ऊंचाहार उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले का एक कस्बा और ऊंचाहार तहसील का मुख्यालय है. यहां नगर पंचायत है और यह लखनऊ-प्रयागराज राजमार्ग पर स्थित है, जो रायबरेली शहर से लगभग 38 किलोमीटर दूर है. गंगा नदी कस्बे से लगभग 7 किलोमीटर की दूरी पर बहती है. ऊंचाहार सड़क और रेल मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है और ऊंचाहार जंक्शन जिले का एक महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन है.
2008 के परिसीमन अभ्यास के तहत गठित ऊंचाहार एक सामान्य, अनारक्षित विधानसभा क्षेत्र है और रायबरेली लोकसभा सीट के पांच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है. इसमें पूरी ऊंचाहार तहसील और डलमऊ तहसील का कानूनगो सर्किल डलमऊ पूर्व शामिल है. यह विधानसभा क्षेत्र मुख्य रूप से ग्रामीण है और इसकी केवल 2.31 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में रहती है. नए विधानसभा क्षेत्र में उस अधिकांश क्षेत्र को शामिल किया गया, जो पहले डलमऊ विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा था. परिसीमन के बाद डलमऊ विधानसभा क्षेत्र का अस्तित्व समाप्त हो गया.
नया विधानसभा क्षेत्र होने के कारण ऊंचाहार में अब तक केवल तीन विधानसभा चुनाव हुए हैं और तीनों में समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की है. तीनों जीत मनोज कुमार पांडे के नाम रही हैं, जो अब भाजपा के नेता और योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं. राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के बाद पांडे ने समाजवादी पार्टी से बगावत की और मई 2024 में औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल हो गए. समाजवादी पार्टी ने जून 2025 में उन्हें निष्कासित कर दिया. मई 2026 में उन्हें उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल में शामिल किया गया और बाद में उन्हें खाद्य एवं रसद विभाग दिया गया.
2012 में पांडे ने बहुजन समाज पार्टी के उत्कृष्ठ मौर्य को 2,582 मतों से हराया था. कांग्रेस तीसरे और भाजपा पांचवें स्थान पर रही थी. पांडे ने 2017 में भी सीट बरकरार रखी, जब भाजपा ने बसपा की जगह मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में चुनाव लड़ा. बसपा से भाजपा में आए उत्कृष्ठ मौर्य ने एक बार फिर पांडे के खिलाफ चुनाव लड़ा, लेकिन 1,934 मतों से हार गए. बसपा तीसरे और कांग्रेस चौथे स्थान पर रही. 2022 में पांडे ने अपनी हैट्रिक पूरी की. उन्हें 82,514 वोट मिले, जबकि भाजपा के अमरपाल मौर्य को 75,893 वोट मिले. इस तरह समाजवादी पार्टी ने 6,621 मतों के अंतर से जीत दर्ज की.
विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी की लगातार जीत की तरह ऊंचाहार विधानसभा क्षेत्र में 2009 के बाद हुए चारों लोकसभा चुनावों में कांग्रेस ने बढ़त हासिल की है. अंतर यह है कि समाजवादी पार्टी की विधानसभा जीत अपेक्षाकृत कम अंतर से रही है, जबकि कांग्रेस ने आम तौर पर बड़े अंतर से बढ़त बनाई है. संसदीय चुनावों का मतदान पैटर्न रायबरेली के गांधी परिवार से लगातार जुड़े होने को दर्शाता है. 2009 में कांग्रेस ने बसपा पर 59,126 वोटों की बढ़त बनाई थी और 2014 में भाजपा पर उसकी बढ़त 65,096 वोट रही. 2019 में भाजपा पर कांग्रेस की बढ़त घटकर 27,204 वोट रह गई, लेकिन 2024 में इसमें काफी बढ़ोतरी हुई. कांग्रेस उम्मीदवार राहुल गांधी को 134,856 वोट मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार दिनेश प्रताप सिंह को 52,961 वोट मिले. इस तरह इस विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस की बढ़त 81,895 वोट रही.
कांग्रेस का मजबूत प्रदर्शन रायबरेली के गांधी परिवार से लगातार जुड़े होने से भी संबंधित है. सोनिया गांधी ने 2004 से 2019 तक संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था. इसके बाद राहुल गांधी ने 2024 में रायबरेली से चुनाव लड़ा. इससे पहले 2019 में अमेठी से हार के बाद उन्होंने रायबरेली से चुनाव लड़ा. हालांकि, लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मिलने वाली प्राथमिकता ऊंचाहार में विधानसभा स्तर पर उसी तरह की बढ़त में नहीं बदली है.
