स्याना, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले का एक सब-डिविजन लेवल का शहर है जहां नगर पालिका परिषद है. यह जिले के उत्तरी इलाके में प्रशासन, व्यापार और रोजमर्रा की नागरिक गतिविधियों के लिए एक अहम लोकल सेंटर है. यह मुख्य रूप से खेती वाले इलाके में बसा है. शहर और इसके आस-पास के इलाके खेती, छोटे-मोटे व्यापार और सेवाओं के जरिए बुलंदशहर की बड़ी अर्थव्यवस्था से जुड़े हैं. ये सेवाएं सब-डिविजन के गांवों और जनगणना वाले कस्बों की जरूरतों को पूरा करती हैं.
1957 के चुनावों से पहले बना स्याना, एक सामान्य (बिना आरक्षण वाली) विधानसभा सीट है और बुलंदशहर लोकसभा सीट के पांच हिस्सों में से एक है. इसमें पूरा स्याना सब-डिविजन आता है, जिसमें चार जनगणना वाले कस्बे- स्याना नगर पालिका परिषद, भवन बहादुर नगर नगर पंचायत, बुगरासी नगर पंचायत और खानपुर नगर पंचायत और स्याना सब-डिविजन के सभी 169 गांव शामिल हैं.
स्याना में अब तक 17 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. यहां कांग्रेस पार्टी सात बार जीती है, जबकि बीजेपी ने पांच बार यह सीट जीती है. शुरुआती सालों में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी दो बार जीती थी, जबकि जनता पार्टी, जनता पार्टी (सेक्युलर) और अलग होकर बनी राष्ट्रीय क्रांति पार्टी (जो बाद में अपनी मूल पार्टी बीजेपी में मिल गई) ने एक-एक बार यह सीट जीती. उत्तर प्रदेश की कई दूसरी सीटों के उलट, जहां 1985 के बाद कांग्रेस कमजोर पड़ गई, स्याना में वह समय-समय पर जीतती रही है, जिससे इस सीट की अपनी एक अलग राजनीतिक पहचान बनी है.
2012 में, कांग्रेस उम्मीदवार दिलनवाज खान ने बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के देवेंद्र भारद्वाज को 1,664 वोटों के मामूली अंतर से हराया. 2017 में बीजेपी ने जबरदस्त वापसी की, जब देवेंद्र सिंह लोधी ने दिलनवाज खान को 71,630 वोटों के अंतर से हराया. दिलनवाज खान तब कांग्रेस छोड़कर बीएसपी में चले गए थे. 2022 में बीजेपी की जीत का अंतर और बढ़ गया, जब लोधी ने दिलनवाज खान को 89,657 वोटों से हराकर सीट अपने पास बनाए रखी. इस बार खान राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे. देवेन्द्र सिंह लोधी को 1,49,125 वोट मिले, जबकि दिलनवाज खान को 59,468 वोट मिले.
लोकसभा चुनावों के दौरान स्याना विधानसभा क्षेत्र में भी बीजेपी के पीछे से आगे निकलकर मजबूत स्थिति में आने का ऐसा ही ट्रेंड देखने को मिला है. 2009 में समाजवादी पार्टी, बीजेपी से 19,490 वोटों से आगे थी. इसके बाद 2014 में बीजेपी ने बीएसपी पर 1,07,791 वोटों की बढ़त बना ली और तब से पीछे मुड़कर नहीं देखा. 2019 में इसने फिर से बीएसपी पर 79,075 वोटों की बढ़त बनाई, जबकि 2024 में यह कांग्रेस से 73,008 वोटों से आगे रही. 2024 के लोकसभा चुनाव में इस क्षेत्र से बीजेपी के भोला सिंह को 1,35,035 वोट मिले और कांग्रेस के शिवराम वाल्मीकि को 62,027 वोट मिले.
पिछले लोकसभा चुनाव में थोड़ी गिरावट से पहले, सालों तक स्याना के वोटर बेस में लगातार बढ़ोतरी देखी गई. यह संख्या 2012 में 3,44,713, 2017 में 3,71,730, 2019 में 3,77,490, 2022 में 3,87,326 और 2024 में 3,86,339 थी. हाल के वर्षों में वोटिंग प्रतिशत भी काफी अच्छा रहा है, हालांकि पिछले संसदीय चुनाव में यह पहली बार 60 प्रतिशत से नीचे चला गया. यह 2012 में 60.63 प्रतिशत, 2017 में 62.56 प्रतिशत, 2019 में 63.20 प्रतिशत, 2022 में 65.51 प्रतिशत और 2024 में 57.86 प्रतिशत था.
