महाराष्ट्र की जालना लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी दानवे रावसाहेब दादाराव ने एक बार फिर से शानदार जीत दर्ज की है. उन्होंने कांग्रेस पार्टी के औताडे विलास केशवराव को 332815 वोटों के अंतर से धूल चटाई. इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के दानवे रावसाहेब दादाराव को 698019 वोट मिले, जबकि कांग्रेस पार्टी के औताडे विलास केशवराव को सिर्फ 365204 वोट प्राप्त हुए.
जालना लोकसभा सीट पर 23 अप्रैल को तीसरे चरण में वोट डाले गए थे. इस सीट से 20 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमाने के लिए चुनाव मैदान में उतरे थे.
चुनाव आयोग के मुताबिक इस बार जालना लोकसभा सीट पर 64.55 फीसदी मतदान दर्ज किया गया था, जबकि साल 2014 में यहां 66.15 प्रतिशत वोटिंग रिकॉर्ड की गई थी. इस संसदीय क्षेत्र में कुल 18 लाख 65 हजार 046 मतदाता पंजीकृत हैं, लेकिन कुल 12 लाख 03 हजार 822 वोटरों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था.
कौन-कौन प्रत्याशी थे चुनाव मैदान में
महाराष्ट्र की जालना संसदीय सीट से कुल 20 उम्मीदवार चुनावी मैदान में थे. हालांकि जीत भारतीय जनता पार्टी के दानवे रावसाहेब दादाराव की हुई, जबकि कांग्रेस के औताडे विलास केशवराव दूसरे स्थान पर रहे. उनको हार का सामना करना पड़ा. दानवे रावसाहेब पिछली बार भी लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे.
इसके अलावा बहुजन समाज पार्टी से महेंद्र कचरु सोनवणे को टिकट मिला था. वंचित बहुजन आघाड़ी से शरदचंद्र वानखेड़े और बहुजन मुक्ति पार्टी से फिरोज अली चुनाव लड़े थे. इनके अलावा 10 निर्दलीय प्रत्याशी भी चुनाव मैदान में थे.
पिछली बार भी दानवे रावसाहेब जीते
साल 2014 के लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र की जालना लोकसभा सीट से बीजेपी के दानवे रावसाहेब ने कांग्रेस के औताड़े विलास केशवराव को हराया था. राव साहेब दानवे को 5 लाख 91 हजार 428 वोट मिले थे, तो वहीं विलास केशवराव को 3 लाख 84 हजार 630 वोट मिले थे. 2014 के चुनाव में जालना सीट पर नंबर 2 पर कांग्रेस और नंबर 3 पर बसपा रही थी.
बता दें कि जालना लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के मौजूदा सांसद रावसाहेब दानवे के लिए साल 2019 में जीत का सिलसिला जारी रखना बड़ी चुनौती है क्योंकि इस बार कांग्रेस इस संसदीय क्षेत्र में पानी की कमी और कृषि जैसे मुद्दों के जरिए जनता पर प्रभाव जमाने और अपनी किस्मत चमकाने की पूरी कोशिश की.
राजनीतिक पृष्ठभूमि
महाराष्ट्र की जालना लोकसभा सीट बीजेपी का गढ़ है, महाराष्ट्र बीजेपी के अध्यक्ष दानवे 1999 से ही जालना संसदीय क्षेत्र से जीत हासिल करते रहे हैं जबकि कांग्रेस के उम्मीदवार औताडे ने जालना सीट से 1991 में आखिरी बार चुनाव जीता था. ऐसे में एक बार कांग्रेस और बीजेपी के बीच कांटे की टक्कर मानी जा रही है.
बता दें कि जालना संसदीय क्षेत्र में 6 विधानसभा सीटें आती हैं, जिनमें पैठण और जालना में शिवसेना का कब्जा है. जबकि बद्नापुर, भोकरदन, फुलंब्री विधानसभा सीटों पर बीजेपी और सिल्लोड में कांग्रेस का राज है.
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