ऊंचाहार में गठन के बाद मतदाता आधार में लगातार वृद्धि हुई. 2012 में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 287,966 थी, जो 2017 में बढ़कर 325,371 हो गई. 2019 के लोकसभा चुनाव में यह संख्या 335,105 रही. 2022 के विधानसभा चुनाव में मतदाताओं की संख्या 339,863 थी और 2024 में यह 350,166 हो गई. 10 अप्रैल 2026 को विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में 314,276 मतदाता थे. यह 2024 में दर्ज 350,166 मतदाताओं की तुलना में 35,890 कम था, यानी 10.25 प्रतिशत की कमी हुई.
ऊंचाहार में मतदान प्रतिशत आम तौर पर ऊंचा रहा है, खासकर विधानसभा चुनावों में. 2012 में मतदान प्रतिशत 64.84 प्रतिशत और 2017 में 63.65 प्रतिशत रहा. 2019 के लोकसभा चुनाव में यह घटकर 57.14 प्रतिशत रह गया, जबकि 2022 के विधानसभा चुनाव में यह फिर बढ़कर 62.62 प्रतिशत हो गया. 2024 के लोकसभा चुनाव में यह फिर घटकर 57.15 प्रतिशत रह गया.
ऊंचाहार हिंदू बहुल विधानसभा क्षेत्र है और यहां अनुसूचित जाति की आबादी भी काफी है. अनुसूचित जाति की आबादी लगभग 30.73 प्रतिशत है. अनुमान के अनुसार मुस्लिम आबादी मतदाताओं में लगभग 8.6 प्रतिशत है. यहां प्रमुख समुदायों में पासी, यादव, मौर्य, ब्राह्मण, राजपूत, चमार, लोधी और कुर्मी शामिल हैं. पुराने अनुमानों में पासी आबादी लगभग 75,000, यादव 50,000, मौर्य 45,000, ब्राह्मण 30,000, राजपूत 26,000, चमार 25,000, लोधी 12,000 और कुर्मी 10,000 बताई गई थी. ऊंचाहार मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्र है और इसकी लगभग 97.69 प्रतिशत आबादी ग्रामीण इलाकों में रहती है, जबकि शेष 2.31 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में रहती है.
ऊंचाहार की पहचान कृषि, गंगा और बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बिजली संयंत्र से जुड़ी है, जिसने स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है. एनटीपीसी का फीरोज गांधी ऊंचाहार ताप विद्युत स्टेशन 1,050 मेगावाट की स्थापित क्षमता वाला संयंत्र है और जिले के सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक प्रतिष्ठानों में शामिल है. इसकी पांच 210 मेगावाट की इकाइयां 1988 से 2006 के बीच शुरू की गई थीं. संयंत्र को पानी की आपूर्ति शारदा सहायक नहर से होती है.
विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण हिस्सों में कृषि प्रमुख आर्थिक गतिविधि है. उपजाऊ जलोढ़ मैदानों में धान, गेहूं, दलहन और अन्य फसलों की खेती होती है. एनटीपीसी संयंत्र की मौजूदगी ने ऊंचाहार के आसपास औद्योगिक और सेवा क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दिया है. छोटे व्यापार, परिवहन, निर्माण और सरकारी सेवाएं भी स्थानीय अर्थव्यवस्था को सहारा देती हैं.
ऊंचाहार सड़क और रेल मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है. लखनऊ-प्रयागराज राजमार्ग इसका प्रमुख सड़क संपर्क है, जबकि ऊंचाहार जंक्शन क्षेत्र को रायबरेली, लखनऊ, प्रयागराज और अन्य शहरों से जोड़ता है. यह रेलवे स्टेशन वाराणसी-रायबरेली-लखनऊ और रायबरेली-प्रयागराज रेल मार्गों पर एक महत्वपूर्ण जंक्शन है. यह कस्बा रायबरेली से लगभग 38 किलोमीटर, प्रयागराज से 85 किलोमीटर और लखनऊ से लगभग 115 किलोमीटर दूर है. डलमऊ लगभग 30 किलोमीटर, लालगंज लगभग 55 किलोमीटर और कानपुर लगभग 125 किलोमीटर दूर है. अयोध्या लगभग 150 किलोमीटर और वाराणसी लगभग 205 किलोमीटर दूर है.
