सरोजिनी नगर लखनऊ शहर का एक सैटेलाइट टाउन और उत्तर प्रदेश के लखनऊ जिले में सरोजिनी नगर विकासखंड का मुख्यालय है. राज्य की राजधानी के नजदीक होने के कारण आसपास के ग्रामीण इलाकों में शहरी विस्तार हुआ है, जिससे इस क्षेत्र का स्वरूप तेजी से ग्रामीण और शहरी दोनों तरह का हो गया है.
इस क्षेत्र का नाम प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी, कवयित्री और 1947 से 1949 के बीच संयुक्त प्रांत, जिसे अब उत्तर प्रदेश कहा जाता है, की पहली महिला राज्यपाल सरोजिनी नायडू के नाम पर रखा गया है. मूल रूप से लखनऊ के दक्षिणी बाहरी हिस्से में स्थित यह इलाका मुख्य रूप से ग्रामीण और कृषि क्षेत्र था और ऐतिहासिक अवध क्षेत्र का हिस्सा रहा है. आजादी के बाद खास तौर पर पिछले कई दशकों में यह धीरे-धीरे ग्रामीण और शहरी इलाकों वाले मिश्रित क्षेत्र में बदल गया. यहां गांवों के साथ तेजी से विकसित होती आवासीय कॉलोनियां और संस्थागत क्षेत्र भी मौजूद हैं. आज सरोजिनी नगर पारंपरिक गांवों और आधुनिक विकास का मिश्रण है, जबकि इसके बाहरी हिस्सों में अभी भी काफी कृषि भूमि मौजूद है.
1967 के चुनाव से पहले गठित सरोजिनी नगर एक सामान्य और अनारक्षित विधानसभा क्षेत्र है. यह मोहनलालगंज लोकसभा सीट के पांच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है. 2008 के परिसीमन के बाद इस विधानसभा क्षेत्र में सरोजिनी नगर विकासखंड के बड़े हिस्से के साथ लखनऊ नगर सीमा में आने वाले कुछ क्षेत्र शामिल किए गए. इनमें लखनऊ नगर निगम के वार्ड 1 से 4, 7, 12 और 16 शामिल हैं. यह क्षेत्र बड़े ग्रामीण इलाके के साथ लखनऊ शहर के तेजी से बढ़ते शहरी हिस्सों को भी जोड़ता है.
सरोजिनी नगर में 1967 से अब तक 15 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. कांग्रेस पार्टी ने इस सीट पर पांच बार जीत दर्ज की है, जिसमें शुरुआती पांच चुनावों में चार जीत शामिल हैं. इसके बाद कांग्रेस का प्रभाव कम हुआ और सरोजिनी नगर एक ऐसी सीट बन गई जहां अलग-अलग दलों को जीत मिलती रही. इसके बाद किसी भी पार्टी को लगातार लंबे समय तक जीत नहीं मिली. समाजवादी पार्टी ने यह सीट तीन बार जीती है. बहुजन समाज पार्टी और भारतीय जनता पार्टी ने दो-दो बार जीत दर्ज की है. जनता पार्टी, एक निर्दलीय उम्मीदवार और जनता दल ने भी एक-एक बार यह सीट जीती है. व्यक्तिगत उम्मीदवारों में विजय कुमार त्रिपाठी ने कांग्रेस के टिकट पर चार बार चुनाव जीता, हालांकि वह लगातार दो चुनावों में जीत हासिल नहीं कर सके. उत्तर प्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके चंद्रभानु गुप्ता ने भी 1969 में चुनाव जीतकर सरोजिनी नगर का प्रतिनिधित्व किया था.
2012 में समाजवादी पार्टी के शारदा प्रताप शुक्ला ने सरोजिनी नगर सीट जीती. उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के शिव शंकर सिंह को 8,365 वोटों के अंतर से हराया. 2017 में भारतीय जनता पार्टी ने इस सीट पर बड़ा बदलाव करते हुए जीत हासिल की. 2012 में चौथे स्थान पर रहने वाली भाजपा ने स्वाति सिंह को उम्मीदवार बनाया. उन्होंने समाजवादी पार्टी के अनुराग यादव को 34,179 वोटों के बड़े अंतर से हराया. 2022 के चुनाव में भाजपा ने पूर्व आईपीएस अधिकारी और प्रवर्तन निदेशालय के पूर्व संयुक्त निदेशक राजेश्वर सिंह को उम्मीदवार बनाया. यह फैसला भाजपा के पक्ष में रहा और पार्टी ने अपनी जीत का अंतर और बढ़ा लिया. राजेश्वर सिंह को 160,626 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार अभिषेक मिश्रा को 104,440 वोट मिले. इस तरह भाजपा ने 56,186 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की.
