गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार को तीन बड़े पावर बूस्टर मिल गए हैं, जिसका इस्तेमाल अब बीजेपी विपक्ष पर पलटवार करने के लिए कर रही है. अभी तक आर्थिक सुधारों में विफलता को लेकर विपक्ष लगातार मोदी सरकार को घेरता रहा है. हाल के दिनों में कांग्रेस नोटबंदी और जीएसटी को लेकर बीजेपी पर काफी हमलावर दिखी है.
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी, तो जीएसटी को 'गब्बर सिंह टैक्स' तक बता चुके हैं. नोटबंदी को लेकर वो कह चुके हैं कि मोदी सरकार ने इसके जरिए लोगों को कैशलेस कर दिया है. इनके जरिए कांग्रेस मोदी सरकार के विकास के दावों को भी पूरी तरह से नकार चुकी है, लेकिन विश्व बैंक के ईज ऑफ डूइंग बिजनेस इंडेक्स में भारत की 30 पायदान की लंबी छलांग, अमेरिका की रेटिंग एजेंसी मूडीज़ द्वारा भारत की क्रेडिट रेटिंग में सुधार और अमेरिकी थिंक टैंक पिउ रिसर्च सेंटर के सर्वे में मोदी को सबसे लोकप्रियता नेता बताने के बाद से बीजेपी को बड़ी राहत मिली है.
खासकर गुजरात जैसे अहम प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मोदी सरकार के आर्थिक सुधार की सराहना ने बीजेपी को कांग्रेस से निपटने के लिए तीन हथियार दे दिए हैं. इससे जहां एक ओर बीजेपी के चुनावी अभियान को मजबूती मिली है, तो दूसरी ओर कांग्रेस को झटका लगा है. इनको बीजेपी के लिए पावर बूस्टर के रूप में देखा जा रहा है. दिलचस्प बात ये है कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस इंडेक्स में भारत की लंबी छलांग, मू़डीज द्वारा भारत की क्रेडिट रेटिंग में सुधार की खबर और मोदी की लोकप्रियता को लेकर पिउ रिसर्च का सर्वे पिछले एक पखवाड़े में आया है.
बीजेपी को मिले ये तीन पावर बूस्टर
1. मूडीज़ ने भारत की क्रेडिट रेटिंग बढ़ाई
नरेंद्र मोदी सरकार अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए लगातार कड़े फैसले ले रही है. देश में भले ही इन फैसलों को विरोध होता हो, लेकिन दुनिया की कई एजेंसियां इन फैसलों की तारीफ कर रही हैं. है. भारत अब BAA3 ग्रुप से उठकर BAA2 ग्रुप में आ गया है.
Moody's believes that the Government's reforms will improve business climate, enhance productivity, stimulate foreign and domestic investment, and ultimately foster strong and sustainable growth.
— PMO India (@PMOIndia)
मूडीज़ की इस रैंकिंग में सुधार की वजह मोदी सरकार द्वारा किए जा रहे आर्थिक और सांस्थानिक सुधार हैं. इस रेटिंग में करीब 13 साल बाद बदलाव हुआ है, इससे पहले 2004 में भारत की रेटिंग BAA3 थी. इससे पहले 2015 में रेंटिंग को स्टेबल से पॉजिटिव की कैटेगरी में रखा गया था.
Moody's believes that Modi Govt’s reforms will improve the business climate, enhance productivity, attract more investment & put India on a higher growth trajectory.
— Amit Shah (@AmitShah)
2. ईज ऑफ डूइंग बिजनेस इंडेक्स में भारत की लंबी छलांग
नोटबंदी और जीएसटी लागू होने के बाद भारत की अर्थव्यवस्था की रफ्तार को लेकर चिंताजनक रुझानों के बीच विश्व बैंक की रिपोर्ट अच्छी खबर लेकर आई. के साथ 100वें स्थान पर पहुंच गया है. यह पहली बार है, जब भारत ने इतनी लंबी छलागं लगाई है. अगर विशेषज्ञों की माने तो कारोबार करने के मामले में भारत की रैंकिंग में सुधार से कई क्षेत्र को लाभ होगा.
Historic jump in ‘Ease of Doing Business’ rankings is the outcome of the all-round & multi-sectoral reform push of Team India.
— Narendra Modi (@narendramodi)
अमेरिका-इंडिया बिजनेस काउंसिल (यूएसआईबीसी) की नई अध्यक्ष निशा देसाई बिस्वाल ने विश्व बैंक की कारोबार सुगमता रैंकिंग में भारत की स्थिति बेहतर होने को अहम करार दिया. उन्होंने कहा कि इससे भारत को और अधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आकर्षित करने में मदद मिलेगी. विश्व बैंक ने अपनी वार्षिक कारोबार सुगमता रिपोर्ट में 190 देशों के बीच भारत को 100वें पायदान पर जगह दी है. पिछले साल भारत इस इंडेक्स में 130वें स्थान पर था.
3. पिउ के सर्वे में मोदी सबसे लोकप्रिय राजनीतिक हस्ती
अमेरिकी थिंक टैंक प्यू रिसर्च सेंटर द्वारा करवाए गए सर्वे के मुताबिक हैं. इस सर्वे में करीब 2,464 लोगों को शामिल किया गया था. इस साल 21 फरवरी से 10 मार्च के बीच किए गए सर्वे के अनुसार 88 प्रतिशत लोगों ने मोदी को सबसे लोकप्रिय हस्ती माना.
इस सूची में हालांकि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी 58 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर काबिज होने में सफल रहे. भारतीय राजनीति में सबसे लोकप्रिय हस्तियों की सूची में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी (57 प्रतिशत) तीसरे और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (39 प्रतिशत) चौथे स्थान पर रहे.
प्यू रिसर्च ने अपने इस सर्वे रिपोर्ट में कहा है, "जनता द्वारा मोदी का सकारात्मक आकलन भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर बढ़ती संतुष्टि से प्रेरित है. हर 10 में से 8 लोगों ने कहा कि आर्थिक दशाएं अच्छी हैं. ऐसा महसूस करने वाले लोगों में 2014 के चुनाव के ठीक पहले से 19 प्रतिशत की वृद्धि हुई है."