स्याना की आबादी मिली-जुली है, जिसमें मुस्लिम वोटर एक बड़ा हिस्सा हैं. यह बात इस तथ्य से भी पता चलती है कि अब तक हुए 17 विधानसभा चुनावों में से हिंदू उम्मीदवार नौ बार और मुस्लिम नेता आठ बार जीते हैं. इस निर्वाचन क्षेत्र में अनुसूचित जातियों की आबादी लगभग 17.24 प्रतिशत है. यहां ग्रामीण और शहरी मतदाताओं का अच्छा मिश्रण है, हालांकि ग्रामीण मतदाताओं की संख्या (55.50 प्रतिशत) शहरी मतदाताओं (44.50 प्रतिशत) से अधिक है.
स्याना पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ऊपरी गंगा-यमुना मैदानी इलाके में स्थित है. यहां की जमीन समतल और उपजाऊ है और मुख्य रूप से खेती पर आधारित है. यह इलाका खेती और उससे जुड़े कामों पर बहुत ज्यादा निर्भर है. यह शहर किसी बड़ी नदी के किनारे नहीं बसा है, लेकिन यह उस बड़े 'दोआब' इलाके का हिस्सा है जहां सिंचाई, मौसमी नाले, गांव के तालाब और नहरों से होने वाली खेती ग्रामीण जीवन के लिए महत्वपूर्ण हैं. इसकी बनावट मैदानी इलाके जैसी है, जिसमें खेत, गांव की सड़कें और छोटे बाजार मुख्य ग्रामीण परिवेश बनाते हैं.
स्याना का अपना कोई बड़ा रेलवे स्टेशन नहीं है, और इस इलाके के लिए रेल कनेक्टिविटी बुलंदशहर और मेरठ क्षेत्र के आस-पास के स्टेशनों पर निर्भर करती है. यह शहर सड़क मार्ग से बुलंदशहर, मेरठ, खुर्जा, हापुड़, गढ़मुक्तेश्वर और आस-पास के बाजार केंद्रों से जुड़ा हुआ है. ये जिला सड़कें और राज्य राजमार्ग यात्रियों और सामान की आवाजाही का मुख्य जरिया हैं. यहां की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से खेती, व्यापार, छोटे-मोटे कारोबार और सेवाओं पर टिकी है, और आस-पास के गाँव इस सब-डिविजन की मंडियों और स्थानीय बाज़ारों में उपज पहुंचाते हैं. पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों की तरह यहां भी खेती मुख्य काम है, जबकि यह शहर मुख्य रूप से ग्रामीण इलाकों के लिए एक सर्विस सेंटर के तौर पर काम करता है.
आस-पास के कस्बों और शहरों में जिला मुख्यालय बुलंदशहर (लगभग 25 किमी दूर), खुर्जा (लगभग 28 किमी), मेरठ (लगभग 55 किमी), हापुड़ (लगभग 35 किमी), गढ़मुक्तेश्वर (लगभग 45 किमी), गाजियाबाद (लगभग 70 किमी), नोएडा (लगभग 80 किमी), ग्रेटर नोएडा (लगभग 65 किमी), दिल्ली (लगभग 100 किमी), मुरादाबाद (लगभग 110 किमी), बदायूं (लगभग 120 किमी), अलीगढ़ (लगभग 90 किमी) और आगरा (लगभग 170 किमी) शामिल हैं. राज्य की राजधानी लखनऊ सड़क मार्ग से लगभग 340 किमी दूर है.
पिछले कुछ वर्षों में स्याना में बीजेपी के शानदार प्रदर्शन ने उसे 2027 के चुनावों के लिए मजबूत स्थिति में ला खड़ा किया है, खासकर इसलिए क्योंकि 2014 से कोई भी पार्टी उसे शीर्ष स्थान से हटाने के करीब भी नहीं पहुंच पाई है. मुस्लिम और अनुसूचित जाति के वोटों का बंटवारा विपक्ष के काम को और मुश्किल बना सकता है, खासकर समाजवादी पार्टी के नेतृत्व वाली चुनौती के लिए. इसके बावजूद, बीजेपी इस सीट को हल्के में नहीं ले सकती. अगर वह स्याना पर फिर से कब्जा बनाए रखना चाहती है, तो उसे अति-आत्मविश्वास से बचना होगा.
(अजय झा)
Dilnawaz Khan
RLD
Sunil Kumar
BSP
Km. Poonam
INC
Nota
NOTA
Gyanesh Kumar Chauhan
HINUP
Dinesh
IND
Sangeeta
IND
Satvir Singh
AAAP
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