लोकसभा चुनावों के दौरान भी सरोजिनी नगर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा ने इसी तरह बढ़त बनाई. 2009 में समाजवादी पार्टी ने बहुजन समाज पार्टी पर 8,919 वोटों की बढ़त बनाई थी. उस चुनाव में भाजपा तीसरे स्थान पर रही थी. 2014 में भाजपा ने मजबूत वापसी करते हुए इस क्षेत्र में पहला स्थान हासिल किया और बहुजन समाज पार्टी पर 70,280 वोटों की बढ़त बनाई. 2019 में भाजपा की बढ़त घटकर 61,003 वोट रह गई, लेकिन पार्टी पहले स्थान पर बनी रही. 2024 में भी भाजपा ने अपना पहला स्थान बरकरार रखा. भाजपा के मोहनलालगंज लोकसभा उम्मीदवार कौशल किशोर को 167,123 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार आर.के. चौधरी को 140,171 वोट मिले. इस तरह भाजपा ने इस विधानसभा क्षेत्र में 26,952 वोटों की बढ़त हासिल की.
सरोजिनी नगर में समय के साथ मतदाताओं की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है. 2012 में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 395,623 थी, जो 2017 में बढ़कर 498,573 और 2019 में 542,558 हो गई. 2022 में यह संख्या बढ़कर 569,107 और 2024 में 601,830 हो गई. हालांकि, इसके विपरीत मतदान प्रतिशत अपेक्षाकृत कम रहा है, खास तौर पर लोकसभा चुनावों में. 2012 में मतदान प्रतिशत 59.27 रहा, जबकि 2017 में यह 58.35 प्रतिशत था. 2019 के लोकसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत घटकर 55.31 हो गया. 2022 के विधानसभा चुनाव में इसमें मामूली सुधार हुआ और मतदान प्रतिशत 57.79 रहा. 2024 के लोकसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत फिर घटकर 54.52 हो गया.
सरोजिनी नगर एक हिंदू बहुल विधानसभा क्षेत्र है, जहां मुस्लिम आबादी की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम है. अनुमान के अनुसार यहां मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी 8.70 प्रतिशत है, जबकि अनुसूचित जाति के मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 28.68 प्रतिशत है. अन्य प्रमुख समुदायों में ब्राह्मण, ठाकुर, कुर्मी, लोध और यादव शामिल हैं. इसके अलावा निषाद और अन्य ओबीसी समूह भी यहां मौजूद हैं. अनुसूचित जाति के मतदाताओं में पासी और जाटव तथा चमार समुदायों की भी महत्वपूर्ण संख्या है. इस विधानसभा क्षेत्र में ग्रामीण और शहरी मतदाताओं का अनुपात लगभग बराबर है. करीब 49.84 प्रतिशत मतदाता ग्रामीण क्षेत्रों में और 50.16 प्रतिशत शहरी क्षेत्रों में रहते हैं. इस वजह से सरोजिनी नगर को एक प्रमुख ग्रामीण-शहरी मिश्रित विधानसभा क्षेत्र माना जाता है.
यह विधानसभा क्षेत्र लखनऊ के दक्षिणी और दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में स्थित है और राज्य की राजधानी के आसपास तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र का हिस्सा है. यहां का भूभाग मुख्य रूप से समतल और उपजाऊ है, जो मध्य गंगा के मैदान की सामान्य भौगोलिक विशेषताओं के अनुरूप है. ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि अभी भी महत्वपूर्ण है. लखनऊ से नजदीकी के कारण यहां आवासीय विकास, शैक्षणिक और संस्थागत विस्तार तथा व्यावसायिक और औद्योगिक गतिविधियों में वृद्धि हुई है. सरोजिनी नगर क्षेत्र अमौसी हवाई अड्डे और लखनऊ-कानपुर कॉरिडोर के औद्योगिक क्षेत्र के भी नजदीक है. विकासखंड का आर्थिक आधार लंबे समय से कृषि रहा है, हालांकि लखनऊ के विस्तार के कारण ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच का अंतर धीरे-धीरे कम हुआ है.
सरोजिनी नगर सड़क और रेल दोनों माध्यमों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है. लखनऊ-कानपुर सड़क मार्ग इस क्षेत्र का प्रमुख सड़क संपर्क है. लखनऊ-कानपुर रेलवे लाइन भी इस क्षेत्र को रेल संपर्क प्रदान करती है और हरौनी जैसे रेलवे स्टेशन आसपास के क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण हैं. चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, अमौसी यहां से थोड़ी दूरी पर है. इससे मुख्य रूप से ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र होने के बावजूद सरोजिनी नगर को हवाई संपर्क की सुविधा मिलती है. लखनऊ शहर की दूरी करीब 15 से 20 किलोमीटर है. कानपुर करीब 85 किलोमीटर, रायबरेली करीब 80 किलोमीटर, बाराबंकी करीब 45 किलोमीटर, अयोध्या करीब 140 किलोमीटर, प्रयागराज करीब 190 किलोमीटर और वाराणसी करीब 300 किलोमीटर दूर है. वास्तविक दूरी चुने गए मार्ग के आधार पर अलग हो सकती है. आसपास के औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े सरकारी दस्तावेजों के अनुसार हरौनी रेलवे स्टेशन करीब 2 किलोमीटर और लखनऊ हवाई अड्डा करीब 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.
