सहारनपुर नगर, उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले का एक शहरी निर्वाचन क्षेत्र है, जो सहारनपुर शहर का मुख्य हिस्सा है. यह एक हलचल भरा शहर है जिसका ऐतिहासिक अतीत बहुत समृद्ध है, लेकिन यह आज भी विकास और बुनियादी ढांचे से जुड़ी आम शहरी चुनौतियों से जूझ रहा है.
2008 के परिसीमन के बाद बना सहारनपुर नगर एक सामान्य, अनारक्षित विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र है और सहारनपुर लोकसभा सीट के पांच हिस्सों में से एक है. इससे पहले, सहारनपुर नगर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र, सहारनपुर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र का ही हिस्सा था. परिसीमन के बाद इसे पुरानी सीट से अलग करके बनाया गया था, और इसका शहरी मुख्य हिस्सा सहारनपुर नगर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र बन गया.
सहारनपुर नगर, मुख्य रूप से एक शहरी सीट होने के कारण, यहां के चुनाव काफी प्रतिस्पर्धी और कांटे की टक्कर वाले रहे हैं. अलग-अलग चुनावों में अलग-अलग पार्टियों ने जीत हासिल की है, जिससे पता चलता है कि यहां के मतदाता अपने विकल्पों का बहुत सोच-समझकर मूल्यांकन करते हैं और किसी एक पार्टी के प्रति अपनी वफादारी पक्की नहीं रखते. अब तक यहां चार विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, जिसमें 2014 में हुआ एक उपचुनाव भी शामिल है.
2012 में, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राघव लखनपाल ने कांग्रेस पार्टी के सलीम अहमद को 12,626 वोटों के अंतर से हराकर यह सीट जीती थी. लखनपाल के सहारनपुर लोकसभा सीट से लोकसभा के लिए चुने जाने के कारण 2014 में उपचुनाव हुआ. राजीव गुंबर ने BJP के लिए यह सीट बरकरार रखी और समाजवादी पार्टी के संजय गर्ग को 26,667 वोटों के बड़े अंतर से हराया. 2017 में नतीजे पलट गए; संजय गर्ग ने समाजवादी पार्टी के लिए यह सीट जीती और BJP के मौजूदा विधायक राजीव गुंबर को 4,636 वोटों के मामूली अंतर से हराया. 2022 में, BJP के राजीव गुंबर ने समाजवादी पार्टी के संजय गर्ग को 7,434 वोटों से हराकर यह सीट फिर से हासिल कर ली.
लोकसभा चुनावों के दौरान भी सहारनपुर नगर विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक वफादारी में बदलाव का ऐसा ही पैटर्न देखने को मिलता है. यह क्षेत्र हमेशा से ही प्रतिस्पर्धी रहा है, जहां प्रमुख पार्टियां उस समय की राजनीतिक लहरों और स्थानीय गठबंधनों के आधार पर बारी-बारी से बढ़त बनाती रही हैं. 2009 में, बहुजन समाज पार्टी ने समाजवादी पार्टी पर 10,123 वोटों की बढ़त बनाई थी. अगले दो संसदीय चुनावों में BJP का दबदबा रहा. 2014 में उसने कांग्रेस पर 10,123 वोटों की बढ़त हासिल की, और 2019 में BSP पर 57,839 वोटों की बढ़त बनाई. 2024 में, सहारनपुर लोकसभा सीट पर इमरान मसूद के नेतृत्व में कांग्रेस ने जबरदस्त प्रदर्शन किया. इससे इस क्षेत्र में शहरी मतदाताओं की पसंद का प्रभाव साफ झलकता है, क्योंकि कांग्रेस ने BJP पर 5,016 वोटों की बढ़त बना ली. इमरान मसूद को 134,949 वोट मिले, जबकि BJP के राघव लखनपाल को 129,933 वोट प्राप्त हुए.
सहारनपुर नगर में पिछले कुछ सालों में मतदाताओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है. 2012 में यहां 349,364 पंजीकृत मतदाता थे, जिनकी संख्या बढ़कर 2017 में 393,564, 2022 में 443,592 और 2024 में 452,509 हो गई.
एक शहरी सीट के लिहाज से यहां मतदान का प्रतिशत काफी ऊंचा रहा है, 2012 में 62.90 प्रतिशत, 2017 में 69.24 प्रतिशत और 2022 में 66.08 प्रतिशत. हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनावों में यह घटकर 60.59 प्रतिशत रह गया.
2011 की जनगणना के अनुसार, सहारनपुर नगर एक हिंदू-बहुल शहरी सीट है, जहां मुस्लिम आबादी भी काफी ज्यादा है. हिंदू और मुस्लिम मिलकर यहां भारी बहुमत बनाते हैं, जबकि अनुसूचित जातियों की आबादी 8.67 प्रतिशत है. पूरी तरह से शहरी क्षेत्र होने के कारण, इस निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में कोई भी ग्रामीण मतदाता शामिल नहीं है.