गंगा नदी से निकटता और बड़ी ग्रामीण आबादी के कारण ऊंचाहार में कृषि, सिंचाई और बुनियादी ढांचा महत्वपूर्ण स्थानीय मुद्दे हैं. एनटीपीसी बिजली संयंत्र की मौजूदगी मुख्य रूप से ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र को एक औद्योगिक पहचान देती है. संयंत्र से मिलने वाले लाभ और स्थानीय स्तर पर बिजली की उपलब्धता एक जैसी नहीं हैं. बड़ी ग्रामीण आबादी के लिए सड़क, पेयजल, सिंचाई, रोजगार और स्थानीय आर्थिक अवसर महत्वपूर्ण विषय बने हुए हैं.
भाजपा ने अब तक ऊंचाहार में हुए तीन विधानसभा चुनावों में आधिकारिक रूप से जीत दर्ज नहीं की है, लेकिन 2027 के चुनाव में उसके पास मनोज कुमार पांडे के रूप में एक महत्वपूर्ण स्थानीय चेहरा है. तीन बार के विधायक पांडे भाजपा में शामिल हो चुके हैं और राज्य मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने से उन्हें एक प्रमुख स्थानीय राजनीतिक भूमिका मिली है. भाजपा के सामने चुनौती पांडे के व्यक्तिगत समर्थन को पार्टी के वोट में बदलने की होगी, क्योंकि पार्टी ने स्वयं अब तक यह सीट नहीं जीती है.
समाजवादी पार्टी के सामने अलग तरह की चुनौती है. उसने ऊंचाहार में विधानसभा क्षेत्र के गठन के बाद हुए हर विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की है, लेकिन उसकी तीनों जीत एक ही उम्मीदवार के इर्द-गिर्द बनी थीं. पांडे के पार्टी छोड़ने के बाद समाजवादी पार्टी के सामने उनके राजनीतिक आधार को बनाए रखने वाले उम्मीदवार की तलाश की चुनौती है. पार्टी को विरोधी वोटों के बंटवारे को रोकने की भी कोशिश करनी होगी, खासकर तब जब कांग्रेस 2024 के लोकसभा चुनाव में अपने मजबूत प्रदर्शन के आधार पर आगे बढ़ने की कोशिश कर सकती है.
भाजपा ने 2017 में ही अपनी बढ़ती ताकत का संकेत दिया था, जब वह दूसरे स्थान पर रही थी और उसने उत्कृष्ठ मौर्य को उम्मीदवार बनाया था. मौर्य इससे पहले बसपा के टिकट पर इस सीट से चुनाव लड़ चुके थे. 2022 में भाजपा ने अपने वोटों की संख्या में और वृद्धि की, लेकिन पांडे से पीछे रही. अब भाजपा के पास पांडे के रूप में वही नेता है, जो इस सीट पर पहले तीन बार चुनाव जीत चुके हैं. इसके साथ ही पार्टी के पास सत्तारूढ़ दल का संगठनात्मक ढांचा और राज्य मंत्रिमंडल में पांडे की भूमिका भी है.
2027 का चुनाव यह तय करने वाला होगा कि मनोज कुमार पांडे का व्यक्तिगत चुनावी प्रभाव भाजपा के पक्ष में कितना स्थानांतरित होता है. समाजवादी पार्टी को उस नेता के बिना नया स्थानीय अभियान तैयार करना होगा, जिसने उसके लिए तीनों चुनाव जीते थे. वहीं कांग्रेस को उम्मीद होगी कि रायबरेली लोकसभा क्षेत्र में उसका मजबूत आधार ऊंचाहार के विधानसभा चुनाव में भी प्रभाव डाल सके. पिछले विधानसभा चुनावों में जीत के अंतर अपेक्षाकृत कम रहे हैं, इसलिए ऊंचाहार का चुनावी मुकाबला कई राजनीतिक और स्थानीय कारकों पर निर्भर करेगा.
(अजय झा)
Amarpal Maurya
BJP
Anjali Maurya
BSP
Atul Singh
INC
Shailendra Kumar Gupta
IND
Nota
NOTA
Pramod Kumar
IND
Pankaj Kumar Patel
AKBHAD
Kaushalendra Singh
IND
Shiv Kumar
IND
Ayodhya Prashad
IND
Amaresh Bahadur
IND
Akshay Pratap Singh
IND
Rahul Singh
AAAP
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मौजूदा डबल इंजन सरकार ने विरासत और विकास का अद्भुत समन्वय किया है, उन्होंने धार्मिक आयोजनों और सांस्कृतिक परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में आज ऐसे आयोजनों के लिए अनुकूल माहौल है.
