सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश का एक नगर और सुल्तानपुर जिले का मुख्यालय है. यह गोमती नदी के दाहिने किनारे पर स्थित है और इसका इतिहास काफी पुराना है. स्थानीय परंपरा वर्तमान सुल्तानपुर की पहचान प्राचीन बस्ती कुशपुर या कुशभवनपुर से करती है, जिसके बारे में माना जाता है कि इसकी स्थापना भगवान राम के छोटे पुत्र कुश ने की थी. जनरल अलेक्जेंडर कनिंघम ने इस प्राचीन बस्ती की पहचान चीनी यात्री ह्वेनसांग के विवरण में उल्लेखित कुसापुर से की थी. आधुनिक सुल्तानपुर जिले का प्रशासनिक और व्यावसायिक केंद्र है तथा आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण स्थान है.
सुल्तानपुर विधानसभा क्षेत्र का गठन 1951-52 में हुए पहले आम चुनाव के समय हुआ था और यह सामान्य यानी अनारक्षित सीट है. 1952 के चुनाव में इस सीट को सुल्तानपुर वेस्ट के नाम से जाना जाता था और 1957 के चुनाव से इसका नाम सुल्तानपुर कर दिया गया. पहले चुनाव में सुल्तानपुर नाम वाली तीन विधानसभा सीटें थीं. इनमें सुल्तानपुर वेस्ट के अलावा सुल्तानपुर ईस्ट-कम-अमेठी ईस्ट और मुसाफिरखाना नॉर्थ-कम-सुल्तानपुर नॉर्थ शामिल थीं. 2008 के परिसीमन के बाद वर्तमान सुल्तानपुर विधानसभा क्षेत्र में पूरी सुल्तानपुर तहसील और सदर तहसील के कुछ हिस्से शामिल हैं. इसके कारण इस क्षेत्र का स्वरूप मुख्य रूप से ग्रामीण है.
सुल्तानपुर में गठन के बाद अब तक 18 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. शुरुआती दशकों में यहां कांग्रेस और भारतीय जनसंघ के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला. कांग्रेस ने लगातार तीन बार जीत दर्ज की, जिसके बाद जनसंघ ने लगातार तीन चुनाव जीते. 1980 से 1989 के बीच कांग्रेस ने फिर लगातार तीन चुनावों में जीत दर्ज की. इसके बाद उसका प्रभाव कम होता गया. भाजपा और उसकी पूर्ववर्ती जनसंघ ने मिलकर इस सीट पर कुल आठ बार जीत दर्ज की है, जबकि कांग्रेस ने छह बार जीत हासिल की है. कांग्रेस की जीत में 1952 में सुल्तानपुर वेस्ट सीट पर मिली जीत भी शामिल है. समाजवादी पार्टी ने यह सीट तीन बार जीती है. 1977 में तत्कालीन जनसंघ विधायक जितेंद्र कुमार अग्रवाल ने जनता पार्टी के चुनाव चिन्ह पर जीत दर्ज की थी. इससे पहले चुनाव के दौरान जनसंघ का जनता पार्टी में विलय हो गया था.
2012 में समाजवादी पार्टी के मौजूदा विधायक अनूप सांडा ने बहुजन समाज पार्टी के मोहम्मद ताहिर खान को 6,812 वोटों से हराकर सीट बरकरार रखी. उस चुनाव में भाजपा चौथे स्थान पर रही थी. 2017 में भाजपा ने सूर्यभान सिंह को उम्मीदवार बनाकर यह सीट जीत ली. सिंह ने बसपा के मुजीब अहमद को 32,393 वोटों से हराया, जबकि समाजवादी पार्टी के मौजूदा विधायक अनूप सांडा तीसरे स्थान पर रहे. 2022 में भाजपा ने फिर यह सीट बरकरार रखी. भाजपा के उम्मीदवार विनोद सिंह को 92,715 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार अनूप सांडा को 91,706 वोट मिले. इस तरह भाजपा ने 1,009 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की.
पिछले सात विधानसभा चुनावों में भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच लगातार मुकाबला देखने को मिला है और इस अवधि में किसी अन्य पार्टी ने यह सीट नहीं जीती. हालांकि लोकसभा चुनावों में सुल्तानपुर विधानसभा क्षेत्र का परिणाम अलग रहा है. पिछले चार लोकसभा चुनावों में इस विधानसभा क्षेत्र में चार अलग अलग दल सबसे अधिक वोट हासिल करने में सफल रहे हैं. 2009 में कांग्रेस ने बसपा पर 10,910 वोटों की बढ़त बनाई थी. 2014 में भाजपा ने समाजवादी पार्टी पर 29,864 वोटों की बढ़त हासिल की. 2019 में बसपा सबसे आगे रही और उसने भाजपा पर 12,563 वोटों की बढ़त बनाई. 2024 में समाजवादी पार्टी पहली बार इस विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक वोट हासिल करने वाली पार्टी बनी. उसके सुल्तानपुर लोकसभा उम्मीदवार रामभुआल निषाद को 101,236 वोट मिले, जबकि उस समय की भाजपा सांसद मेनका गांधी को 85,169 वोट मिले. इस तरह समाजवादी पार्टी ने 16,067 वोटों की बढ़त हासिल की. दोनों प्रमुख उम्मीदवारों के बीच वोट शेयर का अंतर 7.42 प्रतिशत अंक रहा.
