सफीपुर, जिसे पहले सैपुर के नाम से जाना जाता था, उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में स्थित एक उपखंड स्तर का नगर है. इसका इतिहास 14वीं शताब्दी के शुरुआती दौर तक जाता है. माना जाता है कि इसकी स्थापना उगू के राजा के अधीन रहने वाले साई शुकुल नामक एक ब्राह्मण ने की थी. उनके नाम पर इस बस्ती का नाम सैपुर रखा गया था. मुगल काल के दौरान सफीपुर एक परगना की राजधानी रहा और 20वीं शताब्दी तक इसका यह प्रशासनिक दर्जा बना रहा. पुराने विवरणों में इसे एक विकसित और अच्छी तरह बसा हुआ नगर बताया गया है. वर्तमान में सफीपुर तहसील मुख्यालय है और आसपास के बड़ी संख्या में गांवों के लिए प्रमुख शहरी केंद्र के रूप में काम करता है.
1952 के विधानसभा चुनाव से पहले सफीपुर-कम-उन्नाव नॉर्थ नाम से दो सदस्यीय विधानसभा क्षेत्र बनाया गया था. वर्ष 1957 में इसका नाम बदलकर सफीपुर विधानसभा क्षेत्र कर दिया गया और इसे अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया, हालांकि तब भी यह दो सदस्यीय सीट रही. वर्ष 1962 में यह सामान्य सीट बनी, लेकिन 1967 में इसे फिर अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दिया गया. तब से यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है. सफीपुर उन्नाव लोकसभा क्षेत्र की छह विधानसभा सीटों में से एक है. वर्ष 2008 के परिसीमन के बाद इसके अंतर्गत सफीपुर तहसील के कुछ क्षेत्र, सफीपुर नगर पंचायत और हसनगंज तहसील के कुछ हिस्से शामिल किए गए. इसका बड़ा हिस्सा ग्रामीण क्षेत्र में आता है.
सफीपुर में अब तक विधानसभा चुनावों के कई चरण हो चुके हैं. वर्ष 1962 में पहली बार एकल विधायक वाली सीट के रूप में यहां मतदान हुआ था. वर्ष 1967 से यह अनुसूचित जाति आरक्षित सीट है. भारतीय जनता पार्टी ने इस सीट पर पांच बार जीत दर्ज की है. इसमें 1967 में भारतीय जनसंघ की जीत भी शामिल है, जो बाद में भाजपा का पूर्ववर्ती संगठन माना गया. कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने तीन-तीन बार यह सीट जीती है. समाजवादी पार्टी ने 2002 से 2012 के बीच लगातार तीन चुनावों में जीत दर्ज की थी. जनता दल ने दो बार और भारतीय क्रांति दल, जनता पार्टी तथा लोक दल ने एक-एक बार यह सीट जीती है. अनुसूचित जाति के मतदाताओं वाली इस सीट पर बहुजन समाज पार्टी अब तक चुनाव जीतने में सफल नहीं हुई है.
वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के सुधीर कुमार रावत ने अपनी सीट बरकरार रखी. उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के राम बरन को 9,054 मतों से हराया. भाजपा इस चुनाव में काफी पीछे तीसरे स्थान पर रही थी. वर्ष 2017 में भाजपा ने 21 साल के अंतराल के बाद सफीपुर सीट पर फिर जीत हासिल की. भाजपा के उम्मीदवार बंबा लाल दिवाकर ने बसपा के राम बरन को 27,236 मतों से हराया. वर्ष 2022 में भाजपा ने फिर यह सीट अपने पास रखी. बंबा लाल दिवाकर को 1,02,968 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी के सुधीर कुमार रावत को 68,836 वोट मिले. इस तरह भाजपा ने 34,132 मतों के अंतर से जीत दर्ज की.