उत्तर प्रदेश की सियासत में 'मटका पॉलिटिक्स' चर्चा में है. बीजेपी के बाद अब समाजवादी पार्टी ने भी लखनऊ स्थित अपने कार्यालय में काले मटके रखे हैं. इन मटकों पर कई मुद्दों का जिक्र करते हुए समाजवादी पार्टी ने बीजेपी पर निशाना साधा है.
बहुजन समाज पार्टी के नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद फिर से यूपी की सियासी जमीन पर उतरने जा रहे हैं. 28 अक्टूबर से अलग-अलग इलाके में रैली करने जा रहे हैं. इस अभियान के तहत वह पार्टी प्रत्याशियों के नामों का ऐलान करने के साथ ही 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बसपा के सियासी जनाधार को फिर से मजबूत करने की कमान संभालेंगे.
समाजवादी पार्टी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई नए नेताओं को शामिल कराया गया. इस दौरान अखिलेश यादव ने बीजेपी और चुनाव आयोग की मिलीभगत पर गंभीर आरोप लगाए. सपा दफ्तर में बीजेपी के 'पाप के मटके' रखकर वोट चोरी और मतदाता सूची में गड़बड़ी के खिलाफ जोरदार मोर्चा खोला गया.
उत्तर प्रदेश की राजनीति में मल्लाह और निषाद समुदाय पूर्वांचल से लेकर मध्य यूपी तक एक निर्णायक राजनीतिक ताकत के रूप में है. तमाम सियासी दलों के बीच इस अहम वोट बैंक को साधने की होड़ मची है. ऐसे में आइए जानते हैं कि यूपी में कितनी आबादी, कितनी सीटों पर प्रभाव और सत्ता में कितना दखल रखते हैं?
यूपी चुनाव से पहले सपा और बीजेपी के बीच धर्म के मुद्दे पर सियासी टकराव बढ़ गया है, जहां सपा सॉफ्ट हिंदुत्व की राह पर दिख रही है. अखिलेश यादव नवरात्रि पर लखनऊ में माता की चौकी कार्यक्रम में शामिल हुए, पूजा और आरती की और भारत की विविध संस्कृति और भाईचारे की बात कही. उधर बीजेपी यूपी ने सपा सांसदों के नवरात्रि में नॉन वेज खाने का वीडियो शेयर कर सपा को चुनावी हिंदू बताया और उस पर सनातन के अपमान का आरोप लगाया.
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्यसभा टिकट बंटवारे को लेकर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है. सीएम योगी ने कहा कि अखिलेश यादव को अपने खानदानी मुस्लिम वोटरों को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाना चाहिए था. इसके साथ ही उन्होंने सपा के 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के नारे पर सवाल उठाते हुए कहा कि टिकटों के आवंटन में पीडीए का कोई अस्तित्व नजर नहीं आया, बल्कि इसका असली मतलब केवल 'परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी' है.
अखिलेश यादव ने बीजेपी और चुनाव आयोग पर एक बार फिर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग और बीजेपी मिलकर देश और नागरिकों को धोखा दे रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि इस बार बीजेपी हर हाल में हारेगी. अखिलेश के मुताबिक राम मंदिर चंदा चोरी करने वालों को खुद भगवान हराएंगे.
गोंडा के भाजपा नेता भवानी भीख शुक्ला ने अपने पांच बेटों के साथ लखनऊ में अखिलेश यादव की मौजूदगी में समाजवादी पार्टी की सदस्यता ली. ब्रज भूषण सिंह का करीबी बताए जाने वाले परिवार की एंट्री के दौरान पार्टी दफ्तर में जय भवानी के नारे लगे. उनके अलावा खुर्जा, बुलंदशहर, सीतापुर, बाबागंज और हापुड़ समेत विभिन्न क्षेत्रों के नेताओं ने भी सपा की सदस्यता ग्रहण की.
Divya Mittal Jan Niti Bharat Party: आईएएस की नौकरी से इस्तीफा देने के बाद पूर्व अधिकारी दिव्या मित्तल ने राजनीति में उतरने का ऐलान कर दिया है. उन्होंने अपनी नई पार्टी 'जन नीति भारत' बनाने की घोषणा की है, जो आगामी चुनाव भी लड़ेगी. 2013 बैच की पूर्व आईएएस अधिकारी ने 13 साल के प्रशासनिक करियर के बाद यह कदम उठाया है.