सुल्तानपुर में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या पिछले वर्षों में लगातार बढ़ती रही है. 2012 में यह संख्या 3,16,190 थी, जो 2017 में बढ़कर 3,60,898 हो गई. 2019 के लोकसभा चुनाव में यह संख्या 3,71,553 थी. 2022 के विधानसभा चुनाव में मतदाताओं की संख्या 3,81,278 रही, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 3,84,564 था. 2026 में विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में 3,20,828 मतदाता हैं. यह 2024 के आंकड़े से 63,736 कम है और इसमें करीब 16.57 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई है.
सुल्तानपुर में मतदान प्रतिशत लगातार एक सीमित दायरे में रहा है. 2012 में मतदान प्रतिशत 57.55 था और 2017 में यह 56.83 प्रतिशत रहा. 2019 के लोकसभा चुनाव में यह मामूली रूप से घटकर 56.08 प्रतिशत हो गया. 2022 के विधानसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत फिर बढ़कर 57.89 प्रतिशत हुआ. 2024 में यह घटकर 56.29 प्रतिशत रहा.
सुल्तानपुर विधानसभा क्षेत्र में हिंदू आबादी बहुसंख्यक है और मुस्लिम आबादी भी उल्लेखनीय है, जिसका अनुमान करीब 26.20 प्रतिशत लगाया गया है. अनुसूचित जाति की आबादी लगभग 16.01 प्रतिशत है. अन्य समुदायों में यादव एक महत्वपूर्ण समूह हैं, जिनकी आबादी करीब 8 प्रतिशत मानी जाती है. ब्राह्मणों की आबादी करीब 13.5 प्रतिशत और बनिया समुदाय की आबादी करीब 12 प्रतिशत मानी जाती है. कोरी मतदाताओं की संख्या करीब 8 प्रतिशत और ठाकुर मतदाताओं की संख्या करीब 7 प्रतिशत मानी जाती है. कुर्मी, निषाद, अन्य पिछडे वर्गों के समूह तथा छोटे व्यापारी और कारीगर समुदाय भी क्षेत्र की सामाजिक संरचना का हिस्सा हैं. यह विधानसभा क्षेत्र मुख्य रूप से ग्रामीण है. इसकी करीब 76.10 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है, जबकि 23.90 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में रहती है.
सुल्तानपुर का इतिहास प्राचीन बस्ती कुशपुर या कुशभवनपुर से जुड़ा हुआ है. बाद में यह क्षेत्र उत्तर भारत के अलग अलग शासकों और अवध के नवाबों के अधीन रहा. अवध के ब्रिटिश शासन में विलय के बाद 1856 में सुल्तानपुर जिले का गठन किया गया और 1869 में इसे वर्तमान स्वरूप मिला. 1857 के विद्रोह में जिले की महत्वपूर्ण भूमिका रही. इस दौरान नाजिम मेहंदी हसन क्षेत्र के प्रमुख नेताओं में शामिल थे. उन्होंने 1857 में चांदा की लड़ाई में ब्रिटिश सेना के खिलाफ नेतृत्व किया और फरवरी 1858 में वहां एक और महत्वपूर्ण लडाई लड़ी. सुल्तानपुर ने 1921 के किसान आंदोलन और 1930 से 1942 के स्वतंत्रता आंदोलन से जुडे आंदोलनों में भी भाग लिया.
सुल्तानपुर विधानसभा क्षेत्र उत्तर प्रदेश के मध्य-पूर्वी हिस्से में गोमती नदी के किनारे स्थित है. क्षेत्र मुख्य रूप से ग्रामीण है और इसमें उपजाऊ जलोढ़ मैदानों का विस्तार है. कृषि स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है. गोमती इस क्षेत्र की प्रमुख नदी है, जिसका प्रभाव यहां की बस्तियों और कृषि गतिविधियों पर दिखाई देता है. क्षेत्र का भूभाग सामान्य रूप से समतल है. नदी के आसपास गोमती नदी घाटी से जुड़ी विशेष भौगोलिक संरचनाएं देखने को मिलती हैं. नहरों और अन्य जल संसाधनों के जरिए सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होती है, जिससे मुख्य रूप से कृषि आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहायता मिलती है.