सरोजिनी नगर में भारतीय जनता पार्टी की स्थिति मजबूत रही है. भाजपा ने पिछले दो विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज की है और लगातार तीन लोकसभा चुनावों में इस विधानसभा क्षेत्र में बढ़त बनाई है. इसके मुकाबले समाजवादी पार्टी ने एक विधानसभा चुनाव जीता है और एक लोकसभा चुनाव में इस क्षेत्र में बढ़त बनाई थी. 2014 के बाद हुए पांच लगातार चुनावों में भाजपा इस क्षेत्र में शीर्ष पर रही है. इस अवधि में भाजपा की बढ़त में कुछ कमी जरूर आई है, लेकिन उसका प्रदर्शन अभी भी ऐसा नहीं रहा है जिससे उसकी स्थिति पर तत्काल बड़ा खतरा दिखाई दे. 2027 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को भाजपा से यह सीट वापस लेने के लिए मजबूत चुनावी प्रदर्शन करना होगा.
(अजय झा)
Abhishek Mishra
SP
Mohd. Jaleesh Khan
BSP
Rudra Daman Singh
INC
Rohit Shrivastava
AAAP
Nota
NOTA
Satya Narayan
CPI
Sharda Pratap Shukla
IND
Ramvaran Singh
RJAVP
Anil Kumar Giri
APNBHRTSNT
Pratap Chandra
RRP
Chandra Shekhar Verma
JANADIP
Rama Shankar Bheem
MaKDL
Jitendra Kumar
BMUP
Arvind Singh
RTVP
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य की कानून व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर पिछली सरकारों पर निशाना साधा है. सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में आम जनता की आवाज नहीं सुनी जाती थी और अपराधियों को संरक्षण मिलता था. उन्होंने कहा कि आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है. अब अगर कोई अपराध करता है तो उस पर तुरंत कठोर कार्रवाई की जाती है. आज प्रदेश में कोई भी गुंडा टैक्स वसूलने की हिम्मत नहीं कर सकता.
पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने मिर्जापुर के चुनार में घोषणा की कि उनकी नई पार्टी जननीति भारत आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में भाग लेगी. उन्होंने कहा कि पार्टी मजबूत उम्मीदवार मिलने पर सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी.
उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ी के सामने आने के बाद निर्वाचन आयोग ने सख्त रुख अपनाया है. जांच के दौरान यह बात उजागर हुई कि बिना किसी फॉर्म 8 के आवेदन के ही 10,000 से अधिक मतदाताओं के नाम और उनके पिता के नाम में बदलाव कर दिए गए. चुनाव आयोग ने इस मामले को केवल एक लापरवाही नहीं बल्कि गंभीर अपराध माना है. इसके बाद संबंधित अधिकारियों और कंप्यूटर ऑपरेटरों के खिलाफ मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की गई है.
उत्तर प्रदेश में शनिवार को मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है. इस अभियान के तहत प्रदेश के सभी जिलों में सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक विशेष कैंप लगाए गए हैं.
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश में शिक्षक और स्नातक मतदाता सरकार से बुरी तरह नाराज हैं. उन्होंने दावा किया कि जनता ने बड़े पैमाने पर बीजेपी के खिलाफ मतदान करना शुरू कर दिया है. अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि अपनी हार सामने देखकर बीजेपी ने आगरा, फतेहपुर, इटावा, औरैया, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद और नोएडा जैसे कई जिलों में चुनावी धांधली करने की कोशिश की. प्रशासन और अधिकारियों के जरिए वोट डालने से रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन जनता सब समझ चुकी है और बीजेपी की हार तय है.
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बदायूं की पूर्व सांसद संघमित्रा मौर्य को 2024 में BJP ने टिकट नहीं दिया था. इसके बाद उनकी नाराजगी और राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं होती रहीं. पिता स्वामी प्रसाद मौर्य के कांग्रेस के साथ आने के बाद बिल्सी से चुनाव लड़ने की अटकलें तेज हुईं. अब संघमित्रा ने आज तक से बातचीत में BJP छोड़ने की चर्चा खारिज की है.
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पीलीभीत में वोटर लिस्ट की जांच के दौरान 10 हजार से ज्यादा ऐसी एंट्री मिलीं, जो जरूरी आवेदन के बिना की गई थीं. अब पूरे उत्तर प्रदेश में इसी तरह की गड़बड़ियों की जांच के आदेश दिए गए हैं.
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव रामपुर पहुंचे और जेल में बंद पार्टी नेता आजम खान से मुलाकात की. इस मुलाकात के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं. रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के छात्रों और एल्युमनी ने इस पूरे घटनाक्रम और असदुद्दीन ओवैसी के हालिया बयानों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है.