सहारनपुर का इतिहास काफी समृद्ध और बहुआयामी है. इसकी जड़ें मुगल-पूर्व काल से जुड़ी हैं. मुगलों के शासनकाल में इसका महत्व और बढ़ा, और बाद में अंग्रेजों के शासन में यह एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक और व्यापारिक केंद्र के रूप में उभरा. सूफी संत शाह हारून चिश्ती के नाम पर, दिल्ली के सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक ने इसे 'शाह हारूनपुर' नाम दिया था, जिसके बाद इसे इसका वर्तमान नाम 'सहारनपुर' मिला.
इस शहर को यह गौरव भी प्राप्त है कि यह उत्तर प्रदेश में ब्रिटिश शासन के खिलाफ सबसे शुरुआती सशस्त्र विद्रोहों में से एक का केंद्र रहा है. 1813 में, सहारनपुर के गुर्जरों ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ बड़े पैमाने पर विद्रोह कर दिया था, हालांकि इसे जल्द ही दबा दिया गया. राजा कुंजा सिंह, जो पहले रुड़की के पास कुंजा के ताल्लुकदार थे, 1824 में उन्होंने ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन के खिलाफ एक सशस्त्र विद्रोह का नेतृत्व किया और एक अर्ध-स्वतंत्र राज्य की स्थापना की. एक भीषण युद्ध के बाद, इस विद्रोह को कुचल दिया गया. लेकिन बाद में ब्रिटिश दस्तावेजों में यह दर्ज किया गया कि कुंजा सिंह की हार से पहले, आस-पास के जिलों से गुर्जर उनकी मदद के लिए आने की तैयारी कर रहे थे.
यह क्षेत्र लंबे समय से अपने लकड़ी के काम, हस्तशिल्प और व्यापार के लिए जाना जाता रहा है. स्वतंत्रता के बाद, यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक प्रमुख शहरी केंद्र के रूप में उभरा, लेकिन आज भी इसे अनियोजित विकास और बुनियादी ढांचे की बढ़ती मांगों के दबाव का सामना करना पड़ रहा है.
भौगोलिक दृष्टि से, सहारनपुर नगर शिवालिक पर्वतमाला की तलहटी में, ऊपरी दोआब क्षेत्र में स्थित है. यहां का भूभाग मुख्य रूप से समतल है और नहरों के जाल से सिंचित होने के कारण इसके आस-पास का क्षेत्र अत्यंत उपजाऊ है. यद्यपि यह निर्वाचन क्षेत्र स्वयं एक शहरी क्षेत्र है, फिर भी इसे अपनी आर्थिक मजबूती व्यापार, लघु उद्योगों, लकड़ी की नक्काशी, कागज निर्माण और इसके बाहरी क्षेत्रों में होने वाली कृषि गतिविधियों से प्राप्त होती है. यह अपने पारंपरिक शिल्पकलाओं, विशेष रूप से लकड़ी की बारीक नक्काशी और फर्नीचर के लिए प्रसिद्ध है.
बुनियादी ढांचे में राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के जरिए अच्छी सड़क कनेक्टिविटी शामिल है. सहारनपुर जंक्शन एक प्रमुख रेलवे स्टेशन है जो दिल्ली, देहरादून, हरिद्वार और अन्य शहरों से बेहतरीन रेल संपर्क प्रदान करता है. इस क्षेत्र में शिक्षा और स्वास्थ्य की सुविधाएं काफी अच्छी हैं, हालांकि बेहतर नागरिक सुविधाओं की मांग अभी भी ज्यादा है.
सहारनपुर नगर केंद्रीय रूप से स्थित है और कई महत्वपूर्ण कस्बों और शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है. यह खुद जिले का मुख्यालय है. उत्तराखंड की राजधानी देहरादून और हरिद्वार लगभग 70 से 80 किलोमीटर दूर हैं. राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली लगभग 180 से 200 किलोमीटर दूर है. अन्य आस-पास के केंद्रों में हरियाणा का यमुनानगर, रुड़की, मुजफ्फरनगर, रामपुर मनिहारन, देवबंद और सरसावा शामिल हैं. ये सभी व्यापार, रोजगार और दैनिक आवागमन के जरिए इस निर्वाचन क्षेत्र को प्रभावित करते हैं. राज्य की राजधानी लखनऊ 500 किलोमीटर से भी ज्यादा दूर है.
राज्य की सत्ताधारी पार्टी BJP ने सहारनपुर नगर में तीन बार यह सीट जीतकर अपनी ताकत दिखाई है, हालांकि 2017 में उसे बहुत कम अंतर से हार का सामना करना पड़ा था. इस सीट के शहरी स्वरूप और मिश्रित जनसांख्यिकी को देखते हुए, 2027 में BJP की संभावनाएं इस बात पर निर्भर करेंगी कि वह नागरिक विकास के वादों को कितना पूरा कर पाती है और हिंदू वोटों को कितना एकजुट रख पाती है. वहीं समाजवादी पार्टी और कांग्रेस अल्पसंख्यक वोटों और सत्ता-विरोधी लहर का फायदा उठाने की कोशिश करेंगी. संक्षेप में कहें तो, 2027 के विधानसभा चुनावों में सहारनपुर नगर में एक बार फिर कड़ा मुकाबला और दिलचस्प चुनावी जंग देखने को मिल सकती है.