कृषि स्थानीय अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है. धान, गेहूं, मक्का और दालें यहां की प्रमुख फसलों में शामिल हैं. पशुपालन और इससे जुड़ी गतिविधियां भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था में योगदान देती हैं. सुल्तानपुर का औद्योगिक आधार अपेक्षाकृत सीमित है और इसका संबंध मुख्य रूप से कृषि तथा खाद्य प्रसंस्करण से है. चावल मिल, आटा मिल, दाल मिल, डेयरी से जुडी गतिविधियां, कोल्ड स्टोरेज तथा अन्य छोटे विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के उद्यम यहां की आर्थिक गतिविधियों का हिस्सा हैं.
सुल्तानपुर की सड़क और रेल कनेक्टिविटी उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों और कस्बों से अच्छी है. राष्ट्रीय राजमार्ग के जरिए यह प्रयागराज और अयोध्या की दिशा में जुड़ा हुआ है. लखनऊ-सुल्तानपुर मार्ग राज्य की राजधानी से सीधा संपर्क उपलब्ध कराता है. सुल्तानपुर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से भी जुड़ा है, जो जिले से होकर गुजरता है और लखनऊ के साथ साथ उत्तर प्रदेश के पूर्वी जिलों तक पहुंच उपलब्ध कराता है. पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का उद्घाटन नवंबर 2021 में सुल्तानपुर जिले के कूरेभार एयरस्ट्रिप में किया गया था.
सुल्तानपुर जंक्शन लखनऊ-जौनपुर-वाराणसी रेलवे मार्ग पर एक महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन है. रेल मार्ग के जरिए सुल्तानपुर अयोध्या और प्रयागराज के अलावा लखनऊ, जौनपुर तथा अन्य प्रमुख केंद्रों से जुड़ा है. यह नगर अवध और पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रों के बीच महत्वपूर्ण स्थान पर स्थित है.
सुल्तानपुर लखनऊ से करीब 135 किलोमीटर, अमेठी से 31 किलोमीटर, रायबरेली से 90 किलोमीटर, प्रयागराज से 99 किलोमीटर, अयोध्या से 64 किलोमीटर और वाराणसी से करीब 162 किलोमीटर की दूरी पर है. सड़क मार्ग के अनुसार इन दूरियों में कुछ अंतर हो सकता है.
पिछले सात प्रमुख चुनावों में सुल्तानपुर का चुनावी आंकड़ा बदलते मतदान रुझानों को दर्शाता है. 2012 के बाद विधानसभा चुनावों में भाजपा ने इस सीट पर दो बार और समाजवादी पार्टी ने एक बार जीत दर्ज की है. भाजपा ने पिछले दो विधानसभा चुनावों में यह सीट जीती है. 2022 का मुकाबला केवल 1,009 वोटों के अंतर से तय हुआ था. भाजपा को 42.24 प्रतिशत वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी को 41.78 प्रतिशत वोट मिले. इसके दो वर्ष बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में सुल्तानपुर विधानसभा क्षेत्र में समाजवादी पार्टी ने भाजपा पर 16,067 वोटों की बढ़त हासिल की. दोनों दलों के बीच वोट शेयर का अंतर 7.42 प्रतिशत अंक रहा.
2026 के विशेष गहन पुनरीक्षण ने सुल्तानपुर के मतदाता आधार के आकार में भी महत्वपूर्ण बदलाव किया है. अंतिम मतदाता सूची में 3,20,828 मतदाता हैं, जबकि 2024 में यह संख्या 3,84,564 थी. इस तरह मतदाताओं की संख्या में 16.57 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई है. मतदाता सूची से नाम हटने का क्षेत्र की राजनीतिक पसंद पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इसका आकलन नहीं किया जा सकता. हालांकि मतदाताओं की संख्या में यह बड़ा बदलाव 2027 के चुनाव के संदर्भ में महत्वपूर्ण विषय रहेगा. भाजपा ने 2017 और 2022 में यह सीट जीती थी, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव में सुल्तानपुर विधानसभा क्षेत्र में समाजवादी पार्टी सबसे आगे रही थी. 2022 का विधानसभा चुनाव भी केवल 1,009 वोटों के अंतर से तय हुआ था. ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव में सुल्तानपुर का चुनावी मुकाबला महत्वपूर्ण रहेगा.
(अजय झा)
Anoop Sanda
SP
Dr. Devi Sahay Mishra
BSP
Mirja Akram Beg
AIMIM
Firoz Khan
INC
Vindhya
VSIP
Nota
NOTA
Shanti Patel
AJPI
Mirja Atahar Veg
IND
Siddharth Bhim Bauddh
BMUP
Dharmesh Kumar
AAAP
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