लोकसभा चुनावों के दौरान भी सफीपुर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के प्रदर्शन में बदलाव देखने को मिला. वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में भाजपा यहां चौथे स्थान पर रही थी. उस समय कांग्रेस ने बसपा पर 41,187 मतों की बढ़त बनाई थी. वर्ष 2014 में भाजपा ने वापसी करते हुए बसपा पर 40,546 मतों की बढ़त हासिल की. वर्ष 2019 में भाजपा ने समाजवादी पार्टी पर 52,213 मतों की बढ़त बनाई. हालांकि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में यह अंतर काफी कम हो गया. भाजपा के उन्नाव लोकसभा उम्मीदवार स्वामी सच्चिदानंद हरि साक्षी को सफीपुर विधानसभा क्षेत्र में 89,225 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी की अन्नू टंडन को 87,174 वोट मिले. इस तरह भाजपा की बढ़त केवल 2,051 वोट रही.
सफीपुर में मतदाताओं की संख्या समय के साथ बढ़ी है. वर्ष 2012 में यहां 2,89,234 पंजीकृत मतदाता थे. वर्ष 2017 में यह संख्या बढ़कर 3,27,844 हो गई. वर्ष 2019 में 3,31,505 मतदाता दर्ज हुए. वर्ष 2022 में यह संख्या 3,46,515 और वर्ष 2024 में 3,54,437 तक पहुंच गई. इसके विपरीत मतदान प्रतिशत में उतार-चढ़ाव के साथ कुल मिलाकर कमी का रुझान देखा गया. वर्ष 2012 में मतदान प्रतिशत 58.73 रहा था. वर्ष 2017 में यह बढ़कर 60.16 प्रतिशत हुआ. वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत घटकर 56.69 प्रतिशत रह गया. वर्ष 2022 में यह मामूली रूप से बढ़कर 57.07 प्रतिशत हुआ. वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत फिर घटकर 54.19 प्रतिशत रह गया.
सफीपुर एक हिंदू बहुल विधानसभा क्षेत्र है, जहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या लगभग 13.50 प्रतिशत बताई जाती है. अनुसूचित जाति के मतदाताओं की हिस्सेदारी लगभग 36.23 प्रतिशत है. अनुसूचित जाति के प्रमुख समूहों में पासी, जाटव या चमार, कोरी और धोबी शामिल हैं. अन्य महत्वपूर्ण सामाजिक समूहों में लोधी, ब्राह्मण, ठाकुर या राजपूत, यादव, कुशवाहा, मौर्य, शाक्य, सैनी, वैश्य और अन्य पिछड़ा वर्ग समुदाय शामिल हैं. मुस्लिम मतदाता अल्पसंख्यक होने के बावजूद चुनावी समीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका रखते हैं. सफीपुर मुख्य रूप से ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र है. यहां करीब 91.27 प्रतिशत मतदाता ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं, जबकि लगभग 8.73 प्रतिशत मतदाता सफीपुर नगर पंचायत की शहरी सीमा में रहते हैं.
सैपुर की स्थापना 14वीं शताब्दी के शुरुआती दौर में साई शुकुल नामक ब्राह्मण ने की थी. वह उगू के राजा के अधीन थे और उन्हीं के नाम पर बस्ती का नाम सैपुर रखा गया. वर्ष 1389 में जौनपुर सल्तनत के इब्राहिम शर्की ने इस नगर पर अधिकार कर लिया. बताया जाता है कि साई शुकुल इसी युद्ध में मारे गए. इसके बाद विजेता पक्ष के अधिकारियों को क्षेत्र की जिम्मेदारी दी गई. 16वीं शताब्दी में सूफी संत मखदूम शाह सफी यहां रहे और बाद में इसी स्थान पर दफन हुए. इसके बाद बस्ती का नाम उनके नाम पर सफीपुर पड़ा. उनकी दरगाह के आसपास बाद में मस्जिद का भी विस्तार किया गया. यह स्थान सफीपुर के प्रमुख ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों में शामिल है.