(अजय झा)
Sanjay Garg
SP
Manish
BSP
Sukhwinder Kaur
INC
Nota
NOTA
Mansoor Ahmed
ASPKR
Avtar Singh
ABVP
Rita
BMUP
Usman Malik
AAAP
Sanjay Kumar
IND
Kamrooddin
SANVP
Salloudeen Raja
LD
Pulkit Thakral
IND
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओमप्रकाश राजभर ने एक बार फिर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन पर हमला बोला है. उन्होंने इस गठबंधन को 'ठगबंधन' कहा और अंदरूनी लड़ाई और विवादों का जिक्र किया. राजभर ने दावा किया कि सपा नेता 'आत्मनिर्भर' होकर काम कर रहे हैं.
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर जमकर निशाना साधा है. लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कई गंभीर आरोप लगाए. अखिलेश यादव ने कहा कि वर्तमान सरकार ने लोक कलाकारों, कवियों, खिलाड़ियों और साहित्यकारों को दी जाने वाली यश भारती सम्मान राशि बंद कर दी है. उन्होंने घोषणा की कि राज्य में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर इन सभी को फिर से सम्मानित किया जाएगा और मासिक सम्मान राशि को 50,000 रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये किया जाएगा.
बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने आगामी चुनावों को देखते हुए संगठन में एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण फेरबदल किया है. पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के उद्देश्य से मायावती ने पूरे देश के सांगठनिक ढांचे को तीन अलग-अलग सेक्टरों में विभाजित कर दिया है.
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल हमेशा से ही भारत की संवैधानिक संस्थाओं को नुकसान पहुंचाने और अपने राजनीतिक हितों के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने की कोशिश करते रहे हैं. इस बार भी वे देश के सबसे बड़े लोकतंत्र को बदनाम करने की साजिश कर रहे हैं. विपक्षी दलों, विशेष रूप से कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और राजद द्वारा चुनाव आयोग और मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर फैलाया जा रहा भ्रम बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और गैर-जिम्मेदाराना है.
मायावती ने पार्टी संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए इसे तीन सेक्टरों में बांटा है. इनकी जिम्मेदारी वरिष्ठ नेताओं को सौंपी गई है. सेक्टर-1 में 10 राज्यों की जिम्मेदारी रामजी गौतम और सुरेश राव को दी गई है, जबकि सेक्टर-2 में 9 राज्यों की जिम्मेदारी राजाराम और अतरसिंह यादव को दी गई है.
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी ने अपनी मीडिया रणनीति और प्रवक्ताओं की तैयारी को मजबूत करने के लिए एक अहम बैठक बुलाई. बैठक में प्रवक्ताओं की गलतियों को वीडियो प्रेजेंटेशन पर दिखाया गया और बिना तैयारी के टीवी डिबेट में शामिल होने पर कड़ी चेतावनी दी गई.
CM योगी ने लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान उन्होंने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर SIR और EVM को लेकर तीखा हमला किया. उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है. चुनाव आयोग को बदनाम करने की साजिश रच रहा है.
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने PM नरेंद्र मोदी के साथ मीटिंग की. इस मीटिंग के दौरान मुख्य रूप से राज्यसभा, विधानसभा और एमएलसी चुनावों को लेकर अहम चर्चा हुई. राज्यसभा की 10 सीटों को लेकर रणनीति पर बातचीत की गई.
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपनी पार्टी के प्रवक्ताओं के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की है. इस बैठक में अखिलेश यादव ने सभी प्रवक्ताओं को सख्त हिदायत देते हुए कहा है कि कोई भी प्रवक्ता बिना पूरी तैयारी के किसी भी टीवी डिबेट या चर्चा में हिस्सा न ले. उन्होंने सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव का जिक्र करते हुए कहा कि आज का दौर सोशल मीडिया का है, जहां सिर्फ 10 सेकंड की एक छोटी सी वीडियो रील भी किसी पार्टी की छवि को बना या बिगाड़ सकती है. इसलिए डिबेट में जाते समय विशेष सावधानी बरतनी बहुत जरूरी है. इसके साथ ही अखिलेश यादव ने प्रवक्ताओं को एक और बड़ी नसीहत दी है.
रायबरेली में समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव की पीडीए रथ यात्रा को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत में गरमागरम बहस छिड़ गई है. इस बहस में भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के प्रवक्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली. बीजेपी समर्थकों का कहना है कि अखिलेश यादव की यह रैली केवल दबाव की राजनीति का हिस्सा है और कांग्रेस को ब्लैकमेल करने के लिए की गई है. बीजेपी का आरोप है कि समाजवादी पार्टी ने हमेशा परिवारवाद और अपराधियों को बढ़ावा दिया है, जिसे उत्तर प्रदेश की जनता अब कभी स्वीकार नहीं करेगी.