सिवालखास पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले का एक छोटा लेकिन चहल-पहल वाला कस्बा है, जिसकी अपनी नगर पालिका है. उपजाऊ गंगा-यमुना दोआब क्षेत्र में बसा यह कस्बा अपनी मजबूत कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था और जाट समुदाय के काफी प्रभाव के लिए जाना जाता है. यह कस्बा आस-पास के गांवों के लिए एक स्थानीय व्यापार केंद्र का काम करता है.
सिवालखास एक सामान्य (अनारक्षित) विधानसभा सीट है और बागपत लोकसभा सीट के पांच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है. 1967 में बनी इस सीट पर पहली बार 1974 में चुनाव हुए थे. इस सीट में सिवालखास नगर पालिका क्षेत्र, मेरठ तहसील के रोहता और जानी खुर्द कानूनगो सर्कल, और सरधना तहसील का सरूरपुर कानूनगो सर्कल व करनावल नगर पालिका क्षेत्र शामिल हैं. इस वजह से इसका स्वरूप मुख्य रूप से ग्रामीण है.
सिवालखास में अब तक 13 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. यहां के मतदाताओं ने किसी एक पार्टी के प्रति स्थायी निष्ठा नहीं दिखाई है. कांग्रेस पार्टी और जनता दल ने तीन-तीन बार, राष्ट्रीय लोक दल ने दो बार जीत हासिल की है, जबकि जनता पार्टी, भारतीय किसान कामगार पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी ने एक-एक बार जीत दर्ज की है. हाल के चुनावों में काफी राजनीतिक उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. पिछले चार विधानसभा चुनावों में चार अलग-अलग पार्टियां जीती हैं.
2007 में, बहुजन समाज पार्टी के विनोद कुमार हरित ने राष्ट्रीय लोक दल के नरेंद्र सिंह को 17,466 वोटों से हराया. 2012 में समाजवादी पार्टी ने यह सीट जीती, जब गुलाम मोहम्मद ने RLD के यशवीर सिंह को 3,587 वोटों के मामूली अंतर से हराया. 2017 में BJP की जीत हुई, जिसमें जितेंद्र पाल सिंह ने समाजवादी पार्टी के मौजूदा विधायक गुलाम मोहम्मद को 11,421 वोटों से हराया. 2022 में, राष्ट्रीय लोक दल में शामिल हो चुके गुलाम मोहम्मद ने BJP के मनेंद्र पाल सिंह को 9,182 वोटों से हराकर अपना दूसरा कार्यकाल हासिल किया. उन्हें 101,749 वोट मिले, जबकि मनेंद्र पाल सिंह को 92,567 वोट मिले. लोकसभा चुनावों में राष्ट्रीय लोक दल (RLD) ने सिवालखास इलाके में मज़बूत प्रदर्शन किया है और पिछले चार संसदीय चुनावों में से तीन में बढ़त बनाई है. 2009 में, RLD (तब BJP के साथ गठबंधन में) ने कांग्रेस से 7,547 वोटों की बढ़त बनाई थी. 2014 में, BJP ने समाजवादी पार्टी से 15,205 वोटों की बढ़त बनाई थी. 2019 में, समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में RLD ने BJP से 34,773 वोटों की बढ़त बनाई थी. 2024 में, RLD (अब BJP के साथ गठबंधन में) ने समाजवादी पार्टी पर 12,604 वोटों की बढ़त बनाए रखी. RLD के राजकुमार सांगवान को 94,799 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी के अमरपाल शर्मा को 82,195 वोट मिले.
सिवालखास विधानसभा क्षेत्र में रजिस्टर्ड वोटरों की संख्या लगातार बढ़ी है. 2012 में यह संख्या 286,449 थी, जो 2017 में बढ़कर 318,698 और 2019 में 328,267 हो गई. यह संख्या 2022 में बढ़कर 339,738 और 2024 के लोकसभा चुनावों में 343,735 हो गई.
वोटिंग प्रतिशत आम तौर पर ज्यादा रहा है. यह 2012 में 65.69 प्रतिशत, 2017 में 70.72 प्रतिशत, 2019 में 68.05 प्रतिशत, 2022 में 68.89 प्रतिशत था और 2024 में घटकर 59.43 प्रतिशत हो गया.
सिवालखास जाट-बहुल और हिंदू-बहुसंख्यक निर्वाचन क्षेत्र है. यहां जाटों का एक बहुत प्रभावशाली और बड़ा समूह है. यहां मुस्लिम आबादी भी काफी है. अनुसूचित जातियों की हिस्सेदारी कुल वोटरों में 16.91 प्रतिशत है. यह सीट मुख्य रूप से ग्रामीण है, जहां 91.40 प्रतिशत वोटर गांवों में और केवल 8.60 प्रतिशत शहरी इलाकों में रहते हैं. सिवालखास पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उपजाऊ गंगा-यमुना दोआब इलाके में बसा है. इसका इतिहास बहुत पुराना है और यह महाभारत काल से भी जुड़ा रहा है. यह इलाका मेरठ और बागपत क्षेत्रों के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक प्रभाव वाले दायरे में आता है. यह उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी वाले मैदानी इलाके में स्थित है.
इस कस्बे में जिला और राज्य राजमार्गों के जरिए अच्छी सड़क कनेक्टिविटी है. सबसे नजदीकी बड़ा रेलवे स्टेशन मेरठ शहर में है, जबकि आस-पास छोटे स्टेशन भी मौजूद हैं. जिला मुख्यालय मेरठ यहां से लगभग 25-30 किमी, बागपत लगभग 35-40 किमी, सरधना लगभग 20-25 किमी, मुरादाबाद लगभग 90-100 किमी, दिल्ली लगभग 70-80 किमी और राज्य की राजधानी लखनऊ लगभग 450-470 किमी दूर है.
सिवालखास की स्थानीय अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से खेती पर आधारित है. यहां के उपजाऊ मैदानों में गन्ना, अनाज, बागवानी और डेयरी फार्मिंग होती है. यहां के कई निवासी छोटे-मोटे कारोबार और व्यापार से भी जुड़े हैं. मतदाताओं के मुख्य मुद्दों में गन्ने की कीमतें, सिंचाई की सुविधाएं, बिजली की आपूर्ति, बाढ़ प्रबंधन, रोजगार के अवसर और सड़क व रेल इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं.
हालांकि सिवालखास ने पिछले तीन दशकों में किसी भी मौजूदा विधायक को दोबारा नहीं चुना है, लेकिन इस क्षेत्र में राष्ट्रीय लोक दल (RLD) की लगातार मजबूती, खासकर BJP के साथ मौजूदा गठबंधन के बाद 2027 के विधानसभा चुनावों में NDA को स्पष्ट बढ़त दिलाती है. RLD के पारंपरिक जाट और मुस्लिम समर्थन के साथ BJP के सवर्ण और अनुसूचित जाति (SC) वोट बैंक का मेल एक मजबूत गठबंधन बनाता है. विपक्ष बिखरा हुआ है, जिससे समाजवादी पार्टी (SP) के लिए इस सीट को दोबारा जीतना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि यह मुकाबला कई पार्टियों के बीच होने की संभावना है.
(अजय झा)
Maninder Pal
BJP
Mukrram Ali Urf Nanhe Khatun
BSP
Rafat
AIMIM
Amit Jani
AIFB
Jagdish Prasad
INC
Nota
NOTA
Nasim
IND
Bhupendra Singh
ASPKR
Kuldeep
AAAP
Subhash
IND
Tehzeeb
INJSP
Jagbir Singh
BaJD
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