आइन-ए-अकबरी में सफीपुर का उल्लेख एक परगना की राजधानी के रूप में मिलता है. 20वीं शताब्दी तक इसका प्रशासनिक महत्व बना रहा. पुराने विवरणों में इसे एक विकसित और अच्छी तरह बसा हुआ नगर बताया गया है. अवध के नवाबों के शासनकाल में दीवान उमेद राय और मौलवी फजल अजीम जैसे स्थानीय अधिकारियों ने नगर के विकास में भूमिका निभाई. उनके समय में बाजार, सराय, कुएं, मस्जिद और इमामबाड़ा जैसी संरचनाएं विकसित हुईं. सफीपुर की स्थापना और इसके नाम से जुड़ा विवरण पुराने गजेटियर रिकॉर्ड में भी मिलता है, जिसमें इसे मूल रूप से सैपुर बताया गया है और बाद के नाम को यहां दफन धार्मिक संत से जोड़ा गया है.
सफीपुर का भौगोलिक क्षेत्र मुख्य रूप से समतल है और यह गंगा के उपजाऊ मैदान का हिस्सा है. आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि प्रमुख आर्थिक गतिविधि है. खेती के साथ पशुपालन भी स्थानीय अर्थव्यवस्था का हिस्सा है. सफीपुर नगर आसपास के गांवों के लिए बाजार और सेवा केंद्र के रूप में कार्य करता है. कृषि के अलावा व्यापार, छोटे व्यवसाय और स्थानीय स्तर के उत्पादन से भी लोगों को रोजगार मिलता है. यहां स्टील के बक्से और अलमारियां, फर्नीचर तथा अगरबत्ती से जुड़े उत्पादों का निर्माण किया जाता है.
सफीपुर सड़क और रेल मार्ग के माध्यम से उत्तर प्रदेश के कई महत्वपूर्ण शहरों से जुड़ा है. यह नगर राज्य राजमार्ग 38 पर स्थित है, जो इसे बांगरमऊ और लखनऊ की दिशा से जोड़ता है. सड़क मार्ग से सफीपुर का संपर्क उन्नाव, हरदोई और आसपास के अन्य क्षेत्रों से भी है. सफीपुर रेलवे स्टेशन उत्तर रेलवे के नेटवर्क पर स्थित है. यहां से बांगरमऊ और उन्नाव की दिशा में रेल संपर्क उपलब्ध है. सफीपुर रेलवे स्टेशन उन्नाव जंक्शन से लगभग 28 किलोमीटर और बांगरमऊ रेलवे स्टेशन से करीब 21 किलोमीटर की दूरी पर है.
सड़क मार्ग से सफीपुर उन्नाव से लगभग 27 किलोमीटर, बांगरमऊ से 24 किलोमीटर, संडीला से 40 किलोमीटर, कानपुर से 49 किलोमीटर और लखनऊ से लगभग 63 किलोमीटर दूर है. हरदोई की दूरी करीब 65 किलोमीटर है. अयोध्या लगभग 200 किलोमीटर, प्रयागराज करीब 220 किलोमीटर और वाराणसी लगभग 300 किलोमीटर दूर है. वास्तविक दूरी चुने गए मार्ग के अनुसार अलग हो सकती है.
वर्ष 2009 के बाद सफीपुर विधानसभा क्षेत्र में हुए प्रमुख चुनावों के आंकड़ों में भाजपा का प्रदर्शन मजबूत रहा है. वर्ष 2017 और 2022 में भाजपा ने विधानसभा सीट पर जीत दर्ज की. लोकसभा चुनावों में भी 2014 और 2019 में भाजपा को बड़ी बढ़त मिली. हालांकि वर्ष 2024 में समाजवादी पार्टी ने भाजपा के मुकाबले अंतर काफी कम कर दिया. इस चुनाव में भाजपा की बढ़त केवल 2,051 वोट रही. ऐसे में सफीपुर विधानसभा क्षेत्र के आगामी चुनावों में भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच मुकाबला महत्वपूर्ण माना जा सकता है.
(अजय झा)
Sudhir Kumar
SP
Rajendra Kumar
BSP
Nota
NOTA
Shankar Lal Gautam
INC
Raju
BMUP
Jeet Gyani
AAAP
Mukesh
IND
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