बार, भारतीय जनसंघ ने 2 बार, भारतीय लोकदल ने 1 बार और जनता पार्टी ने 1 बार इस सीट पर कब्जा जमाया.
आजादी के बाद हुए पहले चुनाव में झालावाड़ से कांग्रेस के नेमीचंद कासलीवाल जीते थें, इसके बाद 1957 में कांग्रेस के ओंकारलाल यहां से सांसद बनें. 1962 के चुनाव में कांग्रेस के कोटा राजघराने के महाराव बृजराज सिंह सांसद चुने गए. वहीं 1967 और 1971 का चुनाव भी बृजराज सिंह ही जीते लेकिन भारतीय जनसंघ के उम्मीदवार के तौर पर. 1977 की जनता लहर में जब भारतीय जनसंघ का जनता पार्टी में विलय हो गया तब बृजराज सिंह एक बार फिर कांग्रेस में शामिल हुए लेकिन वे 1977 और 1980 का चुनाव पहले बीएलडी और बाद में जनता पार्टी के उम्मीदवार चतुर्भुज नागर से हार गए. लेकिन 1984 में कांग्रेस ने इस सीट पर वापसी की और जूझार सिंह यहां से सांसद बनें. इसके बाद 1989 से 1999 तक लगातार 5 बार वसुंधरा राजे यहां से सांसद बनीं. तो वहीं राज्य की राजनीति में राजे की एंट्री के बाद 2004 से 2014 तब लगातार 3 बार से वसुंधरा राजे के बेटे दुष्यंत सिंह यहां से सांसद हैं.
सामाजिक ताना-बाना
झालावाड़-बारां संसदीय सीट झालावाड़ और बारां जिले को मिलाकर बनाई गई है. यह लोकसभा क्षेत्र राजस्थान के कोटा संभाग के अंतर्गत आता है. राजस्थान का यह इलाका कृषि के लिहाज से बेहद उपजाऊ है, इसलिए यहां की बड़ी आबादी कृषि पर आधारित है. कृषि पर आधारित होने के कारण यह इलाका हाल में हुए किसान आंदोलनों का भी गवाह बना. साल 2011 की जनगणना के मुताबिक यहां कि आबादी 26,34,085 है जिसका 81.64 प्रतिशत हिस्सा शहरी और 18.36 प्रतिशत शहरी है. वहीं कुल आबादी का 17.65 फीसदी अनुसूचित जाति और 17.43 फीसदी अनुसूचित जनजाति हैं. साल 2014 लोकसभा चुनाव के आंकड़ों के मुताबिक इस सीट पर मतदाताओं की संख्या 16,69,842 है जिसमें 8,68,977 पुरुष और 8,00,865 महिला मतदाता हैं.
जातिगत आधार पर देखा जाए तो झालावाड़-बारां सीट पर गुर्जरों का खासा प्रभाव है, इसके बाद अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, जैन और मुस्लिम समुदायों का वोट निर्णायक माना जाता हैं.
झालावाड़-बारां के अंतर्गत आने वाली 8 विधानसभा सीटों पर हाल में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने 5 सीटों पर कब्जा जमाया. जबकि कांग्रेस 3 सीट जीतने में कामयाब रही. बीजेपी ने इस चुनाव में झालावाड़ जिले की चारो सीट-डग, झालरापाटन, खानपुर और मनोहर थाना और बारां जिले की छबड़ा सीट पर कब्जा जमाया. वहीं कांग्रेस के खाते में बारां जिले की अंता, किशनगंज और बारां-अटरू आईं.
2014 का जनादेश
साल 2014 के लोकसभा चुनाव में झालावाड़-बारां सीट पर 67.5 फीसदी वोटिंग हुई थी. जिसमें बीजेपी को 59 फीसदी और कांग्रेस को 34.4 फीसदी वोट मिले थें. इस चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के बेटे दुष्यंत सिंह ने लगातार तीसरी बार जीत दर्ज करते हुए कांग्रेस के प्रमोज जैन भाया को 2,81,546 मतों के भारी अंतर से पराजित किया. बीजेपी से दुष्यंत सिंह को 6,76,102 और कांग्रेस के प्रमोद जैन भाया को 3,94,556 वोट मिले थे.
सांसद का रिपोर्ट कार्ड
झालावाड़-बारां संसदीय क्षेत्र के सांसद दुष्यंत सिंह का जन्म 11 सितंबर 1973 में मुंबई में हुआ. दुष्यंत ने स्नातक की शिक्षा दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज से की. ईसके बाद होटल मैनेजमेंट में स्नात्कोत्तर की डिग्री अमेरिका से प्राप्त की. दिसंबर 2000 में सिंह का निहारिका राजे से विवाह हुआ.
झारावाड़-बारां सांसद दुष्यंत सिंह की संसद में 75.14 फीसदी मौजूदगी रही, इस दौरान उन्होंने 252 सवाल पूछे और 34 बहस में हिस्सा लिया. अपने कार्यकाल में दुष्यंत सिंह ने 1 प्राइवेट मेंबर बिल पेश किया. सांसद विकास निधि की बात की जाय तो दुष्यंत सिंह ने अपने कुल आवंटित धन का 69.84 फीसदी क्षेत्र के विकास पर खर्च किया.